हुर्रियत नेता शब्बीर शाह ने कबूला ‘गुनाह’, हाफिज सईद से है उसका रिलेशन

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हुर्रियत नेता शब्बीर शाह ने (प्रवर्तन निदेशालय) ईडी से पूछताछ में कबूल किया है कि उसका पाकिस्तान में बैठे आतंकी हाफिज सईद से रिश्ता है.

हुर्रियत नेता शब्बीर शाह ने (प्रवर्तन निदेशालय) ईडी से पूछताछ में कबूल किया है कि उसका पाकिस्तान में बैठे आतंकी हाफिज सईद से रिश्ता है. ईडी की ओर से शनिवार को कहा गया कि शब्बीर ने खुद माना है कि हाफिज सईद से उसके तार जुड़े हैं. इसी साल जुलाई में ईडी ने शब्बीर शाह को गिरफ्तार किया था. टेरर फंडिंग केस में शाह की गिरफ्तारी हुई है. ईडी ने शब्बीर शाह के खिलाफ शनिवार को चार्जशीट फाइल कर दी है. पिछले दिनों एनआईए ने दावा किया था कि शब्बीर शाह के नाम करोड़ों की बेनामी संपत्ति है. एनआईए के मुताबिक शब्बीर शाह सबसे रईस अलगाववादी नेता दिख रहे हैं. उनकी दो दर्जन संपत्तियों की जानकारी एनआईए को मिल चुकी है. सन्नत नगर से लेकर बड़गाम, जम्मू, पहलगाम, कादीपोरा, अनंतनाग, श्रीनगर, नारबल और लारपोरा में उनके मकान हैं, उनकी दुकानें हैं या फिर जमीन है.

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शाह को प्रवर्तन निदेशालय ने 25 जुलाई को गिरफ्तार किया था. इसके एक दिन पहले ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने घाटी में अशांति को बढ़ावा देने के लिये कथित तौर पर आतंकवादियों को धन मुहैया कराने के आरोप में कुछ हुर्रियत नेताओं को हिरासत में लिया था.

शब्बीर को 2005 अगस्त के उस मामले में हिरासत में लिया गया जिसमें दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने कथित हवाला डीलर मोहम्मद असलम वानी (35) को गिरफ्तार किया था. वानी वर्तमान में ईडी की हिरासत में है. ईडी का दावा है कि वानी ने पास से 63 लाख रुपए बरामद किए गए थे जिनमें से 52 लाख कथित तौर पर शब्बीर को दिए जाने थे. इससे पहले ईडी ने शब्बीर को समन जारी किए थे.अभियोजन के अनुसार वानी ने दावा किया था कि उसने कश्मीरी पृथकतावादी नेता को 2.25 करोड रुपए दिए थे.

गिरफ्तारी से पहले शब्बीर शाह ने कहा था, बहुत भ्रम है. खैर, मैं दिल्ली जा रहा हूं. हम भारत के लोगों से पूछने जा रहे हैं कि क्या भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, उनके नेता लाल कृष्ण आडवाणी या मनमोहन सिंह गलत थे. अपने कार्यकाल में कभी भी उन्होंने भारत दौरा पर आने वाले पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलने से नहीं रोका.

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उन्होंने जोर दिया, कश्मीर एक महत्वपूर्ण मुद्दा है पाकिस्तान का रूख स्पष्ट है. वे कह रहे हैं कि वे वार्ता के लिए आएंगे और उन्हें जो कहना है कहेंगे. भारत भी अपनी दलीलें पेश कर सकता है लेकिन कश्मीर को जरूर शामिल करना चाहिए.

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