हाईकोर्ट करेगा प्रमोशन में आरक्षण पर अंतिम फैसला

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राज्य सरकार की ओर से आरक्षित वर्ग के उच्च पदों पर प्रमोशन पर अदालत में सुनवाई की दौरान पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमआर शाह और आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने कहा कि इस बीच राज्य सरकार जो भी करे अंतिम फैसला कोर्ट का होगा। इस मामले पर विस्तार से सुनवाई 30 अक्टूबर को की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर गाइडलाइन जारी की है। उसी के तहत प्रमोशन में आरक्षण दिया जा रहा है। पूरा मामला अनुसूचित जाति एवं जनजाति को प्रमोशन में आरक्षण से जुड़ा है। राज्य सरकार एक अधिसूचना जारी कर प्रमोशन में आरक्षण दे रही है।गौरतलब है कि बिहार सरकार की प्रमोशन में अनुसूचित जाति एवं जनजाति को आरक्षण दिये जाने की व्यवस्था पर पटना हाईकोर्ट की एकल पीठ ने रोक लगा दी थी। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने दो सदस्यीय खंडपीठ में अपील की थी, लेकिन दो सदस्यीय खंडपीठ ने भी एकल पीठ के फैसले को सही बताया। तब राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर हाईकोर्ट के फैसले पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से मना कर दिया। 2016 में बिहार सरकार को प्रमोशन में आरक्षण बंद करना पड़ा। लेकिन इस बीच राज्य सरकार ने फिर से नयी व्यवस्था कर आरक्षण लागू कर दिया। 17 मई 2018 और 5 जून 2018 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण के लिए नयी गाइडलाइन जारी की थी। उसके आधार पर बिहार सरकार ने एक कमेटी का गठन कर दिया था। इसी कमेटी की सिफारिशों के आधार पर प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था एक बार फिर से कर दी गयी। सुप्रीम कोर्ट ने पांच जून को केंद्र सरकार को कानून के तहत कर्मचारियों की निश्चित श्रेणी में प्रमोशन में आरक्षण देने की अनुमति दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण को लेकर मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को तब तक बरकरार रखने को कहा था, जब तक संविधान पीठ मामले में अंतिम फैसला न सुना दे। बिहार सरकार की ओर से जारी निर्देश के अनुसार आरक्षित वर्ग के उच्च पदों पर प्रमोशन का वही बेंचमार्क होगा, जो अनारक्षितों के लिए होगा। प्रमोशन के लिए बिहार सरकार ने नौ प्रकार के दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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