40 वर्षो बाद बिहार में आयोजित होगा एफएमआरएआई का 25वां सम्मेलन

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सूबे के एतिहासिक ज्ञान भवन में चार दिवसीय (14 से 17 फरवरी ) मेडिकल एण्ड सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स (सेल्स प्रोमोशन इम्प्लाइज) का अखिल भारतीय फेडरेशन ऑफ मेडिकल एण्ड सेल्स रिप्रजेन्टेटिव्स एसोसियशन ऑफ इंडिया (एफएमआरएआई) का 25 वां सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह सम्मेलन सूबे में 40 वर्षो बाद आयोजित होगा। यह मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स के लिए एक एतिहासिक क्षण होगा। यह जानकारी राजधानी के एक होटल में बुधवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महामंत्री शांतनु चटर्जी,अखिल भारतीय फेडरेशन के अध्यक्ष आर.विश्वनाथन और संयुक्त महामंत्री दीपक भट्टाचार्या ने दी। उन्होंने कहा कि 14 से 17 फरवरी तक पटना के विजयकांत ठाकुर नगर (ज्ञान भवन) में 25 वॉं अखिल भारतीय सम्मेलन में देश के 22 राज्यों के 1000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन का उद्घाटन सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉ के. हेमलता करेंगी। सम्मेलन को सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कॉ ज्ञान शंकर मजूमदार,राष्ट्रीय सचिव मंडल सदस्य कॉ अमिताभ गुहा सम्बोधित करेगें । सम्मेलन के पहले दिन बिहार राज्य के सीटू के महासचिव कॉ गणोश शंकर सिंह, झारखंड राज्य के सीटू महासचिव कॉ प्रकाश विप्पलव एवं बिहार राज्य के अन्य ट्रेड यूनियनों के राज्य नेतृत्व संबोधित करेंगे । सम्मेलन में केन्द्र सरकार के वर्तमान जन विरोधी आर्थिक नीति के वजह से व्याप्त व्यापक असामानता और फलस्वरूप बढ़ते सामाजिक तनाव में मजदूर वर्ग की भूमिका समेत कई विभिन्न गंभीर मामलों पर र्चचा की जाएगी। सरकार के मालिक पक्षीय नीति के वजह से दवा के दाम में बेतहाशा वृद्वि। जिससे जीवन रक्षक दवाओं के मूल्य का भी नियंतण्रसरकार के हाथ में नहीं है। परिणामस्वरूप मालिकों द्वारा मनमाने तरीके से दवा के मूल्यों में वृद्वि हो रही है । सरकार की दवा नीति आम आदमी के हित में नहीं है। जिससे दिन-प्रतिदिन इलाज आम आदमी के पहुंच से बाहर हो रहा है। उन्होंने कहा कि श्रम कानून में मालिक पक्षीय बदलाव, जिससे आम मजदूरों की संवैधानिक हित एवं केन्द्र तथा राज्य सरकार द्वारा जारी कानून जैसे न्यूनतम मजदूरी जैसे कानून का भी सरेआम उल्लंघन हो रहा है ।संवाददाता सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स के अधिकार एवं कानूनी मान्यता के लिए यह संघर्ष बिहार राज्य से आरम्भ हुआ था और बिहार-झारखंड स्टेट सेल्स रिप्रजेंटेटिव(बीएसएसआर) यूनियन की स्थापना वर्ष 1953 में बिहार राज्य में की गयी थी। मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स का यह संघर्ष पूरे देश के सभी राज्यों में मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स के यूनियन के गठन ने मिल का पत्थर साबित हुआ । इस प्रकार वर्ष 1963 में सभी राज्यों के मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स के यूनियनों ने अपने अखिल भारतीय संघ फेडेरेशन ऑफ मेडिकल एण्ड सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स एसोसियशन ऑफ इंडिया की स्थापना की गयी। 1963 से लगातार एफएमआरएआई मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स के कानूनी अधिकार के संघर्ष में लगातार संघर्षरत है । 1976 में एफएमआरएआई के संघर्ष के फलस्वरूप सेल्स प्रोमोशन इम्प्लॉइज एक्ट-1976 को संसद में मंजूरी मिली और मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स को कानूनी मान्यता का दर्जा हासिल हुआ । पुन: इस एक्ट के वेतन संबंधी सीमा में सुधार 1986 ई0 में संसद के द्वारा किया गया। जिससे कि व्यापक मेडिकल एवं सेल्स रिप्रेजेन्टेटिव्स सही अर्थो में कानूनी दायरे के अंदर आ सकती ।वर्तमान में नन-उदारवादी आर्थिक नीति और इस नीति के तहत श्रमिकों के अधिकार पर हमलों के खिलाफ संयुक्त मजदूर आंदोलन में एफएमआरएआई लगातार संघर्ष कर रहा है। साथ ही अपने क्षेत्र में हो रहे हमलों के खिलाफ भी स्वतंत्र कार्रवाईयों को सफलतापूर्वक पूरा किया है । देश के स्वास्य एवं दवा के क्षेत्र में जनहित कार्य नीतियों के लिए अपने श्रमिकों के वैधानिक कार्य नियमावली और विदेशी कम्पनियों द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से भारतीय दवा बाजार के नियंतण्रके खिलाफ संघर्ष में आग्रणी भूमिका को निभाया है ।

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