AIIMS पटना में प्लाजमा थेरेपी से किया जाएगा कोरोना मरीजों का इलाज

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पटना: बिहार में कोरोना वायरस लगतार अपने पांव पसार रहा है. राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. अब तक बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या 225 से अधिक हो चुकी है. खासकर पिछले तीन दिनों में कोरोना मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि आई है.

इसलिए बिहार में बढ़ते मामलों को रोकने के लिए अब दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर बिहार सरकार भी प्लाज्मा थैरेपी अपनाएगी. इसकी जानकारी खुद स्वास्थ्य विभाग के सचिव संजय कुमार ने दी है. आपको बता दें कि दिल्ली और मुंबई में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीजों का सफल इलाज किया गया है और इसके परिणाम काफी उत्साहवर्धक हैं.

खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कहा है कि हमने एलएनजेपी हॉस्पिटल के 4 मरीज़ों पर प्लाज्मा का ट्रायल करके देखा जिसके नतीजे काबिले तारीफ आए हैं.उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि मंगल को 2 मरीज़ों को प्लाज्मा थेरेपी दी गई थी. उन्हें शनिवार तक ICU से छुट्टी मिल जाएगी. उन्होंने बताया कि बाकी बचे 2 मरीज़ों को कल प्लाज्मा दिया गया था, 24घंटों में ही उन्होंने काफी अच्छे रिजल्ट दिखाए हैं.

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ILBS के डायरेक्टर डॉ शिव कुमार सरीन ने भी प्लाज्मा थेरेपी की कामयाबी पर कहा था करते हुए कहा कि हम 4 मरीजों में पॉज़िटिव रिजल्ट से खुश हैं. एलएनजेपी हॉस्पिटल में 2-3 दूसरे मरीजों के लिए भी ब्लड और प्लाज्मा तैयार है, हम आज उन्हें प्लाज्मा थेरेपी दे सकते हैं.

क्या है प्लाजमा थेरेपी
प्लाज्मा डोनेशन ब्लड डोनेशन जैसा नहीं है. इसके डोनेशन से कमजोरी नहीं आती है. प्लाज्मा थेरेपी यानी खून से प्लाज्मा निकालकर दूसरे बीमार व्यक्ति में डाल देना. ये मेडिकल साइंस की बेहद बेसिक तकनीक है. ठीक हो चुके कोरोना मरीज के खून से प्लाज्मा निकालकर दूसरे बीमार व्यक्ति में डाल देते हैं. इससे मरीज के खून में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी बन जाते हैं. ये एंटीबॉडी वायरस से लड़कर उन्हें मार देते हैं या कमजोर कर देते हैं. ये एंटीबॉडी ज्यादातर खून के प्लाज्मा में रहते हैं.” इस तकनीक में जरूरी ये है कि ठीक हुए व्यक्ति के खून से प्लाज्मा निकालकर स्टोर कर लिया जाए. फिर इसे दूसरे मरीज को दिया जाए. ये प्लाज्मा किसी मरीज के ठीक होने के 2 हफ्ते बाद ही लिया जा सकता है..

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क्या है प्रक्रिया
मरीज में एक बार में 200 एमएल प्लाज्मा डाला जाता है, जबकि रिकवर हुए व्यक्ति से हम 400 एमएल प्लाज्मा निकाल सकते हैं. इसका अर्थ है कि एक रिकवर किया हुआ कोरोना मरीज की मदद से दो और लोगों का इलाज किया जा सकता है.

क्या है फायदा
प्लाज्मा थेरेपी का फायदा ये है कि मरीज बिना किसी वैक्सीन के ही बीमारी से लड़ने की क्षमता विकसित कर लेता है. प्लाज्मा ट्रीटमेंट मेडिकल साइंस की बेहद बेसिक टेक्नीक है. करीब 100 सालों से इसका इस्तेमाल पूरी दुनिया कर रही है. कई मामलों में इससे फायदा होता देखा गया है. कोरोना के मरीजों में भी ये संजीवनी की तरह असर दिखा रहा है.

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