राबड़ी बताएं, उनके शासनकाल में मेडिकल कॉलेजों की क्या दशा थी:

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उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अत्यधिक गर्मी, लू और चमकी बुखार से बड़ी संख्या में बच्चों-बुजुगोर्ं की मृत्यु हर संवेदनशील व्यक्ति को विचलित करने वाली है। सरकार ने पीड़तों की मदद और बचाव के लिए तेजी से कदम भी उठाये। एईएस का इलाज मुफ्त किया गया, रोगी को अस्पताल लाने का खर्च देने का निर्णय हुआ, मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये देने की शुरुआत की गई और दर्जन भर लोगों तक यह राशि पहुंचा भी दी गई।श्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि एहतियात के तौर पर दिन के 10 बजे से शाम के पांच बजे तक सरकारी-गैरसरकारी निर्माण पर रोक लगी। स्कूल-कालेज 24 जून तक बंद कर दिये गए। भविष्य की चुनौती को देखते हुए मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में 100 बेड का आईसीयू बनाने का फैसला किया गया। सरकार हर संभव उपाय कर रही है, लेकिन जिन्होंने ने 15 साल के अपने शासन में सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों को आवारा पशुओं का तबेला बना दिया था, वे बच्चों की चिता पर राजनीति की रोटियां सेंकने निकल पड़े हैं। राजद के लोगों को हाल के लोकसभा चुनाव के दौरान अमर्यादित टिप्पणी और तयहीन आरोप लगाने के कारण जनता ने जीरो पर आउट किया, लेकिन मात्र 22 दिन बाद मौका मिलते ही उनकी पुरानी बोली फूटने लगी। राबड़ी देवी बतायें कि उनके शासन में मेडिकल कॉलेजों की क्या दशा थी। एक पूर्व मुख्यमंत्री से लोग जानना चाहेंगे कि हाल में चमकी बुखार से 1000 बच्चों की मौत के आंकड़े का आधार क्या है। क्या मौत के मनगढ़ंत आंकड़े पेश करना किसी जिम्मेदार व्यक्ति का काम हो सकता है।

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लोकसभा चुनाव समाप्त होने के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पहले की तरह जनता की समस्याओं को सुनकर उसका निदान करने में जुट गए हैं। श्री मोदी ने आज अपने सरकारी आवास पर जनता के दरबार में उपमुख्यमंत्री कार्यक्रम के तहत प्रदेश के कई क्षेत्रों से आए जनता की समस्याओं को सुना और यथासंभव निदान करने का प्रयास भी किया।

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