हर व्यक्ति को मिले सैन्य प्रशिक्षण : शंकराचार्य

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पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से ही भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतीपूर्ण रही है। यह चुनौती प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पिछले दिनों सीमा पर जो घटना घटी वह विश्व के सामने है। इस मामले में सेना और शासनतंत्र ने सक्रियता और सूझबूझ का परिचय दिया है। शंकराचार्य ने कहा कि विंग कमांडर अभिनंदन ने दुश्मन की धरती पर धैर्य, साहस, गोपनीयता और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया है, जो आदर्श और अनुकरणीय है। ऐसी परिस्थिति में आम लोगों की बुद्धि डावांडोल हो जाती है। उन्होंने कहा कि भारत अपने पर आक्रमण हो जाने पर चुस्ती और बाकी दिन सुस्ती में रहता है। प्रत्येक व्यक्ति को आत्मरक्षा के लिये नियत सीमा तक सेना का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता लोलुपता और अदूरदर्शी राजनीति का बोलबाला है। भारत में विपक्ष सचमुच में शासनतंत्र का पोषक अंग होता है। शासन तंत्र के अहंकार को सचेत कर विपक्ष जागरूक करने का काम करता है। सरकार के उचित निर्णय की विपक्ष को सराहना भी करनी चाहिये। साथ ही सरकार को विपक्ष के योग्य नेताओं से समय-समय पर सलाह भी लेनी चाहिये। तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने इसकी मिसाल पेश की थी लेकिन आज की राजनीति में अपने दल के ज्ञानी लोगों को भी किनारा कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर प्राकृतिक संपदाओं को नष्ट किया जा रहा है। नहर, विद्युत और बांध परियोजना के चलते गंगा नदी की अविरलता समाप्त हो चुकी है। राम मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में जाना ही नहीं चाहिये था। जिस तरीके से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया उसी तरह राम मंदिर का भी पुनर्निर्माण होना चाहिये। बाबरी मस्जिद को बाबर के समाधि स्थल पर बनाना चाहिये। 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व जो कहा था वह सच साबित हुआ। राम मंदिर बनाने की बात करने वाली बीजेपी सरकार में आने के बाद न्यायालय का हवाला देने लगी।

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