राजधानी पटना से जोड़ने वाला महात्मा गांधी सेतु के पश्चिमी हिस्से का हुआ लोकार्पण

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पटना को उत्तर बिहार से जोड़ने वाला गांधी सेतु के जीर्णोद्धार का काम पूरा हो गया है। आज शुक्रवार, 31 जुलाई से इसके पश्चिमी हिस्से 2 लेन से गाड़ियां चलनी शुरू हो गई है । पुल का उद्घाटन पटना से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दिल्ली से केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी दोपहर 12 बजे लोकार्पण हुआ ।

इस अवसर पर नितिन गडकरी ने कहा कि पटना में गंगा नदी पर नए फोरलेन पुल के निर्माण का कार्य इसी साल अक्टूबर में शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला पुल के समानांतर नए पुल और भोजपुर बक्सर गंगा पर पल का निर्माण भी दो महीने में शुरू कर दिया जाएगा।  उन्होंने यह भी कहा कि गांधी सेतु के पूर्वी लेन के सुपर स्ट्रक्चर का काम भी 18 महीने में पूरा कर लिया जाएगा। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि मोकामा मुंगेर एनएच 80, मुजफ्फरपुर बरौनी एनएच 28 मुजफ्फरपुर सोनवर्षा एनएच 77 को फोरलेन बनाया जाए।

इस पुल की लंबाई 5575 मीटर है और इस पुल की लागत 1742 करोड़ रुपये है। उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ता यह पुल बिहार की जीवन रेखा है, इसके निर्माण से बिहार को तेज आर्थिक सामाजिक विकास को बल मिलेगा।

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गांधी सेतु के जीर्णोद्धार का कार्य तीन वर्ष पूर्व जुलाई, 2017 में शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में विभिन्न प्रकार की आपत्ति प्राप्त करने में समय लगा। यातायात प्रबंधन भी एक समस्या थी। सरकार ने उचित ट्रैफिक प्रबंध कर मात्र दो लेन से ही आवागमन का प्रबंध किया और दो लेन का पुनरुद्धार कार्य जारी रखा। जीर्णोद्धार कार्य में ध्यान रखा गया कि पुराने पुल का मलबा गंगा में न गिरे। पुराने पुल के सुपर स्ट्रक्चर के सारे मलवे को क्रश कर वैकल्पिक उपयोग किया गया।

आवागमन के लिए खोले जा रहे पश्चिमी दो लेन के अवसर पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी  भी उपस्थित थे। सेतु के चारों लेन के पुनरुद्धार में कुल 66 हजार 360 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया जाना है। पूर्वी छोर के दो लेन के जीर्णोद्धार लिए आवश्यक स्टील में से आधी मात्रा की खरीद की जा चुकी है। पूर्वी लेन का जीर्णोद्धार कार्य 18 माह में पूरा कर लिया जाएगा। आने वाले दिनों में पुल के चारों लेन पर गाड़ियां फर्राटे भरने लगेंगी और नागरिकों को बड़ी सुविधा होगी।

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मंत्री नंद किशोर ने कहा कि सेतु के चारों लेन के पुनरुद्धार में कुल 66 हजार 360 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया जाना है। पूर्वी छोड़ के दो लेन के जीर्णोद्धार लिए आवश्यक स्टील में से आधी मात्रा की खरीद की जा चुकी है। पूर्वी लेन का जीर्णोद्धार कार्य 18 माह में पूरा कर लिया जाएगा। आने वाले दिनों में पुल के चारों लेन पर गाड़ियां फर्राटे भरने लगेंगी और नागरिकों को बड़ी सुविधा होगी।

आवागमन के लिए खोले जा रहे पश्चिमी दो लेन के अवसर पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित तमाम संसद विधायक अधिकारी भी उपस्थित रहें।

18 महीने बाद चारों लेन में चलेंगी गाड़ियां
पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव के अनुसार, बरसात के बाद पूर्वी दो लेन के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारम्भ किया जाएगा. चारों लेन के पुनरुद्धार की अनुमानित लागत 1742.01 करोड़ रुपये है. इस पुल की डिजाइन लाइफ 100 वर्ष की है. सेतु के चारों लेन के पुनरुद्धार में कुल 66 हजार 360 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया जाना है. पूर्वी छोड़ के दो लेन के जीर्णोद्धार लिए आवश्यक स्टील में से आधी मात्रा की खरीद की जा चुकी है. पूर्वी लेन का जीर्णोद्धार कार्य 18 माह में पूरा कर लिया जाएगा. आने वाले दिनों में पुल के चारों लेन पर गाड़ियां फर्राटे भरने लगेंगी और नागरिकों को बड़ी सुविधा होगी.

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हावड़ा ब्रिज जैसा बनाया गया है पश्चिमी लेन
हावड़ा ब्रिज की तर्ज पर डिजाइन किए गए इस पुल के सभी पाए जहां पुराने कंक्रीट के बने हैं, वहीं पुल का सुपर स्ट्रक्चर लोहे का बना है. गौरतलब है कि पुल के जीर्णोद्वार कार्य के पूर्व आईआईटी रुड़की की टीम ने पुल के सभी पिलर को पूरी तरह मजबूत और सुदृढ़ पाया था. जीर्णोद्धार कार्य में ध्यान रखा गया कि पुराने पुल का मलबा गंगा में न गिरे. पुराने पुल के सुपर स्ट्रक्चर के सारे मलवे को क्रश कर वैकल्पिक उपयोग किया गया.

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