राज्य मंत्रिपरिषद ने बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति को लागू करने के लिए अपनी मंजूरी दी

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राज्य मंत्रिपरिषद ने शुक्रवार को बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति को लागू करने के लिए अपनी मंजूरी प्रदान कर दी। बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी है। बैठक के बाद कैबिनेट के प्रधान सचिव ने पत्रकारों को बताया कि बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति को 1 सितम्बर 2016 के प्रभाव से लागू किया गया है‚ जो मार्च 2025 तक रहेगी। इस नीति के तहत 25 लाख से 500 करोड रुपये तक के निवेश पर विशेष छूट दी गयी है‚ जिससे निवेशकों को लाभ होगा। बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति के तहत निवेशकों को कम से कम 500 लोगों को रोजगार देना होगा तथा न्यूनतम 25 लाख रुपये से अधिक का निवेश करना भी जरूरी होगा। नई औद्योगिक नीति के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्र–ड्राई वेयर हाउस‚फामिंर्ग प्रोसेसिंग‚ ट्रांसपोटæशन‚ बॉटलिंग इकाई‚ सब्जी एंड हर्टिकल्चर‚ को शामिल किया गया। इसके साथ ही परिधान निर्माण‚ खडी प्रसकरण‚ इट निर्माण‚ फर्नीचर‚ हस्तकला‚ चमडा उद्योग को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही ई वाहन प्रोत्साहन क्षेत्र को भी जोडा जायेगा। नई उद्योग नीति से इथनॉल उत्पादन‚ दाल उत्पादन‚ गेंहू आधारित‚ मसाला आधारित और जडी बूटी–बूटी आधारित उद्योग का भी फायदा मिलेगा। इसके लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में सचिवों की एक समिति बनायी जायेगी।

नीतीश कैबिनेट ने चीन की सीमा पर शहीद हुए सेना के 5 बिहारी जवानों के परिजनों को नौकरी देने पर मुहर लगा दी है। इनमें शहीद सिपाही चंदन कुमार‚ शहीद अमन कुमार‚ शहीद जय किशोर सिंह‚ शहीद हवलदार सुनील कुमार और शहीद कुंदन कुमार के परिजन शामिल है। कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन के कारण रोड टैक्स जमा नहीं करने वाले अगर 31 जुलाई तक रोड टैक्स जमा कर दें‚ तो उन्हें टैक्स में 40 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी। राज्य सरकार ने हर साल 25 सितम्बर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती राजकीय समारोह के रूप में मनाने का फैसला किया है।

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बड़ी राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम लगेगा
नई नीति में कई तरह के उद्योगों को सामान्य सूची से बाहर कर प्राथमिक सूची में रखा है। राज्य के हर जिले में कम से कम दो औद्योगिक क्लस्टर विकसित किया जाएगा। विकसित करने की जिम्मेदारी राज्य के लोक उपक्रम(पीएसयू) को दी जाएगी। बड़ी राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम लगाने की भी बात है।
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  • प्रवासियों के लिए प्रावधान: जिला स्तर पर प्रवासी श्रमिकों की स्किल मैपिंग होगी। जिला स्तरीय परामर्श समिति मैपिंग की जानकारी राज्यस्तरीय समिति को देगी। यह समिति कामगारों को रोजगार के बारे में बताएगी। जो स्वरोजगार करना चाहेंगे, उन्हें रुपए दिए जाएंगे।
  • उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र: ई.रिक्शा, इथनॉल उत्पादन, दाल-गेहूं आधारित उद्योग,  मसाला व जड़ी-बूटी प्रसंस्करण को रखा गया है।
  • प्राथमिकता सूची में ये उद्योग: वेयर हाउसिंग, हार्टिकल्चर उत्पाद, जूस, केचप, स्क्वैश की बाटलिंग, टिसू कल्चर लैब, जेनरेटर, ट्रांसफार्मर, विद्युत वितरण, वायरिंग व इसके उपकरण, फ्लाई ऐश ब्रिक उत्पादन, धान-भूसा आधारित उत्पाद, मोटरगाड़ी, ट्रेलर, मोटरगाड़ी बॉडी निर्माण, पावर वाहन निर्माण, खेलकूद सामग्री, दूरसंचार व रक्षा उपकरण, आभूषण-धातु व फैब्रिकेशन से जुड़े उद्योग शामिल।
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लकड़ी आधारित उद्योग अब प्राथमिक सूची में
अधिक से अधिक लोगों को रोजगार और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए लकड़ी आधारित उद्योग को निगेटिव से प्राथमिक सूची में डाल दिया है।

हर जिले में विकसित किए जाएंगे दो क्लस्टर
राज्य के हर जिले में दो क्लस्टर विकसित करने की योजना है। इसके लिए राज्य के पीएसयू को जिम्मेदारी दी गई है। पीएसयू क्लस्टर आधारित मैन्यूफैक्चरिंग के लिए जिलों को गोद लेगी।

हर जिले में बनेंगे दो क्लस्टर
इस प्रोत्साहन पैकेज के तहत कोविड-19 के कारण उत्पन्न रोजगार की समस्या के समाधान के लिए रोजगार सृजन के लिए कई प्रावधान किए गए हैं. जिला परामर्श केंद्र द्वारा स्किल मैपिंग कर राज्य में नियोजन के अवसरों का सुझाव दिया जाएगा. जिला औद्योगिक नवप्रवर्तन योजना अंतर्गत प्रत्येक जिले में पांच कलस्टरों का निर्माण किया जाएगा. राज्य के लोक उपक्रमों द्वारा प्रत्येक जिले में 2 क्लस्टरों का निर्माण किया जाएगा.

वोकल फॉर लोकल’ पर जोर
राज्य में कुछ एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने और उनके लिए बाजार उपलब्ध कराने हेतु अधिमान्यता नीति पर अनुकूल प्रावधान किए गए हैं. राज्य के सभी विभाग 1 महीने के अंदर ऐसे उत्पादों को चिन्हित करेंगे जिनका क्रय राज्य अवस्थित इकाइयों से ही किया जाएगा. विभाग के द्वारा ठेका देने पर ठेकेदार द्वारा भी चिन्हित उत्पादों का क्रय राज्य अवस्थित इकाईयों से ही किया जाएगा.

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उद्योग मंत्री ने जाहिर की खुशी
उद्योग नीति में बदलाव के बाद बिहार के उद्योग मंत्री श्याम रजक ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस कदम सेेे बिहार में निवेश का रास्ता खुलेगा और बिहार में रोजगार भी बढ़ेगा जिसका फायदा बिहारियों को मिलेगा. दरअसल कोरोना संकट के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे बिहार में निवेश बढ़ाने के लिए औद्योगिक नीति में कई बड़े बदलाव किए हैं. वजह साफ हैै कि बिहार में बाहर के निवेशक आएं और निवेश करें ताकि बिहार की आर्थिक स्थिति सुधरे और लोगों को रोजगार मिल सके.

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