हरिहर क्षेत्र मेले का उद्घाटन आज, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी करेंगे उद्घाटन

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सोनपुर में हरिहर क्षेत्र मेले का उद्घाटन गुरुवार को अपराह्न चार बजे सूबे के उपमुख्यमंत्री करेंगे. मेले के उद्घाटन की तैयारी पूरी कर ली गयी है. पर्यटन विभाग के मुख्य सांस्कृतिक पंडाल को बड़े ही सुंदर ढंग से सजाया गया है. उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता राज्य के पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार करेंगे.
विशिष्ट अतिथि के तौर पर राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम नारायण मंडल, सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल, राज्य सभा सांसद हरिवंश मौजूद होंगे. वहीं विधायक डॉ रामानुज प्रसाद स्वागताध्यक्ष की जिम्मेदारियां संभालेंगे. उद्घाटन समारोह के मौके पर विधायक डॉ सीएन गुप्ता समेत अन्य गण्यमान्य मौजूद रहेंगे. इसके बाद शाम में कुमार शानू अपने गीत प्रस्तुत करेंगे. मेले में पर्यटकों का आना शुरू हो गया है.
चंद्रगुप्त मौर्य ने भी खरीदे थे हाथी-घोड़े 
सोनपुर राजधानी पटना से 25 किलोमीटर और वैशाली के हाजीपुर शहर से तीन किलोमीटर दूर है. इससे भी बड़ी बात यह कि मॉल कल्चर के इस दौर में बदलते वक्त के साथ इस मेले के स्वरूप और रंग-ढंग में बदलाव जरूर आया है लेकिन इसकी सार्थकता आज भी बनी हुई है.
5-6 किलोमीटर के वृहद क्षेत्रफल में फैला यह मेला हरिहरक्षेत्र मेला और छत्तर मेला मेला के नाम से भी जाना जाता है. हर साल कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के साथ यह मेला शुरू हो जाता है और एक महीने तक चलता है. यहां मेले से जुड़े तमाम आयोजन होते हैं. इस मेले में कभी अफगान, इरान, इराक जैसे देशों के लोग पशुओं की खरीदारी करने आया करते थे.  कहा जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने भी इसी मेले से बैल, घोड़े, हाथी और हथियारों की खरीदारी की थी. 1857 की लड़ाई के लिए बाबू वीर कुंवर सिंह ने भी यहीं से अरबी घोड़े, हाथी और हथियारों का संग्रह किया था.
शैव के लिए स्वर्ग व वैष्णव के लिए बैकुंठ
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले एशिया प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले का पौराणिक एवं पावन भूमिका अत्यंत ही पुरातन है.पौराणिक, धार्मिक, तथा अाध्यात्मिक वर्णन तो अनेक स्थानों पर है. पौराणिक अनुश्रुतियों के अनुसार गज ग्राह के बीच लंबे समय तक तक चले संघर्ष का अंत इसी स्थल पर हुआ था. गज को ग्राह ने इस तरीके से जकड़ रखा था कि गज का बचना मुश्किल था. गज ने अपने अाराध्य भगवान विष्णु को स्मरण किया.
साक्षात भगवान विष्णु ने इसी स्थल पर अवतरित होकर गज की रक्षा की. नारायणी नदी (गंडक) के किनारे पर गज ग्राह युद्ध के बाद ही कौनहारा घाट का नामकरण हुआ. यह स्थल हाजीपुर की ओर है. हरिहर क्षेत्र की संपूर्ण भूमि शैव के लिए स्वर्ग तथा वैष्णव के लिए बैकुंठ है. महान साधक जड़ भरत श्रृषि का आश्रम हरिहर क्षेत्र मंदिर से दो किलोमीटर उत्तर बैजलपुर गांव में गंडक नदी के किनारे स्थित है.
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