हैरान कर देने वाले खुलासे हो रहे बालिका गृह में हुए यौन उत्पीड़न मामले में

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मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह में हुए यौन उत्पीड़न मामले में कई हैरान कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं वहीं सीबीआइ की जांच भी जारी है। आज भी सीबीआइ की टीम दोबारा जांच करने के लिए मुजफ्फरपुर पहुंची। तो वहीं आज नई दिल्ली स्थित प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो ने ब्रजेश ठाकुर के तीनों अखबारों की प्रिंटिंग संबंधी जांच शुरू की।

पीआइबी को मिली अहम जानकारी

पीआईबी के निदेशक दिनेश कुमार, संजय कुमार उपनिदेशक और ऑडिटर मिथिलेश कुमार जांच के लिए मुजफ्फरपुर पहुंचे। जांच टीम ने अखबार के सर्कुलेशन, छपाई, प्रबंधन से लेकर पाठकों के बीच जाकर पूरे तथ्यों की जानकारी ली। जांच और पूछताछ में पता चला कि उसके दो अखबार के संपादक बेटा और बेटी हैं जबकि फरार चल रही ब्रजेश की राजदार मधु उर्दू अखबार हालात-ए-बिहार की संपादक है।

बता दें कि ब्रजेश ठाकुर के तीन अखबार निकलते थे। हिंदी में प्रात: कमल, अंग्रेजी में न्यूज नेक्स्ट औऱ उर्दू में हालात-ए-बिहार। प्रातःकमल और न्यूज नेक्स्ट के संपादक ब्रजेश ठाकुर के बेटा और बेटी हैं तो वहीं उर्दू अखबार की संपादक ब्रजेश की मिस्ट्री वुमेन मधु कुमारी है।

छपाई पांच सौ, सर्कुलेशन 62 हजार दिखाकर लेता था विज्ञापन

जांच टीम यह जानकर हैरान है कि आखिर पांच सौ से भी कम प्रति छपने के बावजूद 62 हजार से अधिक का सर्कुलेशन दिखाकर सरकार से विज्ञापन लिया जा रहा था? अब इसकी जांच के लिए पीआइबी की टीम समस्तीपुर भी जायेगी। क्योंकि  उर्दू अखबार हालात-ए बिहार को समस्तीपुर से ही प्राकशित करने का दावा किया जाता रहा है।

फंसी ‘बड़ों’ की गर्दन तो छोटों की ‘कुर्बानी’

बालिका गृह कांड में बड़े अधिकारियों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए छोटों की कुर्बानी ले ली। समाज कल्याण विभाग के निदेशक ने 12 जुलाई को पत्र लिख कर मुजफ्फरपुर के जिला बाल संरक्षण इकाई के जिस सहायक निदेशक दिवेश कुमार शर्मा की यौन शोषण मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए पीठ थपथपाई, उसी ने चार अगस्त को कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए निलंबित भी कर दिया। सवाल यह कि एक अधिकारी को एक ही मामले में सराहना व सजा कैसेे?

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घटनाक्रम पर नजर डालें तो कार्रवाई में समाज कल्याण विभाग के वरीय अधिकारियों ने ही काफी शिथिलता बरती है। इसमें विभाग एवं मंत्रालय के साथ कई अन्य अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में है।

मधुबनी से रहस्यमय तरीके से लड़की है गायब 

मधुबनी के जिस बालिका गृह में मुजफ्फरपुर से आई लड़की को रखा गया था उसके परिहार सेवा संस्थान चलाता है. लड़की के गायब होने के बाद 12 जुलाई को ही टाउन थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक वो लड़की बालिका गृह कैंपस में मौजूद एक पेड़ पर चढी और फिर दीवार फांद कर फरार हो गई।

एफआईआर के मुताबिक सुबह चार बजे वो लड़की उठी और कमरे से बाहर निकल गई. फिर पेड़ के सहारे दीवार पर आई और वहां से टहनियों के सहारे नीचे कूद गई।

ब्रजेश मामले में अहम साक्ष्य है लापता लड़की

बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के निवर्तमान सदस्य सह फेडरेशन ऑफ सीडब्ल्यूसी एंड जेजेबी मेंबर ऑफ बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अमरेश कुमार श्रीवास्तव ने दावे के साथ कहा कि मधुबनी बालिका गृह से लापता लड़की गूंगी नहीं है। वह ब्रजेश ठाकुर के मामले में अहम साक्ष्य थी। इसलिए उसे साजिश के तहत गायब करा दिया गया। उन्होंने स्थानीय बालिका गृह के संचालन के तौर तरीकों पर कई सवाल खड़े किए। वे रविवार को स्थानीय कीर्तन भवन रोड में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

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लापता लड़की गूंगी नहीं है

उन्होंने कहा कि यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद मुजफ्फरपुर बालिका गृह से 14 बालिकाओं को मधुबनी शिफ्ट किया गया था। इसमें 13 वर्षीया एक बालिका लापता है। उसे बालिका गृह की अधीक्षिका द्वारा गूंगी बताकर नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है। लेकिन, लापता लड़की गूंगी नहीं है।

जब मैं सीडब्ल्यूसी का मेंबर था तो उक्त बालिका से संबंधित फाइल मंगाकर अध्ययन किया था। काउंसलर रानी झा से भी जरूरी जानकारी ली थी। पता चला था कि उक्त बालिका ने बोलकर माता-पिता का नाम लिखाया था। वह दूसरी कक्षा तक पढ़ी थी। उन्होंने मधुबनी बालिका गृह से जुड़े मामले की भी सीबीआइ से जांच की मांग की।

उन्होंने मधुबनी बालिका गृह का संचालन करने वाली संस्था पर भी सवाल दागे। कहा कि विभागीय परिपत्रों, मार्गनिर्देशों व मापदंड के अनुसार बालिका गृह का संचालन नहीं किया जाता रहा है। आवाज उठाने पर झूठे मुकदमे में फंसाने तक से परहेज नहीं किया जा रहा है। मेरे खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत झूठा मुकदमा करा दिया गया था। हालांकि, वे अब कोर्ट से दोषमुक्त हो चुके हैं।

कार्रवाई में क्यों लगे तीन महीने  

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) मुंबई की ‘कोशिश टीम’ द्वारा बालिका गृह में यौन हिंसा का मामला समाज कल्याण विभाग को संज्ञान में देने के बाद भी अधिकारियों ने तत्परता नहीं दिखाई। मार्च में मिली रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का आदेश मई के अंतिम सप्ताह में दिया गया।

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आखिर कार्रवाई का निर्णय लेने में इतना लंबा समय क्यों लगा, जबकि मामला बालिकाओं के यौन शोषण जैसे संगीन मामलों का था। 26 मई को निदेशक का कार्रवाई संबंधित पत्र सहायक निदेशक को मिला।

28 मई को सहायक निदेशक ने निदेशक को पत्र लिख निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच के लिए बालिकाओं को दूसरे जगह स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। 29 मई को मोकामा, पटना व मधुबनी स्थानांतरित करने का आदेश मिला। 30 मई को बालिकाओं को स्थानांतरित करने के साथ ही संचालक पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

सहायक निदेशक को मिल रही थी धमकी, भयभीत व तनाव में थे 

बालिका गृह मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद इसमें रसूखदारों के नाम आने से सहायक निदेशक की मुश्किलें बढ़ गई थीं। लगातार मिल रही धमकी से उनका परिवार भयभीत व तनाव में था। अपनी स्थिति से उन्होंने निदेशक को अवगत कराया था। निदेशक ने उनकी सुरक्षा को लेकर डीएम व एसएसपी को पत्र लिखा था। 12 जुलाई को लिखे इस पत्र में लिखा गया था कि सहायक निदेशक ने विभागीय आदेश का त्वरित पालन किया है।

मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन उत्पीड़न का शिकार हुई एक 13 साल की मूक लड़की को प्रशासन ने मधुबनी के शेल्टर होम में आसरा दिलाया लेकिन 12 जुलाई से ही वो गायब है। एफआईआर में जो डिटेल दिया गया है उससे लगता है जैसे कोई मंजा हुआ अपराधी सुनियोजित तरीके से जेल ब्रेक कर भाग गया हो।

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