मिथिला डेयरी ने “ग्रीन डेयरी क्लीन डेयरी” के संकल्प के साथ मनाया पर्यावरण दिवस

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’’सुधा’’ मिथिलांचल का गौरव मिथिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि0, समस्तीपुर डेयरी द्वारा वर्ष-2015 से बिहार राज्य उत्पादकता परिषद, पटना के सहयोग से मिथिला दुग्ध संघ परिसर में विष्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक कार्यषाला का आयोजन किया गया था। उक्त कार्यषाला के बाद मिथिला डेयरी ने “ग्रीन डेयरी क्लीन डेयरी” के संकल्प के साथ मनाया पर्यावरण दिवस .
प्रत्येक माह के 05वीं तिथि को डेयरी परिसर, बीएमसी परिसर एवं समिति परिसर में वृक्षारोपण का कार्य नियमित रूप से किया जाने लगा है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने हेतु समिति स्तर पर किसानों के बीच जागरुकता कार्यक्रम चलाया गया तथा किसानों के बीच लगभग 01 लाख पौधा वितरण किया गया जिसमें वर्तमान समय में 62 (बासठ) हजार पौधा जिवित अवस्था में है। (ग्रीन इंडिया मुवमेंट) के तहत समस्तीपुर डेयरी को “Green Dairy Clean Dairy” के नारा के साथ डेयरी परिसर में पौधा लगाकर पर्यावरण को बचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। विष्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दुनिया के बहुतायत देश अधिकारिक समारोह आयोजित करते हैं लेकिन इस साल कोरोना वाईरस ;कोबिड-19 महामारी के प्रकोप के कारण अधिकतर देशो में लॉक डाउन के कारण इस समारोह को वृहद रुप से आयोजित करना उचित नही है। आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संघ के सभाकक्ष में संघ के अध्यक्ष, निदेशक मंडल के सदस्यगण एवं प्रबन्ध निदेशक धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने सामाजिक दूरी के नियम का पालन करते हुये इस समारोह में प्रबन्ध निदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण दिवस का मकसद पृथ्वी और मानव विकास पर जीवन का समर्थन करने वाले आवष्यक बुनियादी ढांचे को प्रदान करने पर ध्यान देने की आवष्यकता है। प्रत्येक मानव का यह कर्तव्य है कि प्रकृति को बचाये रखने के लिये इन पांच बातों पर ध्यान दें।
1. व्यक्तिगत सतर पर हमें पहले दूसरों को सुधरने का इंतजार करने की बजाय स्वयं से शुरूआत करनी होगी।
2. वृक्षारोपण करें। हरेक आदमी अपने आस-पास या सरकारी खाली जमीन पर वृक्षारोपण करें।
3. प्रदूषण कम फैलायें। बहुत साधारण बातों का ध्यान रखना ही बड़े बदलाव लेकर आता है। जैसे गीले व सूखे कचरे के लिये अलग-अलग पात्र रखना आदि।
4. जल संरक्षण की विभिन्न विधियां अपनायें। जल का व्यर्थ बहाना गलत है। सम्पत्ति जरुर आपकी हो सकती है पर संसाधन नहीं।
5. एक देश जो अपनी मिट्टी को नष्ट कर देता है वह खुद को नष्ट कर लेता है। जंगल हमारी भूमि के फेफड़े हैं, वे हमारी हवा को शुद्ध करतें हैं और लोगों को नयी ताकत देते हैं।

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कार्यक्रम के अंत में संघ के अध्यक्ष उमेश राय एवं प्रबन्ध निदेशक ने डेयरी परिसर में एक-एक पौधा लगाकर वृक्षारोपण का संदेश संघ से जुड़े सभी व्यक्तियों को दिया। प्रबन्ध निदेषक के द्वारा डेयरी के पास से षहर को जान वाले रास्ते के बीच ;कमअपकमतद्ध में भी कनइल, नीम एवं बोगनबिलिया का पौधा लगाया गया जो शहर की हवा को स्वच्छ करने में एक छोटी सी पहल है। प्रबन्ध निदेषक ने यह संदेश दिया कि गॉंव के साथ-साथ शहरों में जहॉं दिन प्रतिदिन आबादी घनी होती जा रही है, बवदबतमंजम जंगल के रुप में बडे़-बड़े आलिशान Multistoried building बिना facility एवं पेड़-पौधों के बनते जा रहे है। अतः शहरों में वृक्षारोपण एवं जल संरक्षण को बढावा देना आज के दिन में आवष्यक है। इस कार्यक्रम के माध्यम से मैं ये कहना चाहता हूं कि अगर आज हम सब मिलकर शहरों को हरा-भरा बनाने की दिशा में काम नहीं किये तो भविष्य में शहरो में बसी आबादी को फेफड़े की बीमारी एवं अन्य प्रकार की बिमारियों से जुझना पड़ेगा। अतः आज का जगना भविष्य को सुधारने की दिषा मे एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

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