सूबे में क्रि केट के स्वर्णिम युग की शुरुआत : पटेल

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भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता, पूर्व विधायक तथा क्रि केट एससोसिएशन ऑफ बिहार (कैब) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि क्रि केट के लिए बिहार के स्वर्णिम युग की शुरुआत हो गई है। विगत 17 वर्षो से बिहार प्रथम श्रेणी के क्रि केट से वंचित था। बिहार और झारखंड के बंटवारे के बाद बीसीसीआई ने झारखंड को असली बिहार की मान्यता देकर बिहार के साथ सौतेला व्यवहार किया था जिसके कारण बिहार के हजारों खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के बल पर बिहार को प्रतिष्ठा दिलाना चाहते थे, उन्हें वंचित कर दिया गया। बिहार को रणजी क्रि केट खेलने संबंधी कोर्ट के आदेश पर खुशी जाहिर करते हुए श्री पटेल ने कहा कि युवा खिलाड़ियों को दो दशक क्रि केट के खेल से वंचित रखा गया । सीएबी इस लड़ाई को बीसीसीआई के खिलाफ पटना हाईकोर्ट, मुम्बई हाईकोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक ले गयी। सीएबी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को रणजी सहित प्रथम श्रेणी के तमाम मैचों में बिहार को भाग लेने का आदेश देकर बिहार के लिए खेल में स्वर्णिम युग की शुरुआत कर दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अब बिहार के खिलाड़ियों, युवाओं सहित तमाम प्रशंसकों को नये साल का तोहफा मिल गया जिससे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा के माध्यम से बिहार को देश ही नहीं दुनिया के स्तर पर अपने खेल से सम्मान दिलाएंगे। बिहार के बच्चों, युवाओं, खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं केवल मौका मिलने की जरूरत थी। बिहार में क्रि केट राजनीति का शिकार हो गया। राज्य बंटवारे के उपरान्त लालू यादव बिहार क्रि केट एसोसिएशन के अध्यक्ष बनकर केवल अपने बेटे तेजस्वी को क्रि केट खेलवाने की चिन्ता के कारण बीसीसीआई के खिलाफ लड़ न सके। लालू यादव को बिहार या बिहार के खिलाड़ियों की चिन्ता नहीं थी केवल अपने बेटे की चिन्ता थी इसी कारण बिहार में क्रि केट के खेल को चौपट कर खिलाड़ियों के भविष्य को बर्बाद कर दिया ।

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