2019 में सुन्नी वक्फ बोर्ड चुनाव लड़ेगा या कांग्रेस? : प्रधानमंत्री

0
197

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल की राममंदिर सुनवाई टालने की दलील पर कहा कि वे वक्फ बोर्ड की वकालत कर रहे हैं, उससे कोई आपत्ति नहीं। लेकिन 2019 में सुन्नी वक्फ बोर्ड चुनाव लड़ेगा या कांग्रेस? उन्होंने पूछा कि अयोध्या का केस अगले लोकसभा चुनाव से कैसे जुड़ा?

बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय में बहस के दौरान सिब्बल ने कहा कि राममंदिर भाजपा का चुनावी एजेंडा है। इसलिए इसके निर्माण पर फैसला 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद करना चाहिए। सिब्बल को बताना चाहिए कि अगला चुनाव कांग्रेस लड़ेगी या वक्फ बोर्ड इसका स्पष्टीकरण करना चाहिए। अदालत में जब तीन तलाक का मुद्दा आया, तो अखबारों में खबरें आईं कि मोदी यूपी चुनाव के चलते इस मामले में चुप्पी साध लेंगे। पूर्व पीएम राजीव गांधी के जमाने से यह मुद्दा लटकता आ रहा था। लेकिन केंद्र ने करोड़ों बहन-बेटियों की जिंदगी बचाने के लिए इस प्रथा को रद करने का प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखा। केंद्र जल्द ही इस संबंध में एक कानून भी बनाएगा।

यह भी पढ़े  'पद्मावत': राजपूत महिलाओं ने स्थगित किया सामूहिक 'जौहर', अब राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सरदार पटेल के बाद संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का अपमान करने का भी आरोप लगाया। मोदी ने कहा कि संविधान सभा का सदस्य बनने के लिए डॉ. अंबेडकर को भारी मशक्कत करनी पड़ी। जनसंघ के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मदद से वे संविधान सभा के सदस्य बन सके। कांग्रेस ने उन्हें भारत रत्न नहीं दिया।अहमदाबाद में चुनावी रैली के दौरान मोदी।अब सुन्नी वक्फ बोर्ड के बयान से यह साफ हो गया है कि कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत में कांग्रेस नेता के रूप में ही राम मंदिर मामले की सुनवाई टालने की मांग की थी।

भगवान राम जब चाहेंगे, मंदिर बन जाएगा :

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल का कहना है कि अयोध्या में मंदिर तभी बन सकेगा जब भगवान राम चाहेंगे। मामला अदालत में है, इसलिए मंदिर मोदी जी के कहने से नहीं बनेगा। इसका फैसला तो कोर्ट ही करेगा।

सिब्बल का बोर्ड का वकील होने से इन्कार, पर कोर्ट के आदेश में दर्ज है उनका नाम

सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई टालने की मांग करके कांग्रेस नेता और सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल बुरी तरह से फंस गए हैं। बुधवार को बोर्ड के चेयरमैन जफर फारूकी ने लखनऊ में कहा, ‘इस मसले का हल जितनी जल्दी संभव हो, अब हो जाना चाहिए। ऐसे में 2019 के आम चुनाव तक सुनवाई टाले जाने की मांग समझ से परे है। सुप्रीम कोर्ट में ऐसा करने के लिए कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल से हमने नहीं कहा था।’ ऐसी ही बात बाबरी मस्जिद के मुद्दई हाजी महबूब ने अयोध्या में कही।

यह भी पढ़े  पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम के बीच कैबिनेट की बैठक, क्या मिलेगी राहत?

उन्होंने कहा, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सिब्बल हमारे वकील जरूर हैं, लेकिन वह एक राजनीतिक पार्टी से भी जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मसले पर अपना रुख साफ करने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड की सराहना की है। चौतरफा घिर जाने के बाद सिब्बल ने इस बात से ही इन्कार कर दिया कि वह सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश में बोर्ड के वकील के रूप में उनका ही नाम लिखा है।

सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसने की कोशिश की कि वह सुप्रीम कोर्ट में कभी भी सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील नहीं रहे, फिर भी मोदी जी ने बोर्ड को धन्यवाद दिया।

सिब्बल ने कहा, पीएम से अनुरोध करता हूं कि वह थोड़ा सतर्क रहें। लेकिन यही सतर्कता दिखाने में कांग्रेस नेता सिब्बल खुद चूक गए। यह ठीक है कि वह अयोध्या मामले के एक पक्षकार रहे दिवंगत हाशिम अंसारी के पुत्र के वकील भी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील नहीं हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश में उनका नाम बोर्ड के वकील के रूप में दर्ज था।

यह भी पढ़े  BJP संसदीय दल की बैठक , PM मोदी समेत कई दिग्गज नेता मौजूद

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here