फिल्मी अंदाज में पी चिदंबरम की हुई गिरफ्तारी, ऐसा रहा पल-पल का घटनाक्रम

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जोरबाग स्थित आवास पर जबर्दस्त ड्रामे के बाद आखिरकार पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने INX मीडिया केस में गिरफ्तार कर लिया है। चिदंबरम की गिरफ्तारी पूरे फिल्मी अंदाज में हुई है। तो चलिए जानते हैं कि बुधवार की शाम को चिदंबरम से जुड़ा पूरा घटनाक्रम कैसा रहा?

कब क्या हुआ?
8:10 PM: पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे।

8:15 PM: कांग्रेस मुख्यालय में आठ नेताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। पीसी में चिदंबरम ने खुद को निर्दोष बताया।

8:27 PM: CBI के कांग्रेस मुख्यालय पहुंचने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर चिदंबरम अपने घर के लिए निकले।

8:39 PM: चिदंबरम अपने घर पहुंचे।

8:42 PM: CBI की टीम कांग्रेस मुख्यालय से चिदंबरम के घर के लिए निकली।

8:53 PM: चिदंबरम के घर पहुंची CBI की टीम।

9:00 PM: चिदंबरम के घर का दरवाजा नहीं खुलने पर CBI की टीम दीवार फांदकर घर में घुसी। इस दौरान चिदंबरम के घर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

9:05 PM: ED की टीम भी चिदंबरम के घर पहुंची।

9:47 PM: CBI की टीम चिदंबरम को गिरफ्तार कर अपने साथ CBI मुख्यालय ले गई। इस दौरान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने CBI की गाड़ी को रोकने की कोशिश की।

11:20 PM: CBI मुख्यालय में पी चिदंबरम का मेडिकल टेस्ट कराया गया।

गिरफ्तारी से पहले कोर्ट में दिन कैसा गुजरा?
न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया मामलों में गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग वाली चिदंबरम की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया और मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की। संप्रग सरकार में 2004 से 2014 के दौरान गृह मंत्री और वित्त मंत्री रहे चिदंबरम ने दिल्ली उच्च न्यायालय के मंगलवार के फैसले पर रोक की मांग की है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी और सीबीआई और ईडी की तरफ से दायर मामलों में गिरफ्तारी की राह आसान कर दी।

चिदंबरम के लिए दिनभर जुटे रहे वकील
चिदंबरम की याचिका का वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति एम शांतनगौडर और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ के समक्ष पहले बुधवार सुबह उल्लेख किया, जिसने इसे तत्काल सुनवाई पर विचार करने के लिए प्रधान न्यायाधीश के समक्ष उठाने को कहा। चिदंबरम का पक्ष रख रहे वकीलों की टीम को तत्काल सूचीबद्ध किये जाने पर जब किसी तरह की सूचना नहीं मिली तो सिब्बल ने भोजनावकाश के बाद बैठी उसी पीठ के सामने फिर से इसका उल्लेख किया।

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कोर्ट ने आज सुनवाई से मना किया
सिब्बल के साथ मौजूद अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं विवेक तन्खा और इंदिरा जयसिंह ने पीठ को बताया कि अब जांच एजेंसियों ने चिदंबरम के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है जैसे कि वह “भागने वाले” हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका में खामियों को अभी-अभी दुरुस्त किया गया है और इसे “तत्काल सुनवाई के लिए आज सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता।” पीठ ने कहा, “याचिका को सूचीबद्ध किए बिना, हम मामले पर सुनवाई नहीं कर सकते।” सिब्बल ने जब मामले पर आज ही सुनवाई करने की मांग दोहराई तो पीठ ने कहा, “माफ कीजिए श्रीमान सिब्बल। हम मामले पर सुनवाई नहीं कर सकते।”

याचिका में थीं कुछ खामियां
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मौखिक उल्लेख के आधार पर चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई का यह कह कर विरोध किया कि उनके पास कागजात नहीं हैं। भोजनावकाश के बाद पीठ के फिर से बैठने पर सिब्बल ने कहा कि वह एक बार फिर सूचीबद्ध किए जाने के लिये मामले का उल्लेख कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इसे सूचीबद्ध किए जाने को लेकर रजिस्ट्री से कुछ भी पता नहीं चला है। पीठ ने उनसे कहा कि याचिका में कुछ खामियां थीं और रजिस्ट्री ने उसे इस बारे में सूचित किया है। जब सिब्बल ने कहा कि खामियों को दूर कर लिया गया है, तो पीठ ने रजिस्ट्रार (न्यायिक) सूर्य प्रताप सिंह को बुलाया और खामियों के बारे में पूछा।

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रजिस्ट्रार ने दिया जवाब
रजिस्ट्रार ने कहा कि खामियों को “अभी-अभी” दुरुस्त किया गया है और याचिका को उचित पीठ के समक्ष आवंटित किए जाने के लिये प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखा जाएगा। इस पर सिब्बल ने कहा कि मामले को आज सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता है क्योंकि प्रधान न्यायाधीश संविधान पीठ में बैठे हैं और वह चार बजे से पहले नहीं उठ पाएंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता जहां बार-बार मामले में सुनवाई किए जाने पर जोर दे रहे थे वहीं, पीठ ने उनसे कहा, “हमने मामले को प्रधान न्यायाधीश के समक्ष रखे जाने का पहले ही निर्देश दे दिया है।”

सिब्बल के सभी तर्क रहे बेकार
पीठ ने कहा, “आम तौर पर मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किये जाने की खातिर प्रधान न्यायाधीश के समक्ष शाम में रखा जाता है लेकिन हमने सुबह में ही इसे तुरंत सीजेआई के पास भेज दिया।” साथ ही पीठ ने कहा, “यह हमारा काम नहीं बल्कि यह रजिस्ट्री को करना है।” जब सिब्बल ने पीठ को याद दिलाया कि पूर्व में मौखिक उल्लेख के आधार पर लोगों को गिरफ्तारी से संरक्षण दिया गया है तो पीठ ने कहा, “हमने रजिस्ट्री को निर्देश दिया और उसने पाया कि याचिका में कुछ खामियां थीं।” सुनवाई के अंत में सिब्बल ने कहा कि चिदंबरम यह शपथ पत्र देने के लिए तैयार हैं कि वह नहीं भागेंगे लेकिन पीठ ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और सुनवाई समाप्त कर दी।

क्या कहते हैं CBI और ED के वकील
सीबीआई और ईडी की तरफ से पेश हुए मेहता ने सुबह में पीठ को बताया कि यह धनशोधन का “काफी बड़ा” मामला है। मेहता की सहायता कर रहे एक विधि अधिकारी ने कहा, “हम चिदंबरम के किसी भी कदम का विरोध करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।” सिब्बल ने शीर्ष अदालत को बताया कि चिदंबरम की याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा कि चिदंबरम को सीबीआई और ईडी की ओर से दायर आईएनएक्स मामले में एक साल से अधिक वक्त तक गिरफ्तारी से संरक्षण दिया गया। सिब्बल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने चिदंबरम को गिरफ्तारी से किसी भी तरह का संरक्षण देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें शीर्ष अदालत का रुख करना पड़ा।

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चिदंबरम पर ‘मंगल भारी रहा’
सिब्बल ने कहा, “मामले को सुना जाना चाहिए। इस बीच मुझे (चिदंबरम) गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।” साथ ही उन्होंने अदालत को बताया कि जांच एजेंसियों ने चिदंबरम के घर के बाहर मंगलवार देर रात दो बजे एक नोटिस भी चिपकाया था कि उन्हें दो घंटे के भीतर उनके समक्ष पेश होना होगा। जब सिब्बल ने कहा कि उनकी याचिका पर रजिस्ट्री से नंबर डाला जा चुका है तो पीठ ने कहा, “आप सारी औपचारिकताएं पूरी करिए।” चिदंबरम को मंगलवार को बड़ा झटका लगा था जब उच्च न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया मामले में उन्हें “मुख्य षड्यंत्रकारी” बताते हुए उनकी अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी और सीबीआई एवं ईडी द्वारा उन्हें गिरफ्तार किए जाने की राह आसान कर दी थी।

‘गिरफ्तारी से पहले जमानत देना न्यायसंगत नहीं’
उच्च न्यायालय ने कहा, “महज इसलिए कि वह सांसद हैं उन्हें गिरफ्तारी से पहले जमानत देना न्यायसंगत नहीं होगा” और प्रभावी जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है तथा “इस तरह के मामले में जमानत देना समाज में गलत संदेश भेजेगा।” सीबीआई ने 15 मई 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज की थी जिसमें आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी में गड़बड़ियों का आरोप लगा था। इस दौरान चिदबंरम वित्त मंत्री थे। इसके बाद 2018 में ईडी ने इस संबंध में धनशोधन का मामला दर्ज किया था।

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