इंदिरा गांधी की जयंती पर शक्ति स्थल पर श्रद्धांजलि देने पहुंची सोनिया, मनमोहन और प्रणव,

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देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 102वीं जयंती पर समग्र देश ‘लौह महिला’ को याद कर रहा है. इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी. वहीं कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इंदिरा गांधी की समाधि शक्ति स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया. गौरतलब है कि राजघाट के पास ही शक्ति स्थल बनाया गया है.

पीएम मोदी ने की ट्वीट

इंदिरा गांधी की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी ट्वीट में लिखा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी को उनकी जयंती पर मैं श्रद्धांजलि देता हूं. इसके पहले कांग्रेस के नेताओं ने शक्ति स्थल पर मंगलवार सुबह पहुंच कर इंदिरा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी संग पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी थे. जवाहरलाल नेहरू और कमला नेहरू के यहां 19 नवंबर,1917 को जन्मी इंदिरा को उनके दादा मोतीलाल नेहरू ने यह नाम दिया था. फिर पिता ने उनके सलोने रूप के कारण उसमें प्रियदर्शिनी भी जोड़ दिया था. इंदिरा गांधी ने लगातार तीन बार और कुल चार बार देश की बागडोर संभाली और वह देश की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं. उनके ही शासन काल में पूर्वी पाकिस्तान को तोड़कर बांग्लादेश बनाया गया था. इसके बाद ही उन्हें लौह महिला का खिताब दिया गया.

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14 सम्मेलन करेगी महिला कांग्रेस

महिला कांग्रेस देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जन्मदिन पर दिल्ली के सभी 14 जिलों में इंदिरा प्रियदर्शनी सम्मेलन का आयोजन करेगी. पहला सम्मेलन 19 नवंबर को पटपड़गंज जिले में आयोजित किया जाएगा. इसका उद्घाटन अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और पूर्व सांसद सुष्मिता देव करेंगी. यह जानकारी दिल्ली प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शर्मिष्ठा मुखर्जी ने दी. उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिला सम्मेलनों में पेशेवर डॉक्टर, वकील, अध्यापक और अन्य सम्मान प्राप्त महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा.

स्वतंत्र भारत के इतिहास में चंद लोग ऐसे हुए हैं, जिन्होंने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर अपनी अमिट छाप छोड़ी और उनके व्यक्तित्व की मिसालें दी गईं। इंदिरा गांधी भी एक ऐसा ही नाम है, जिन्हें उनके निर्भीक फैसलों और दृढ़निश्चय के चलते ‘लौह महिला’ कहा जाता है। उन्हें उनके दादा मोतीलाल नेहरू ने इंदिरा नाम दिया और पिता ने उनके सलोने रूप के कारण उसमें प्रियदर्शिनी भी जोड़ दिया।

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इंदिरा गांधी कुछ फैसलों को लेकर विवादों में भी रहीं। जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई भी उनका एक ऐसा ही कदम था, जिसकी कीमत उन्हें अपने सिख अंगरक्षकों के हाथों जान गंवाकर चुकानी पड़ी।

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