सूबे में जारी रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल

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राज्य में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। हड़ताल के कारण सरकारी मेडिकल कॉलेजों के मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए परेशानी काफी बढ़ गयी है। पीएमसीएच की बात करें तो वहां से बड़ी संख्या में मरीज पलायन करने को विवश हैं। गरीब मरीजों की हालत काफी खराब है क्योंकि प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराना उनके वश की बात नहीं। उधर, दलाल भी अस्पताल परिसर में सक्रिय हो गए हैं जो मरीज के परिजनों को बेहतर इलाज का पल्रोभन देकर प्राइवेट अस्पतालों की ओर ले जा रहे हैं। हड़ताल के दौरान कुल आठ मरीजों की मौत हुई। पीएमसीएच परिसर में मंगलवार को पूरे दिन माहौल गंभीर बना रहा। मरीज के परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर मरीजों को देखने समय पर नहीं आ रहे। ठेले पर मरीज अस्पताल के मेन गेट से बाहर की ओर जाते देखे गए। हड़ताल के कारण मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए आईएमए के दो डॉक्टर हड़ताली डॉक्टरों से मिलने गए, लेकिन कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। उल्लेखनीय है कि राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एम्स के छात्रों की पीजी में नामांकन के विरोध सहित कुल चार सूत्री मांगों के समर्थन में पूरे राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर सोमवार से हड़ताल पर हैं। आईसीयू में सुचारु रूप से हुआ काम 29 ऑपरेशन हुए : डॉ. गुप्ता पीएमसीएच के एनीस्थिसिया विभाग के एचओडी डॉ. विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि आईसीयू में काम सुचारु रूप से चल रहा है। हड़ताल के कारण काम बाधित नहीं हो रहा है। मंगलवार को सोलह मेजर और तेरह माइनर ऑपरेशन हुए। हालांकि तेरह ऑपरेशन टल गए। उन्होंने बताया कि बुधवार को सोलह मरीजों का ऑपरेशन किया जाएगा। डॉ. गुप्ता ने बताया कि ओटी 4 में दो मेजर ऑपरेशन हुए। वहीं, ओटी 3 में दो मेजर और छह माइनर, ओटी 2 में एक मेजर और तीन माइनर, ओटी एक में चार मेजर ऑपरेशन हुए। ईएनटी ओटी में दो, चाइल्ड ओटी में एक मेजर, दो माइनर, आई ओटी में तीन मेजर और एक माइनर ऑपरेशन किये गए। इस बीच लेबर रूम में एक सीजेरियन हुआ। ओपीडी में आये 2100, इमरजेंसी में 360 मरीज : अधीक्षक पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि हड़ताल के कारण मरीजों का इलाज प्रभावित नहीं हो रहा है। मंगलवार को ओपीडी में 2100 मरीज और इमरजेंसी में 360 मरीज आए।

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सुपरस्पेशलिटी संस्थान आईजीआईएमएस में अस्पताल कर्मियों के साथ सोमवार को की गयी पिटाई मामले में कार्रवाई होती देख मंगलवार को मेडिकल स्टूडेंट्स ने जमकर बवाल काटा। सोमवार को की गयी पिटाई के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निदेशक डॉ. एनआर विास ने डीन डॉ. केएच राघवेन्द्र की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया था। सोमवार को बैठक कर दोषी मेडिकल स्टूडेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने संबंधित अंतरिम रिपोर्ट निदेशक को दी थी। लेकिन निदेशक ने दोषी छात्रों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं करायी। वहीं मंगलवार को कमेटी की दिनभर चली बैठक में सीसीटीवी फुटेज और नामांकन रजिस्टर से छात्रों का फोटो से मिलान करा कर एमबीबीएस के 4 छात्रों को दोषी पाया। छात्रों के विरुद्ध कार्रवाई की रिपोर्ट रात करीब आठ बजे निदेशक को सौंपी गयी। उसके बाद कमेटी ने दोषी छात्रों के विरुद्ध 6 महीने संस्पेंड करने, भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृति नहीं हो इसके लिए सभी स्टूडेंट्स को फ्स्र्ट क्लास मजिस्ट्रेट से एविडेविट कराकर संस्थान प्रशासन को देना होगा। साथ ही तोड़ी गयी मशीन की मरम्मत का खर्च भी दोषी छात्रों को बराबर-बराबर भुगतान करना होगा। इसके लिए छात्रों के अभिभावकों को सूचना दी जाएगी। विदित हो कि सोमवार को मेडिकल स्टूडेंट्स ने सेंट्रल ब्लड क्लेक्शन रूम और रेडियोलॉजी में कार्यरत आउटसरेसिंग स्टॉफ को मनमाफिक कार्य नहीं करने के कारण जमकर पिटाई की गयी थी। साथ ही अपना ब्लड जांच देने के लिए मौजूद मरीजों को भी मेडिकल स्टूडेंट्स ने भगा दिया था। जिसके कारण मरीजों को परेशानी तो हुई ही संस्थान का भी नुकसान हुआ।कार्रवाई से बचने के लिए मेडिकल स्टूडेंट्स ने बनाया दबावसोमवार को आईजीआईएमएस में अस्पतालकर्मियों के साथ की गयी पिटाई मामले में संस्थान प्रशासन की कार्रवाई से बचने के लिए मेडिकल स्टूडेंट्स ने मंगलवार को दादागिरी दिखाई। मामले को दूसरी मोड़ देने के लिए मेडिकल स्टूडेंट्स ने निदेशक डॉ. एनआर विास और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल को चैंबर में पहुंच कर र्दुव्‍यवहार किया। आलम यह था कि मेडिकल स्टूडेंट्स को जैसे-जैसे कमेटी की कार्रवाई की जानकारी मिलती रही वैसे-वैसे वे लोग गोलबंद होकर करीब सौ की संख्या में शाम करीब पांच बजे निदेशक चैंबर पहुंच मामले को दूसरी ओर मोड़ने के लिए दबाव बना रहे थे। उसके बाद करीब शाम छह बजे मेडिकल स्टूडेंट्स मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल के चैंबर पहुंचकर डेढ़ घंटों तक हंगामा किया। इस दौरान छात्रों का कहना था कि चार दिन पहले रात करीब दस बजे एक मेडिकल छात्रा के साथ हुई छेड़खानी मामले में कार्रवाई नहीं किया गया। इसके लिए छात्र मेडिकल सुपरिटेंडेंट को दोषी ठहरा रहे थे। हालांकि मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने छात्रों को समझाने का प्रयास करते रहे। बावजूद छात्र करीब डेढ़ घंटे तक डॉ मनीष मंडल को चैंबर में घेर रखा। वहीं इमरजेंसी में आईसीयू समेत अन्य बेड के लिए मेडिकल सुपरिटेंडेंट के चैंबर से बाहर इंतजार कर रहे मरीज के परिजनों को भी छात्रों ने भगा दिया।

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