4750 करोड़ रुपये का डीसी बिल लंबित

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PATNA - ST . SC KO LAKAR BHRAT BAND ME BIHAR VIDAN SAVA MEPRADSHAN KARTA R . J . D , VIDAK

बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों बिहार विधान सभा और बिहार विधान परिषद में सोमवार को भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की वित्त एवं विनियोगे संबंधी रिपोर्ट रखी गयी। रिपोर्ट में पिछले तीन वर्षों में 4750 करोड़ रुपये के लंबित डीसी विपत्र पर चिंता जतायी गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आकस्मिक विपत्र की निकासी के छह महीने के अंदर डीसी विपत्र महालेखाकार को प्रस्तुत करना अपेक्षित होता है। विस्तृत आकस्मिक विपत्रों को प्रस्तुत करने में विलंब अथवा लंबे समय तक प्रस्तुत नहीं किया जाना व्यय की अपारदर्शिता को प्रस्तुत करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 में 2299.19 करोड़, वित्तीय वर्ष 2014-15 में 1081.37 करोड़ और वित्तीय वर्ष 2016-17 में 1396.96 करोड़ रुपये के डीसी विपत्र लंबित है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 1808 करोड़ रुपये के 1383 संक्षिप्त आकस्मिक विपत्र आहरित किये गये थे। इनमें से 533 करोड़ रुपये के आकस्मिक संक्षिप्त विपत्र मार्च 2017 के ही थे। इनमें से 43.52 करोड़ रुपये की निकासी वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च को की गयी थी। सीएजी ने कहा कि मार्च माह में संक्षिप्त आकस्मिक विपत्रों के माध्यम से अत्यधिक व्यय का पता चलता है कि निकासी मुख्यत: बजट प्रावधानों को निशेष करने के लिए की गई थी और यह अपर्याप्त बजटीय नियंतण्रको प्रकट करता है। महालेखाकार ने कहा है कि 177 व्यक्तिगत जमा (पीडी) खाते में 4373.65 करोड़ की राशि जमा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 74 कोषागारों द्वारा पीडी खातों के संबंध में जानकारी दी गयी थी। इनमें से 56 कोषागारों में ही पीडी लेखा का संधारण किया जाता है जबकि शेष 18 कोषागारों ने सूचित किया कि उनके यहां कोई व्यक्तिगत खाता नहीं है। किसी भी विभागीय अधिकारी द्वारा महालेखाकार द्वारा संधारित किये गये लेखों के शेषों का सत्यापन अथवा मिलान नहीं किया गया। इसके अलावे वर्ष के दौरान किसी भी व्यक्तिगत खाते से कोषागार/प्रशासक ने संचित निधि में वापसी से संबंधित सूचना भी नहीं उपलब्ध नहीं कराई।

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