हरियाणा :शाम 6 बजे तक हरियाणा में 65% मतदान, फतेहाबाद में सबसे ज्यादा 71.13% हुआ वोट

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हरियाणा के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता मनोहर लाल खट्टर, 2 बार मुख्यमंत्री रह चुके कांग्रेस नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, जननायक जनता पार्टी (JJP) के नेता और पूर्व लोकसभा सांसद दुष्यंत चौटाला समेत दमाम दिग्गज इस बार हरियाणा के चुनावी दंगल में एक-दूसरे को पटखनी देने की कोशिश में हैं। इनके अलावा बहुजन समाज पार्टी और इंडियन नेशनल लोकदल भी पूरे दमखम के साथ मैदान में डटे हुए हैं। आज हरियाणा की जनता अपने सूबे की 90 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान कर रही है। हरियाणा में विधानसभा चुनाव में शाम 6 बजे तक 65 प्रतिशत मतदान हुआ।

करनाल में अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने कहा, ‘पूरे राज्य में मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल पहले ही हार चुके हैं और जंग के मैदान से जा चुके हैं। उनके बड़े-बड़े दावों का कोई मतलब नहीं है।’

हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों के लिए आज यानी सोमवार को मतदान खत्म हो गया . इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच है. जाट प्रभुत्व वाली कुछ सीटों पर जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) भी चुनौती दे रही है. इस चुनाव में खासकर तीन ‘लाल’ घरानों के सामने अपना वजूद बचाए रखने की चुनौती है जिन्हें हरियाणा की सियासत का कभी बेताज बादशाह कहा जाता था. ये घराने हैं- पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल और भजनलाल परिवार.

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हरियाणा की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले तीनों लाल तो अब दुनिया में नहीं रहे. लेकिन उनके वारिस तीनों घरानों की राजनीति को आगे बढ़ा रहे है. हालांकि, उनके सामने अपने वजूद को बचाए रखने की चुनौती है.

हरियाणा की सियासत में कभी तीनों लाल की तूती बोलती थी

हरियाणा की सियासत करीब चार दशक तक बंसीलाल, देवीलाल और भजनलाल के इर्द-गिर्द ही सिमटी रही है. हरियाणा के ये तीनों ‘लाल’ प्रदेश की सत्ता के सिंहासन पर काबिज होने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति के भी बड़े चेहरे रहे हैं. लेकिन, हरियाणा के मौजूदा राजनीतिक माहौल में बंसीलाल, देवीलाल और भजनलाल के ‘लालों’ को अपना सियासी वजूद बचाए रखने के लिए लाले पड़ रहे हैं.

पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल, पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल और भजनलाल के नाम से हरियाणा की पहचान होती रही है. हालांकि हरियाणा की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले तीनों लाल तो अब दुनिया में नहीं रहे, लेकिन इनके वारिस अपने-अपने घरानों की राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं. इनमें इन लालों के बेटे ही नहीं बल्कि बेटियां भी शामिल हैं.

देवीलाल की विरासत को लेकर खींचतान

हरियाणा की सियासत में कभी चौधरी देवीलाल की जबरदस्त तूती बोलती थी. देवीलाल की पार्टी ने 1987 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 90 में से 85 सीटें जीतकर तहलका मचा दिया था. देवीलाल दो बार हरियाणा के सीएम रहे. हरियाणा के साथ-साथ पंजाब में विधायक रहे देवीलाल दो अलग-अलग सरकारों में देश के डिप्टी प्रधानमंत्री भी बने. उनकी राजनीतिक विरासत बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने संभाली और चार बार हरियाणा के सीएम रहे.

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तीन दशक के बाद देवीलाल की विरासत संभाल रहा चौटाला परिवार दो धड़ों में बंट चुका है. ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला ने इनेलो से अलग होकर जननायक जनता पार्टी बना ली है. जबकि इनेलो की कमान ओम प्रकाश चौटाला और उनके छोटे बेटे अभय चौटाला के हाथों में है. अजय चौटाला जेल में हैं तो उनकी विरासत उनके दोनों बेटे दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला संभाल रहे हैं. इनेलो और जेजेपी दोनों पार्टियां अपने वजूद को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं.

बंसीलाल की विरासत बहू के हाथ में

चौधरी बंसीलाल को हरियाणा का निर्माता कहा जाता है. वह कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं. वह तीन बार हरियाणा के सीएम रहे. उनकी राजनीतिक विरासत छोटे बेटे सुरेंद्र चौधरी ने संभाली और वह विधायक व सांसद चुने गए, लेकिन 2005 में हेलीकॉप्टर हादसे में उनकी मौत हो गई. इसके बाद अपने पति और ससुर की विरासत को संभालने के लिए किरण चौधरी ने राजनीति में कदम रखा. वह तीन बार विधायक चुनी गई.

बंसीलाल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए किरण चौधरी ने अपनी बेटी श्रुति चौधरी को 2009 में उतारा और वह भिवानी से चुनाकर संसद पहुंची. इसके बाद 2014 और 2019 में लड़ी, लेकिन वह जीत नहीं सकीं. ऐसे में विधानसभा चुनाव बंसीलाल परिवार के लिए चुनौती कम नहीं है. बंसीलाल परिवार से किरण चौधरी और रणबीर महेंद्रा के अलावा उनके दामाद सोमबीर सिंह कांग्रेस से चुनावी मैदान में हैं.

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भजनलाल की राजनीतिक विरासत पर संकट

पंचायत में पंच से राजनीति की शुरुआत करने वाले चौधरी भजनलाल तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे. किसानों के कद्दावर नेता माने जाते थे. हरियाणा की सियासत में पहले गैर जाट नेता थे, जिनकी तूती बोलती थी. वह अपने राजनीतिक जीवन में कभी चुनाव नहीं हारे. वह 9 बार विधायक चुने गए. हालांकि 2007 में उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़कर हरियाणा जनहित कांग्रेस नाम से अलग पार्टी बनाई.

भजनलाल की राजनीतिक विरासत चंद्रमोहन बिश्नोई और कुलदीप बिश्नोई संभाल रहे हैं. चंद्रमोहन हरियाणा के डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं और 2014 में वो चुनाव हार गए हैं. हरियाणा जनहित कांग्रेस की कमान कुलदीप बिश्नोई के हाथ में थी, जिन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में विलय कर दिया है. कुलदीप बिश्नोई अपने पिता की सीट आदमपुर से मौजूदा विधायक थे और उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई हांसी से विधायक थीं.

2019 के लोकसभा चुनाव में उनके बेटे भव्य बिश्नोई हिसार से चुनाव में उतरे थे, लेकिन जीत नहीं सके. इस बार के विधानसभा चुनाव में कुलदीप बिश्नोई के खिलाफ बीजेपी ने सेलिब्रेटी सोनाली फोगाट को उतारकर उनकी मुश्किलें बढ़ा दी है.

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