हरिहरक्षेत्र महोत्सव का हुआ भव्य आगाज ,कला संस्कृति व स्वास्थ्य मंत्री ने किया शुभारंभ

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एशिया फेम हरिहर क्षेत्र मेले के मुख्य सांस्कृतिक मंच पर शुक्रवार की शाम धूमधाम के साथ तीन दिवसीय हरिहर क्षेत्र महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही देश के जाने-माने कलाकारों ने गजल, भजन, लोक गीत तथा ठुमरी, कजरी लोक आस्था की गीतों से समां बांध दिया। कार्यक्रम का उद्घाटन कला संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री कृष्ण कुमार ऋषी तथा स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर कला संस्कृति मंत्री न मेले की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्व विख्यात यह मेला लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। यह व्यवसाय का प्रमुख केंद्र भी है। इस मेले में कला और संस्कृति का अछ्वुत समागम देखने को मिलता है। कला संस्कृति विभाग मेले के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता है। इस आयोजन में देश के नामचीन कलाकार हिस्सा लेते हैं। इसमें नए कलाकारों को भी उभरने का मौका मिलता है। इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए इसके पहले सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने भी मेले की महत्ता पर प्रकाश डाला। महोत्सव में छपरा के विधायक डॉक्टर सीएन गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कला संस्कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने भी मेला के दौरान विभागीय उपलब्धियों का बखान किया। आरंभ में आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए सोनपुर के विधायक डॉ रामानुज प्रसाद ने कहा कि कभी विश्व विख्यात रहे सोनपुर मेले का अब दायरा सिमट रहा है। यह मेला वाणिज्यिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। सरकार को चाहिए कि मेले के पहले वाली प्रतिष्ठा को पुनस्र्थापित करे। इसी क्रम में उन्होंने नयागांव के खस्ताहाल अस्पताल को नवजीवन देने का अनुरोध किया। अमनौर के विधायक शत्रुधन तिवारी उर्फ चोकर बाबा ने भोजपुरी में अपनी बात कही। इस अवसर पर सारण के डीएम हरिहर प्रसाद ने अतिथियों का पच्ष्प गुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया।

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आधुनिकता की चकाचौंध और परंपराओं के स्थापित मर्यादा के बीच विश्व विख्यात हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला अपने शबाब की रंगीनियों पर पहुंच गया है। अनेक संस्कृति और भाषा के दर्शकों से मेला का चप्पा-चप्पा अटा पड़ा है। खरीदारी भी हो रही है। हालांकि बिक्री की धीमी रफ्तार से दुकानदार संतुष्ट नहीं है फिर भी यह सोचकर संतोष है कि मेले की अंतिम अवधि तक सारा माल बिक जाएगा। प्रतिवर्ष यही होता है। मेले से खरीदारी करने वालों की यह धारणा होती है कि अंत में स्वत: सामान के दाम में गिरावट होती है। इस धारणा के कारण अधिकांश लोग बाद में ही खरीदारी करते हैं। अधिकतर दुकानदार भी यहां से अपना माल खपा कर ही वापस लौटना पसंद करते हैं।

सोनपुर मेले की सरकारी अवधि इस बार 3 दिसंबर को समाप्त हो जाएगी। लेकिन उसके बाद भी लगभग डेढ़ माह तक मेला गुलजार रहेगा। सरकारी समापन के बाद केवल सरकारी प्रदर्शनी एवं लाइसेंस से चलने वाले खेल-तमाशे व थिएटर बंद हो जाते हैं। शेष मेले में चहल-पहल बनी रहती है। लगभग पांच सौ से ज्यादा विभिन्न प्रकार की दुकानें समापन के बाद भी सजी रहती हैं और खूब बिक्री भी होती है। गर्म कपड़ों के बाजार का सेल मौसम के मिजाज पर निर्भर करता है। ठंड बढ़ते ही ऊलेन मार्केट में खरीदारी की गर्मी भी बढ़ जाती है। इस मेले की हृदयस्थली नखास में स्वेटर, कारडीगन तथा बच्चों से लेकर बड़ों तक के गर्म वस्त्रों की सेल की कई दुकानें लगी है। उधर मीना और मुंबई बाजार की भी भरमार है। इसमें महिलाओं की हमेशा भीड़ बनी रहती है। नखास के फुटपाथ पर भी एक से बढ़कर एक आकर्षक और उपयोगी वस्तुओं की दुकानें ग्राहकों को आकर्षित कर रही है।

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