विकास दुबे एनकाउंटर पर राजनीती व्यानबाजी तेज , किसी ने किया समर्थन तो किसी ने उठाये सवाल

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कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी विकास दुबे शुक्रवार को एक पुलिस एनकाउंटर में मारा गया है. पुलिस के मुताबिक एसटीएफ मध्य प्रदेश के उज्जैन से जब उसे कानपुर लेकर आई तो गाड़ी रास्ते में ही पलट गई. मौका देखते ही विकास दुबे ने पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और विकास दुबे के बीच गोलियां चली. जहां आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल ले जाने ते बाद डॉक्टरो ने उसे मृत करार दिया. विकास दुबे एनकाउंटर पर देश में राजनीती व्यानबाजी तेज हो गई है . ख़ास कर राजनितिक गलियारों से किसी ने इस इसका पुरजोर समर्थन किया है तो देश की कई ऐसी राजनतिक दल से लेकर सोशल मिडिया तक इसपर सवाल उठाये जा रहे है .

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बड़ा सवाल उठाया है। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा है कि अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या? इसके जरिये उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से सीधा सवाल पूछा है।
यूपी के पूर्व सीएम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि कार नही पलटी सरकार पलटने से बचाई गई.
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा यूपी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल ना उठाए जाएं. जिन गुंडों ने पुलिस की हत्या की उसपर सवाल उठना चाहिए, पुलिस पर नहीं. विकास दुबे का एनकाउंटर लॉ एंड आर्डर का सवाल था.
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर और इससे जुड़ी तमाम घटनाओं की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किए जाने की मांग की है। मायावती ने कहा कि विकास दुबे को लाते हुए पुलिस की गाड़ी पटलटने, उसके भागने और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा उसके एनकाउंटर की पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जानी चाहिए।
मायावती अपने ट्वीट संदेश में कहा, “कानपुर पुलिस हत्याकाण्ड की तथा साथ ही इसके मुख्य आरोपी दुर्दान्त विकास दुबे को मध्यप्रदेश से कानपुर लाते समय आज पुलिस की गाड़ी के पलटने व उसके भागने पर यूपी पुलिस द्वारा उसे मार गिराए जाने आदि के समस्त मामलों की माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।”
मायावती ने अगले ट्वीट संदेश में कहा, “यह उच्च-स्तरीय जाँच इसलिए भी जरूरी है ताकि कानपुर नरसंहार में शहीद हुए 8 पुलिसकर्मियों के परिवार को सही इन्साफ मिल सके। साथ ही, पुलिस व आपराधिक राजनीतिक तत्वों के गठजोड़ की भी सही शिनाख्त करके उन्हें भी सख्त सजा दिलाई जा सके। ऐसे कदमों से ही यूपी अपराध-मुक्त हो सकता है।”

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मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा है कि अब विकास और राजनेताओं व पुलिस अफसरों का संपर्क उजागर नहीं हो पाएगा। विकास दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा कि जिसका शक था वह हो गया। विकास दुबे का किन-किन राजनीतिक लोगों से, पुलिस व अन्य शासकीय अधिकारियों से संपर्क था, अब उजागर नहीं हो पाएगा। पिछले तीन-चार दिनों में विकास दुबे के दो अन्य साथियों का भी एनकाउंटर हुआ है लेकिन तीनों एनकाउंटर का पैटर्न एक समान क्यों है?
सिंह ने जांच की मांग करते हुए कहा कि यह पता लगाना आवश्यक है विकास दुबे ने मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकाल मंदिर को सरेंडर के लिए क्यों चुना? मध्यप्रदेश के कौन से प्रभावशाली व्यक्ति के भरोसे वो यहां उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर से बचने आया था?

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने विपक्षियों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कल उसकी गिरफ्तारी पर सवाल कर रहे थे वही आज एनकाउंटर होने पर दुखी हैं.
नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि विपक्षी नेताओं के पास कोई काम नहीं है इसीलिए वो ट्वीट के अलावा कर ही क्या सकते हैं. मध्य प्रदेश पुलिस ने अपना काम किया, विकास दुबे को गिरफ्तार करके यूपी पुलिस को सौंपा. कल विपक्ष के नेता कह रहे थे विकास दुबे को जिंदा क्यों पकड़ लिया एनकाउंटर क्यों नहीं किया लेकिन आज एनकाउंटर के बाद वो कह रहे हैं कि मारे जाने के बाद कई राज उसके साथ चल गए.
उन्होंने आगे कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस गुरुवार रात को यूपी एसटीएफ के साथ विकास दुबे को एमपी बॉर्डर पर छोड़ के आई थी.

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विकास दुबे की एनकाउंटर में मौत के बाद सोशल मीडिया पर #fakeencounter हैशटैग ट्रेंड कर रहा है और तमाम लोग इस एनकाउंटर पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

कुछ लोग सवाल कर रहे हैं कि जब विकास दुबे ने खुद ही सरेंडर कर दिया था तो वह भागने की कोशिश क्यों कर रहा था. एनकाउंटर के दौरान पुलिस ने सीने पर गोली मारी. क्या पुलिस का मकसद उसे भागने से रोकना नहीं, जान से मारना था?

सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया, विकास दुबे को ले जा रही यूपी पुलिस के काफिले के पीछे चल रही मीडिया को एनकाउंटर से पहले रोक दिया गया, इससे कोई संदेह नहीं रह जाता कि यह पूर्व नियोजित था. पुलिस ने जानबूझकर गाड़ी पलट दी ताकि वह ये कहानी पेश की जा सके.

राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने एक दिन पुराने ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा कि हर कोई जानता था कि यही होगा. 9 जुलाई को ट्वीट में उन्होंने विकास दुबे के एनकाउंटर की आशंका जताई थी.

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विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे लगातार पूछताछ की. इस दौरान उसने कई बड़े खुलासे किए. विकास दुबे ने कहा कि वह पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद शवों को जलाना चाहता था. जलाने के लिए शवों को एक जगह इकट्ठा किया गया था और तेल का इंतजाम भी कर लिया गया था. विकास ने पुलिसकर्मियों के संपर्क में होने की बात भी कही. विकास दुबे ने कहा कि हमें सूचना थी कि पुलिस सुबह आएगी. पुलिस रात में ही छापेमारी के लिए आ गई. डर था कि पुलिस एनकाउंटर कर देगी.

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