केजरीवाल को बड़ा झटका, LG को मिला ACB पर कंट्रोल; तबादलों पर बँटी बेंच

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच शक्तियों के बंटवारे से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला सुनाया. जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले को लेकर अलग-अलग राय जाहिर की. हालांकि यह साफ किया कि दिल्ली पुलिस का नियंत्रण दिल्ली सरकार के पास नहीं केंद्र के पास होगा. इसके साथ ही केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा कि एंटी करप्शन ब्यूरो का नियंत्रण उपराज्यपाल के पास रहेगा.

पिछले साल 4 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने दिल्ली सरकार बनाम एलजी अधिकार विवाद में सिर्फ संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या की थी. पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि कानून बनाना दिल्ली सरकार का अधिकार है. संविधान पीठ ने इस बात को सर्वसम्मति से माना था कि असली शक्ति मंत्रिमंडल के पास है और चुनी हुई सरकार से ही दिल्ली चलेगी. कोर्ट ने उस वक्त कहा था कि कानून व्यवस्था, पुलिस और ज़मीन को छोड़ कर बाकी मामलों में उपराज्यपाल स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि उपराज्यपाल अनिल बैजल को स्वतंत्र फैसला लेने का अधिकार नहीं है और उन्हें मंत्रिपरिषद की मदद और सलाह पर काम करना होगा

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केंद्र सरकार ने दो साल के अंदर दूसरी बार रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अश्विनी लोहानी को एयर इंडिया का अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नियुक्त किया है. सरकार ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी किया. लोहानी आज पद संभालेंगे.

जस्टिस भूषण ने कहा कि प्रशासनिक सेवाएं दिल्ली सरकार के कार्यक्षेत्र से पूरी तरह बाहर हैं. अब इस पर तीन जजों की बेंच फैसला सुनाएगी.

प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले के अलावा जस्टिश अशोक भूषण ने जस्टिस सीकरी के फैसलों पर सहमति जाहिर की है. सीकरी ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड और पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अपॉइंट करने की शक्तियां दिल्ली सरकार के पास रहेंगी.

जस्टिस सीकरी ने कहा कि केंद्र सरकार के पास जांच के आदेश होंगे. उन्होंने कहा, “इस मामले में दोनों सरकारो के बीच आपसी सम्मान और सहयोग की जरूरत होगी. दोनों को समझना होगा कि उन्हें जनता की सेवा के लिए चुना गया है.”

दिल्ली सरकार के पास नहीं होगा पुलिस का कंट्रोल- जस्टिस सीकरी | जस्टिस सीकरी ने कहा कि एंटी करप्शन ब्यूरो एलजी के कंट्रोल में रहेगा और दिल्ली सरकार के पास पुलिस को कंट्रोल करने की शक्तियां नहीं होंगी.

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क्या दिल्ली सरकार के पास प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और ट्रांसफर का अधिकार होना चाहिए? इस पर जस्टिस सीकरी और जस्टिस भूषण की अलग-अलग राय है. जस्टिस सीकरी ने कहा कि जॉइंट सेक्रेटर और उससे ऊपर की रैंक के अधिकारियों की नियुक्ति और ट्रांसफर का अधिकार एलजी के पास होना चाहिए, वहीं अन्य अधिकारियों पर दिल्ली सरकार फैसला ले सकती है. जबकि जस्टिस भूषण का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और ट्रांसफर के अधिकार दिल्ली सरकार के पास होना ही नहीं चाहिए.

जस्टिस सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की दो सदस्यीय बेंच दिल्ली सरकार बनाम एलजी पर अपना फैसला सुना रही है.

जस्टिस सीकरी ने कहा- दिल्ली की चुनी हुई सरकार की कार्यकारी शक्तियां और केंद्र सरकार की शक्तियां अलग-अलग हैं. हम बार-बार एक ही बात पर बहस नहीं कर सकते हैं.

पिछले साल 4 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने दिल्ली सरकार बनाम एलजी अधिकार विवाद में सिर्फ संवैधानिक प्रावधानों की व्याख्या की थी. पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि कानून बनाना दिल्ली सरकार का अधिकार है. संविधान पीठ ने इस बात को सर्वसम्मति से माना था कि असली शक्ति मंत्रिमंडल के पास है और चुनी हुई सरकार से ही दिल्ली चलेगी. कोर्ट ने उस वक्त कहा था कि कानून व्यवस्था, पुलिस और ज़मीन को छोड़ कर बाकी मामलों में उपराज्यपाल स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि उपराज्यपाल अनिल बैजल को स्वतंत्र फैसला लेने का अधिकार नहीं है और उन्हें मंत्रिपरिषद की मदद और सलाह पर काम करना होगा

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