15 साल पुराने वाहनों पर रोक लगाए केंद्र : मोदी

0
121
Patna-Nov.27,2018-Bihar Deputy Chief Minister Sushil Kumar Modi is delivering his lecture during national workshop on “Urban Climate Resilience – The Context of River Basins” at Hotel Maurya in Patna.

उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आकस्मिक बाढ़, जल जमाव, भूकम्प, कार्बन उर्त्सन, वायु प्रदूषण आदि शहरों और उसके आस-पास की बस्तियों की सबसे बड़ी समस्या है। वायु प्रदूषण पर रोक के लिए भारत सरकार को मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर 15 साल पुराने वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने के साथ स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की जरूरत है। ‘‘अरबन क्लाइमेट रिजिलियेंस : द कन्टेक्स्ट ऑफ रिवर बेसिन’ पर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की ओर से होटल मौर्या में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि अध्ययन में शामिल असम के जोरहाट, पश्चिम बंगाल के बसिरहाट और बिहार के सहरसा आदि शहरों में बाढ़ के प्रभाव को कैसे कम किया जाए, इस पर गहन विचार की जरूरत है। गंगा के किनारों के शहरों में जलजमाव बड़ी समस्या है। बिल्डिंग बॉयलॉज में प्रावधान के बावजूद वष्ा जल के संचयन को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। भूकम्परोधी भवन के निर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत है क्योंकि बिहार के अधिकतर शहर भूकम्प जोन-5 के अन्तर्गत हैं। पटना में वायु प्रदूषण की मॉनिटरिंग के लिए पांच स्थानों पर ‘‘एयरमॉनिटरिंग मशीन’ लगाने का निर्देश दिया गया है। जाड़े के मौसम गंगा में पानी कम होने के कारण गंगा किनारे के शहरों के करीब दियारा का क्षेत्र उभर आता है जिससे मिट्टी और बालू के कण उड़कर वायु को प्रदूषित करते हैं। ईंट-भट्ठा की वजह से होने वाले वायु प्रदूषण पर रोक के लिए पटना के आस-पास के पांच प्रखंडों में नये ईंट-भट्ठा खोलने पर रोक के साथ पूर्व से संचालित ईंट-भट्ठों को नयी स्वच्छता तकनीक अपनाने के लिए एक साल का समय दिया गया है। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ने ‘‘वायु प्रदूषण पर पटना घोषणा पत्र’ को भी जारी किया।कार्यशाला में सहभागी केंद्र सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान व गोरखपुर इन्वॉरमेंटल एक्शन गुप से उन्होंने अपील की कि वे इन समस्याओं से निजात के उपाय सुझायें ताकि शहरों खास कर गंगा बेसिन के किनारे के शहरों को सुरक्षित रखने के साथ अगले 50 साल में होने वाली समस्याओं का समाधान ढूंढ़ा जा सके। इस अवसर पर व्यास जी, उपाध्यक्ष, बिहार राज्य आपदा प्राधिकरण, बिहार सरकार ने कहा कि शहरों की सुरक्षा में नगर व आस-पास के क्षेत्रों के प्राकृतिक व हरे-भरे क्षेत्र अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन्हें नियोजन प्रक्रिया में सम्मिलित करने व संरक्षित करने की आवयकता है। गंगा-ब्रह्मपुत्र क्षेत्र में अधिकतर नगर नदियों के किनारे ही बसे हुए हैं और इन नदियों के बाढ़ के मैदान (फ्लड प्लेन) इन्हें सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि हेतु अत्यन्त उत्पादक इन मैदानों को सुरक्षित रखना आवयक होगा और शहरी मास्टर प्लान में भूमि उपयोग का यह पक्ष नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।श्री चैतन्य प्रसाद, प्रमुख सचिव, नगर एवं आवास विकास विभाग, बिहार सरकार ने कहा कि भारत सरकार ने भी शहरी विकास हेतु अपनी प्रतिबद्धता जोरदार ढंग से प्रदर्शित की है। स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी, बाढ़ सुरक्षित नगर आदि कुछ ऐसे प्रमुख कार्यक्रम हैं जिनसे नगरों व महानगरों को सुरक्षित व स्वस्थ बनाने में अच्छे कार्य किये जा रहे हैं। बाढ़, जलजमाव एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी क्षेत्र में शहरी विकास को जोखिम व आपदा संवेदी होने की आवयकता है जिसमें स्थानीय निकाय, पैरास्टेटल संस्थाओं,राज्य विकास विभागों व महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इनमें आपसी सामंजस्य की महती आवयकता है।

यह भी पढ़े  बिहार विधान परिषद के चुनाव में 11 उम्मीदवार मैदान में , नामांकन आज से

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here