राम मंदिर निर्माण का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दे दिया है, अब राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी आपके कंधों पर है: पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया हैं। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि कठिन से कठिन फैसले का हल संविधान के दायरे में ही आता है। हर परिस्थिति में हमें धैर्य बनाए रखना चाहिए। इससे पहले पीएम मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्वीट कर कहा, ‘‘राम भक्ति हो या रहीम भक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारत भक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’’

सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को एकमत से अयोध्या में विवादित स्थल राम जन्मभूमि पर मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करते हुये केन्द्र सरकार को निर्देश दिया कि ‘सुन्नी वक्फ बोर्ड’ को मस्जिद के निर्माण के लिये पांच एकड़ भूमि आवंटित की जाये। हिंदी और अंग्रेजी में किये गए कई ट्वीट में मोदी ने दावा किया कि ये फैसला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कानून के समक्ष सभी लोग समान हैं। उन्होंने कहा, ‘‘राम भक्ति हो या रहीम भक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारत भक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।’’

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मोदी ने कहा, ‘‘देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि ‘न्याय के मंदिर’ (उच्चतम न्यायालय) ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया। उन्होंने कहा, “आज के फैसले को लेकर 130 करोड़ भारतीयों का शांति और संयम का परिचय देना भारत के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अंतर्निहित भावना का परिचय देता है। एकजुटता की यह भावना हमारे राष्ट्र के विकास पथ को शक्ति प्रदान कर सकती है। हर भारतीय को सशक्त बनाया जा सकता है।”

मोदी ने कहा कि यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में आम लोगों के विश्वास को और मजबूत करेगा। हर किसी को अपना नजरिया रखने के लिये पर्याप्त समय दिया गया। उन्होंने कहा, ‘‘सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई वजहों से महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि किसी विवाद को सुलझाने में कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना अहम है। हर पक्ष को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया। यह (फैसला) हमारी न्यायपालिका की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और दूरदर्शिता की पुन:पुष्टि करता है। शांति और सद्भाव बना रहे।’’

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