2019 में कौन बनेगा प्रधानमंत्री, मोदी को रोकने के लिए AAP और कांग्रेस ने मिलाया हाथ?

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देशभर में हाल ही में हुए उपचुनावों में कई सीटों पर विपक्षी दलों के गठबंधन से हुई बीजेपी की हार में अब आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को भी संभावना दिख रही है। अगले साल होने वाले आम चुनाव में दोनों के बीच दिल्ली में लोकसभा की सात सीटों पर गठजोड़ को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से आपस में दावे प्रतिदावों के साथ नोंकझोंक जारी रही। आप और कांग्रेस के बीच सीटों के बटवारे को लेकर दोनों दलों के नेताओं के बयान सार्वजनिक होने के बाद सियासी गलियारों में यह बहस तेज हो गयी। इसकी शुरुआत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन के एक ट्वीट से हुयी जिसमें उन्होंने आप की ओर से कांग्रेस के लिये दिल्ली में तीन सीटें छोड़ने की पेशकश किये जाने की बात कही।

माकन ने कहा, ‘‘कांग्रेस के लिये तीन सीटें छोड़ने की आप की कथित पेशकश पर अरविंद केजरीवाल मेरा जवाब देख लें।’’ एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘‘जब दिल्ली के लोग लगातार केजरीवाल सरकार को खारिज कर रहे हैं, ऐसे में हम उनके बचाव में आगे क्यों आयेंगे? आखिरकार केजरीवाल के साथ वाली टीम अन्ना आरएसएस समर्थित थी, जिसने मोदी को इतना बड़ा बनाने में मदद की।’’

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कहां-कहां मुरझाया ‘कमल’?

साल राज्य लोकसभा सीट
2018 गोरखपुर उत्तर प्रदेश
2018 फूलपुर उत्तर प्रदेश
2018 कैराना उत्तर प्रदेश
2018 भंडारा-गोंदिया महाराष्ट्र
2018 अलवर राजस्थान
2018 अजमेर राजस्थान
2017 गुरदासपुर पंजाब
2015 रतलाम मध्य प्रदेश

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जमकर तारीफ की थी जबकि इसे पहले केजरीवाल लगातार सिंह की भ्रष्टाचार के नाम पर आलोचना करते थे। इसके बाद से ही दिल्ली में भाजपा को मिलकर हराने की रणनीति के तहत आप और कांग्रेस के संभावित गठजोड़ की चर्चा सियासी गलियारों में चलने लगी।

मोदी के लिए 2019 की चुनौती
-विपक्षी एकजुटता 2019 की बड़ी रुकावट
-हिंदी बेल्ट में 2014 की बंपर जीत को दोहराना
-यूपी में एसपी-बीएसपी गठबंधन को पछाड़ना
-उपचुनाव में हार के बाद ब्रैंड मोदी में भरोसा जगाना
-हिंदुत्व और विकास के दावे को जनता तक पहुंचाना
-दलित,पिछड़ों और किसानों को फिर से एकजुट करना
-‘पढ़ाई, कमाई और दवाई’ के नारे को पूरा करना
-एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान विधानसभा चुनाव जीतना
-‘कमजोर विकल्प’ की विश्वसनीयता को घेरना
-2019 तक सहयोगियों को साथ रखना
-18 से 21 साल के 8 करोड़ नए वोटर्स को जोड़ना

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माकन के ट्वीट का जवाब देते हुये आप के प्रवक्ता दिलीप पांडे ने कहा कि इस बारे में कांग्रेस ने ही आप से संपर्क साधा था। उन्होंने मकान को जवाबी ट्वीट कर कहा, ‘‘कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता आप के संपर्क में और वे पंजाब तथा हरियाणा में हमारी मदद करना चाहते हैं और इसके बदले में दिल्ली में लोकसभा की कुछ सीटें अपने लिये चाहते हैं।’’ इस बीच आप नेताओं कांग्रेस के साथ किसी तरह के गठजोड़ की फिलहाल कोई बातचीत किये जाने से इंकार किया। उनकी दलील है कि दोनों पार्टियों का जनाधार एक समान है जिसे अपने पाले में रखने के लिये दोनों दल प्रयासरत हैं।

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