यूपी-बिहार से आए लोग मुम्बई-पुणे में भारी भीड़ के लिए ज़िम्मेदार

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शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में मुंबई-पुणे शहर में बढ़ रही आबादी को लेकर मोदी सरकार निशाना साधा। इतना ही नहीं, शिवसेना ने एक बार फिर परप्रांतियों और यूपी-बिहार से आए लोगों को मुम्बई-पुणे में भारी भीड़ के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है।

संपादकीय में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें गडकरी ने मुम्बई-पुणे से भीड़ कम करने के लिए इनके बाहर दूसरे स्मार्ट सिटी बसाने की बात कही। इस बयान के हवाले से ‘सामना’ के संपादकीय में पूछा गया कि यह कैसे होगा?

संपादकीय में शिवसेना ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा, ‘2015 में मुम्बई-पुणे जैसे स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा हुई थी। वह स्मार्ट सिटी कहां हैं? 15% भी काम नहीं हुआ है।’ इसके अलावा शिवसेना ने यूपी और बिहार के मुख्यमंत्रियों पर भी तल्ख टिप्पणी की है।

शिवसेना ने कहा कि दोनों राज्यों (यूपी और बिहार) के मुख्यमंत्रियों ने प्रवासी मज़दूरों के वापस घर लौटने पर दावा किया था कि इन्हें वापस बुलाने के लिए उनकी परमिशन की ज़रूरत होगी जबकि मज़दूर वापस लौट रहे हैं।

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शिवसेना ने कहा कि महाराष्ट्र और मुंबई की चिंता करना छोड़ दें। पहले अपने राज्यों में रोजगार बढ़ाएं। मुंबई-पुणे में लोगों की भीड़ खुद ही कम हो जाएगी।

शिवसेना ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान मुंबई से लगभग 7-8 लाख प्रवासी अपने मूल राज्यों यूपी, बिहार, बंगाल, ओडिशा आदि के लिए चले गए थे. संकट के समय पुणे से लगभग 3.5 लाख श्रमिक वापस अपने राज्यों को चले गए थे. इसकी वहज से कुछ समय के लिए इन शहरों में जनसंख्या कम हो गई थी.

पार्टी की ओर से कहा या है कि अब लगभग 1.5 लाख श्रमिक मुंबई और पुणे लौट आए हैं क्योंकि यूपी और बिहार में प्रवासियों के लिए कोई काम धंधा नहीं है. इसका सीधा सा मतलब है कि यूपी और बिहार में कोई विकास कार्य नहीं हुआ है.

शिवसेना ने कहा कि कल तक यूपी और बिहार के मुख्यमंत्री कह रहे थे कि श्रमिकों को वापस बुलाने के लिए अनुमति लेनी होगी, और जो प्रवासी मजदूर लौट आए हैं उन्हें उनके ही राज्य में काम दिया जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और प्रवासी अब मुंबई और पुणे लौट रहे हैं.

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शिवसेना ने कहा कि जब मुंबई और पुणे जैसे स्मार्ट शहर यूपी और बिहार में बनते तो श्रमिकों को काम मिलता, और यहां आबादी कम होती. अगर केंद्र सरकार यूपी, बिहार, झारखंड और दिल्ली जैसे राज्यों पर ध्यान देती है तो मुंबई और पुणे में आबादी कम होती. यहां की सरकार विकास कार्यों का प्रबंधन करेगी. केंद्र सरकार को दूसरे राज्यों को रोजगार और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर गौर करना चाहिए.

सामना ने उपरोक्त परिस्थितियों में नितिन गडकरी से पूछा कि उन्हें किस तरह का सुझाव देना चाहिए. शिवसेना ने यह भी कहा कि बाला साहब ठाकरे ने हमेशा बाहरी लोगों के मुद्दे को उठाया था, लेकिन उन पर जाति, क्षेत्रवाद और कट्टर भावनाओं के आरोप लगाए गए थे. सामना ने केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी घोषणा पर भी सवाल उठाया और पूछा कि तमाम घोषित स्मार्ट शहरों में कितना काम हुआ है.

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