सूबे में मातृ-मृत्यु अनुपात 20.7 फीसद घटा

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भारत के महानिबंधक ने 2014-16 की अवधि के मातृ-मृत्यु अनुपात के अनुमानों पर विशेष बुलेटिन जारी किया है। मातृ-मृत्यु अनुपात को ‘‘प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर होने वाले मातृ मृत्यु की संख्या’ के बतौर परिभाषित किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर मातृ-मृत्यु अनुपात में 22 प्रतिशत की तेज गिरावट देखी गई जिससे यह अनुपात घटकर 130 रह गया। यह देखना उत्साहवर्धक है कि इस अवधि में बिहार राज्य में मातृ-मृत्यु अनुपात में 43 अंकों (20.7 प्रतिशत) की तेज गिरावट दर्ज हुई। संख्या के रूप में देखें, तो बिहार ने 2003 से शक्ति-प्राप्त कार्रवाई समूह और असम के अन्य सभी राज्यों से बेहतर प्रदर्शन जारी रखा है। बिहार में मातृ-मृत्यु अनुपात का वर्तमान स्तर 165 है जो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और असम जैसे राज्यों के बीच सबसे कम है। साथ ही, बिहार में मातृ-मृत्यु अनुपात में गिरावट 2003 से ही राष्ट्रीय औसत में गिरावट के साथ तुलनीय रहा है। पटना स्थित आद्री के सेंटर फॉर हेल्थ पॉलिसी में समग्र सामाजिक-जनसांख्यिक, आर्थिक और विकासमूलक चुनौतियों को देखते हुए यह उपलब्धि असाधरण है। सेंटर फॉर हेल्थ पॉलिसी के विशेषज्ञों की राय है कि ‘‘मातृ-मृत्यु अनुपात समग्र सामाजिक विकास, समाज में महिलाओं की स्थिति और उससे भी महत्वपूर्ण किसी भौगोलिक क्षेत्र में स्वास्य पण्राली के कामकाज और अनुक्रियाशीलता के सबसे सशक्त सूचकों में से एक है।

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