सुप्रीम कोर्ट में अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के लिए अगली सुनवाई 10 अगस्त तक के लिए टली

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उच्चतम न्यायालय ने देश भर में अंतिम वर्ष के विश्वविद्यालय परीक्षा आयोजित करने के दिशानिर्देशों को चुनौती देते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की याचिका से संबंधित मामले में आज सुनवाई हुई है। अब अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के लिए अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।  यूजीसी द्वारा विशविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को 30 सितंबर 2020 तक कराने के निर्देशों को विरोध देश भर में हो रहा है। यह विरोध कोविड-19 महामारी के बीच परीक्षाओं के आयोजन को लेकर है। आज हो रही सुनवाई में अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं के आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

इससे पहले 27 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर. एस. रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की वाली पीठ ने यूजीसी का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया था कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की प्रतिक्रिया दाखिल की जाए

UGC परीक्षा की गाइडलाइन: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई |  अपडेट

  • सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 10 अगस्त तक के लिए टली, अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर अभी नहीं हुआ फैसला
  • याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता का पक्ष रख रहे अधिवक्ता सिंघवी ने कहा कि यूजीसी द्वारा 22 अप्रैल 2020 को और 6 जुलाई 2020 जारी दिशा-निर्देशों में कोई अंतर नहीं है। यूजीसी ने 22 अप्रैल की गाइडलाइंस में 31 अगस्त तक परीक्षाओं के आयोजन के निर्देश दिये थे, वहीं 6 जुलाई की गाइडलाइंस में परीक्षाओं को 30 सितंबर तक करा लेने के निर्देश दिये थे।
  • वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी अंतिम वर्ष के कानून छात्र यश दुबे के लिए प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि अभी COVID19 के 16 लाख मामले हैं। यूजीसी द्वारा प्रतिक्रिया बिना किसी मन के आवेदन के दाखिल की गई है। सिंघवी ने कहा कि पहले के दिशानिर्देशों को देखें और 6 जुलाई को जारी किए गए लोगों को देखें।
  •     सिंघवी ने अपनी दलील जारी रखते हुए कहा, “22 अप्रैल को यूजीसी द्वारा 3 महीने पहले पहली गाइडलाइन थी।
  •     सुप्रीम कोर्ट की 3-जजों की बेंच ने मामले में दायर सभी रेज़ीडरों को आत्मसात करने में समय लिया।
  •     इस मामले में SC पास हो गया क्योंकि याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर किए गए प्रतिवाद क्रम में नहीं हैं।
  •     शीर्ष अदालत द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद महत्वपूर्ण सुनवाई होती है और यह जानने की कोशिश की जाती है कि COVID19 के बीच परीक्षा में उपस्थित होने से आशंकित छात्रों द्वारा उठाए गए स्वास्थ्य संबंधी प्रश्न गलत हैं या नहीं।
  •     मामले में मुख्य याचिका अधिवक्ता अनुभा श्रीवास्तव सहाय ने दायर की थी। वह भारत के व्यापक अभिभावक संघ और बाल अधिकार कार्यकर्ता के अध्यक्ष हैं। सहाय का तर्क अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव द्वारा किया जाएगा।
  •     वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ। अभिषेक मनु सिंघवी अंतिम वर्ष के कानून छात्र यश दुबे का भी प्रतिनिधित्व करेंगे।
  •     वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान, महाराष्ट्र के वर्ली से शिवसेना विधायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के पुत्र, युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे के लिए दिखाई देंगे।
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छात्रों की क्या मांग है? छात्रों ने यह भी मांग की परीक्षाएं कराने के बजाया छात्रों को उनकी मेरिट के आधार पर आगे मार्किंग तय की जाए। इससे कई छात्र कोरोना के इंफेक्शन से बच सकते हैं। इस मामले पर विश्वविद्यालय की  ओर से कहा गया है कि उन्हें यदि यूजीसी की ओर से ऐसे निशा निर्देश मिलते हैं तो वह जरूरी परीक्षाओं के बजाए मेरिट पर आधारित प्रोग्रेशन पर अमल करेंगे। यहां तक कि फाइनल ईयर के छात्रों को भी इसी आधार पर पास किया जाएगा।

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