अयोध्या केस : सुनवाई का 12वां दिन आज

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अयोध्या भूमि विवाद मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का आज 12वां दिन है। सुनवाई के दौरान वकील अपनी-अपनी दलीलें जजों की बेंच के सामने रख रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। इससे पहले 11वें दिन निर्मोही अखाड़े ने कहा कि हमारा दावा टाइटल पर नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 11वें दिन की सुनवाई की थी। इस सुनवाई में पूरे दिन निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील जैन ने बहस की थी। उन्होंने निर्मोही अखाड़े को राम जन्म भूमी का सेवा करने वाला बताया था। उन्होंने कहा था कि रामलला के नाम पर किसी और को याचिका करने का हक नहीं है और जगह हमारे हवाले की जाए।

अयोध्या केस जन्मभूमि के कर्ता-धर्ता के तौर पर हमारा दावा कभी भी देवता के खिलाफ नहीं है। निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने कहा कि हम देवस्थान के मैनेजर यानी देखरेख करने वाले दावेदार हैं। पजेशन पर हमारा अधिकार है।

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हमारा दावा जन्मस्थान पर स्थित मंदिर की देखरेख और पजेशन का है। जन्मभूमि के कर्ता-धर्ता के तौर पर हमारा दावा कभी भी देवता के खिलाफ नहीं है। निर्मोही अखाड़ा के वकील सुशील कुमार जैन ने कहा कि हम देवस्थान के मैनेजर यानी देखरेख करने वाले दावेदार हैं। पजेशन पर हमारा अधिकार है।

ससे पहले अयोध्या मामले में सुनवाई के 11वें दिन शुक्रवार को चीफ जस्टिस ने निर्मोही अखाड़े की ओर से दलील रख रहे सुशील जैन को हिदायत दी थी कि अब वो लिमिटेशन के बजाए केस की मेरिट पर बात करें। सुशील जैन ने कोर्ट से कहा कि वो विवादित ज़मीन पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर रहे, सिर्फ पूजा-प्रबन्धन और कब्जे का अधिकार मांग रहे है। अयोध्या बहुत बड़ा है, पर प्रभु राम की तस्वीर सिर्फ रामजन्म भुमि में स्थापित की गई थी।

मूल याचिकाकर्ता की हो चुकी है मृत्यु
एक हिंदू वादकार ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण राम मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था और हिंदू समुदाय के लोग अपना कब्जा छोड़े बिना वहां पूजा करते रहे। उन्होंने विवादित स्थल पर पूजा करने का उनका अधिकार लागू किए जाने का अनुरोध किया है। मूल याचिकाकर्ताओं में शामिल गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में निचली अदालत में मुकदमा दायर करके पूजा करने का अधिकार दिये जाने की मांग की थी। उनकी 1986 में मृत्यु हो गई थी और उनके पुत्र राजेंद्र सिंह अब उनका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

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गुरुवार को याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा था कि मैं श्री राम उपासक हूं और मुझे जन्मस्थान पर उपासना का अधिकार है। ये अधिकार मुझसे छीना नहीं जा सकता। उन्होंने 80 साल के अब्दुल गनी की गवाही का हवाला देते हुए कहा था कि गनी ने कहा था बाबरी मस्जिद राम जन्मस्थान पर बनी है। ब्रिटिश राज में मस्जिद में सिर्फ जुमे की नमाज़ होती थी, हिन्दू भी वहां पर पूजा करने आते थे।

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