स्विस बैंक में जमा हर पैसा कालाधन या टैक्स चोरी का नहीं: अरुण जेटली

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स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) में भारतीयों के जमा पैसे में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर हो गया है. अब इस हमले का जवाब देने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली सामने आए हैं. अरुण जेटली ने ब्लॉग के जरिए विपक्ष को जवाब दिया है.

जेटली के मुताबिक ये मानना सही नहीं है कि स्विस बैंकों में जमा हर पैसा टैक्स चोरी का है या ये कि गैरकानूनी ढंग से जमा की गई राशि है. वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि गैरक़ानूनी जमा राशि के मामले में स्विट्ज़रलैंड की स्थिति आज भी वैसी ही ही जैसी एक दशक पहले थी.

वित्त मंत्री जेटली ने लिखा, ‘खबर आई है कि स्विस बैंक में भारतीयों के धन में बढ़त हो रही है और इसके बाद गलत प्रतिक्रियाएं फैल रही हैं जिनके आधार पर ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि सरकार के काले धन को रोकने की कोशिशों का कोई नतीजा निकल रहा है या नहीं. इसका जवाब मैं देना चाहूंगा.

स्विट्जरलैंड ने अपने घरेलू नियमों में संशोधन लाना शुरू किया है जिसके आधार पर उसने भारत के साथ भी संधि की है. इसके तहत भारतीयों द्वारा जमा किए गए पैसे के वास्तविक आंकड़े की सूचना वो हमारे साथ साझा करेगा. काले धन को जमा करने वाले को ये जान लेना चाहिए कि ये केवल कुछ महीनों की बात है जब काले धन वालों के नाम सामने आएंगे और उन्हें भारत में काले धन के निवारण के लिए बने कानूनों के तहत कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा.

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स्व‍िस बैंकों में रखे पैसे की डिटेल साझा करने के लिए पहले तैयार नहीं था लेकिन बाद में वैश्विक दबाव की वजह से वह इसके लिए तैयार हुआ है. अब उसने उससे जानकारी मांगने वाले देशों को डिटेल देने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. 2019 से भारत को भी इसकी जानकारी मिलनी शुरू हो जाएगी.’

जब भारतीयों को लेकर खुलासे किए जाते हैं जिसमें पनामा पेपर्स भी शामिल हैं तो ये साफ हो जाता है कि निश्चित तौर पर कुछ के गैरकानूनी खाते हैं. हालांकि ये भी ध्यान रखना चाहिए कि भारत के बाहर भारतीयों का जो पैसा है वो कई तरह की श्रेणियों के अंतर्गत बंटा हुआ है. सीबीडीटी (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज) द्वारा की गई जांच के आधार पर पता चला है कि इनमें कई ऐसे भारतीय नागरिक हैं जो भारतीय मूल के हैं और अब उनके पास विदेशी पासपोर्ट हैं. इसके अलावा एनआरआई द्वारा रखा गया पैसा भी इसमें शामिल है. कई ऐसे भारतीयों का पैसा भी है जिसकी विदेश में जांच हो चुकी है और इसमें वो लोग भी शामिल हैं जो सीधे तौर पर पैसा विदेश भेजने के नियमों का पालन करते हुए अपनी रकम इन स्विस बैंक खातों में रख रहे हैं.

इसके बाद साफ हो जाता है कि केवल उन लोगों पर कार्रवाई करने की जरूरत है जो भारत में रहकर अपना पैसा विदेश में भेज रहे हैं. पैसा रखने वाले पहली दो श्रेणी के लोगों की जांच का अधिकार क्षेत्र उन देशों के पास है जिस देश के वो नागरिक हैं. तीसरी श्रेणी के नागरिकों की जांच भारत में आसानी से हो सकती है. अगर स्विस खातों में जमा पैसा इन श्रेणी में से किसी श्रेणी में नहीं आता है तो ये गैरकानूनी होगा और तब इनके खिलाफ जांच की जाएगी, गिरफ्तारियां होंगी और आपराधिक मुकदमों की शुरुआत की जाएगी.

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स्विट्जरलैंड ने अपनी टैक्स हैवन की छवि से निकलने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं और टैक्स चोरी की शिकायतों को दूर करने के लिए भी अच्छी कोशिशें की हैं. ये देश अब टैक्स चोरी करने वालों की तुरंत ही सूचना देने में सक्षम है लिहाजा अब ये टैक्स चोरों के लिए आदर्श जगह नहीं है. जो लोग इस देश और भारतीयों के पैसे को लेकर उपदेश दे रहे हैं उन्हें ये समझना चाहिए कि उनके पास जो जानकारी है वो गलत भी हो सकती है और उसके आधार पर वो गलत बयान दे रहे हैं. ये मान लेना कि स्विट्जरलैंड में जमा भारतीयों का सारा पैसा गैरकानूनी है और टैक्स चोरी का पैसा है ये गलत है और इस देश के लिए एक बार फिर गलत अनुमान लगाने वाला साबित हो सकता है.

क्या कहते हैं स्विस बैंक के नए आंकड़े?
स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में बैंक में भारतीयों के जमा पैसे में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है और ये 1 अरब स्विस फ्रैंक यानि 7000 करोड़ भारतीय रुपये तक पहुंच गया है. स्विस बैंक खातों में रखे भारतीयों के धन में 2011 में इसमें 12 फीसदी, 2013 में 43 फीसदी, 2017 में इसमें 50.2 फीसदी की बढ़त हुई. इससे पहले 2004 में यह धन 56 फीसदी बढ़ा था. यह 13 साल की सबसे तेज बढ़ोतरी है, साल 2004 में स्विस बैंकों में भारतीयों का पैसा 56 फीसदी बढ़ा था.

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राहुल गांधी का तंज- स्विस बैंक में कालाधन नहीं है?
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने बयानों की याद दिलाते हुए तंज कसा है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”2014 में वह कहते थे- स्विस बैंक से ‘काला’ पैसा मैं लाऊंगा और सभी भारतीयों के खातों में 15-15 लाख रुपये जमा कराऊंगा. 2016 में भाषा बदल गई. उन्होंने कहा- नोटबंदी ‘कालेधन’ को देश से खत्म कर देगा. 2018 में उन्होंने कहा- स्विस बैंकों में भारतीयों के ‘व्हाइट’ पैसों में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. स्विस बैंक में ‘कालाधन’ नहीं है!”

अभी से अनुमान लगाना ठीक नहीं- पीयूष गोयल
वित्त मंत्रालय का कामकाज संभाल रहे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने स्विस बैंक रिपोर्ट पर सफाई दी. उन्होंने कहा, ”भारत और स्विटजरलैंड के बीच समझौता है. 1 जनवरी 2018 से इस वित्तीय साल के खत्म होने तक का सारा डाटा हमें उपलब्ध करा दिया जाएगा. इसलिये अभी से इस पर किसी तरह का अनुमान क्यों लगाया जा रहा है.”

प्रधानमंत्री ने किया था कालाधन लाने का वादा
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कालाधन और स्विस बैंक में भारतीयों के पैसा जमा होने पर तब की मनमोहन सरकार पर सवाल उठाए थे. चुनाव प्रचार के वक्त बीजेपी ने वादा किया था कि सत्ता में आते ही कालाधन वापस लेकर आएंगे.

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