प्रेस पर पाबंदी के साथ दर्ज हुआ काला दिन,1975 में आज ही के दिन बांधे गए थे प्रेस के हाथ

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जून के महीने को भारत के राजनीतिक इतिहास में आपातकाल के लिए सदियों तक याद रखा जाएगा। आपातकाल की घोषणा के दो दिन के भीतर ही राजनीतिक विरोधियों और आंदोलनकारियों की गतिविधियों पर तो पहरा बिठा ही दिया गया, साथ ही आजाद भारत में ऐसा पहली ऐसा हुआ, जब सरकार ने प्रेस पर प्रतिबंध लगाये। आलम यह था कि समाचार पत्रों में छपने वाली खबरों को सेंसर किया जाने लगा और अखबार छापने से पहले सरकार की अनुमति लेने की बंदिश लगा दी गई।

आपातकाल के दौरान 3801 समाचार-पत्रों के डिक्लेरेशन जब्त कर लिए गए। 327 पत्रकारों को मीसा में बंद कर दिया गया और 290 अखबारों के विज्ञापन बंद कर दिए गए। हालात इस कदर बिगड़े कि टाइम और गार्जियन अखबारों के समाचार-प्रतिनिधियों को भारत से जाने के लिए कह दिया गया। रॉयटर सहित अन्य एजेंसियों के टेलेक्स और टेलीफोन काट दिए गए। इसके अलावा देश-दुनिया के इतिहास में 28 जून की तारीख पर कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं भी दर्ज हैं।

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28 जून 1975 के दिन भारत सरकार ने स्वतंत्रता के बाद प्रेस के ऊपर सबसे कठिन सेंसरशिप लगा दी. यह सेंसरशिप सरकार के खिलाफ चल रहे प्रतिरोधों को दबाने के उद्देश्य से लगाई गई.

इससे पहले 21 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के कहने पर राष्ट्रपति फखुरुद्दीन अली अहमद ने देश में आपातकाल लगा दिया था. इस दौरान नागरिकों से उनके संवैधानिक और मूल अधिकार छीन लिए गए थे.

यह आपातकाल 21 महीनों तक चला था.

असल में 12 जून 1975 के दिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था. इस फैसले में कोर्ट ने इंदिरा गाँधी को चुनाव के दौरान सरकारी तंत्र का गलत प्रयोग करने का दोषी पाया था.

इस फैसले के बाद विपक्षी नेताओं ने इंदिरा के खिलाफ देशव्यापी विरोध खड़ा किया था. इसके बदले इंदिरा गाँधी ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता उनकी सरकार को हिंसा द्वारा उखाड़ फेंकना चाहते हैं.

इस आरोप के साथ ही उन्होंने देश में आपातकाल लगा दिया था.

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इस दौरान प्रेस के ऊपर सेंसरशिप लगा दी.

ज्यादातर सम्पादक तो पहले से ही सरकार का साथ दे रहे थे, लेकिन जो इस आपातकाल का विरोध कर रहे थे, उन्हें जेल में डाल दिया गया. अखबारों में खबर छपने से पहले सरकारी अधिकारी उन्हें चेक करते थे.

साथ ही अपने अनुसार काट-छांट करने के बाद ख़बरों को छपने देते थे.

अंत में 21 मार्च 1977 को आपातकाल हटा दिया गया.

आपातकाल हटने के बाद लोकसभा के चुनाव हुए और इसमें इंदिरा गाँधी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा.

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