सीरिया में UNSC का युद्ध विराम नाकाम, सैनिक हमले में 127 बच्चों समेत 510 की मौत

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की ओर से सीरिया में 30 दिनों के राष्ट्रव्यापी युद्ध विराम की मांग के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के कुछ घंटों बाद राजधानी दमिश्क के उपनगरीय क्षेत्र स्थित विद्रोहियों के कब्जे वाले पूर्वी घौटा में रविवार (25 फरवरी) को सीरियाई सरकार की सेना ने हवाई हमले व बमबारी जारी रखी. युनाइटेड किंगडम स्थित युद्ध पर निगरानी रखने वाली सीरियाई मानवाधिकार पर्यवेक्षण चौकी (एसओएचआर) के मुताबिक, रविवार की सुबह दो हवाई हमलों से अल शिफोनिया शहर को निशाना बनाया गया और फौजी दस्ते ने हरास्ता, कार्फ बडना, और जेसरेन पर मिसाइल दागे.

सरकारी फौजी दस्तों और जैश अल-इस्लाम (इस्मी फौज) के बीच भिड़ंत के बावजूद एसओएचआर ने बताया कि पूर्वी घौटा में सरकारी फौजी दस्तों के हमले तेज होने के बाद से शनिवार (24 फरवरी) की रात क्षेत्र में सबसे अधिक शांति थी और वहां कोई हताहत नहीं हुआ. यूएनएससी ने शनिवार (24 फरवरी) को पूर्वी घौटा समेत सीरिया में 30 दिनों का राष्ट्रव्यापी युद्ध विराम की मांग को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पूर्वी घौटा में किए जा रहे तेज हमलों में एक सप्ताह के भीतर 127 बच्चों समेत करीब 510 लोग मारे गए हैं.

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पोप ने सीरिया में हिंसा को अमानवीय करार दिया
वहीं दूसरी ओर पोप फ्रांसिस ने सीरिया में हो रही हिंसा को अमानवीय करार देते हुए उसकी निंदा की और संयुक्तराष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का समर्थन किया जिसमें संघर्ष विराम की मांग की गई है ताकि सीरियाई लोगों को खाना और दवाइयां पहुंचाई जा सके तथा बीमारों एवं घायलों को निकाला जा सके. सेंट पीटर्स स्क्वायर में फ्रांसिस के नेतृत्व में हजारों लोगों ने हिंसा के तत्काल समापन के लिए रविवार (25 फरवरी) को प्रार्थना की. उन्होंने कहा कि फरवरी का महीना सात साल के संघर्ष के दौरान सबसे हिंसक रहा. सैकड़ों, हजारों बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और अस्पताल में भर्ती मरीजों समेत हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. लोगों के पास खाने तक को नहीं है.

उन्होंने कहा यह अमानवीय है. आप शैतान से शैतान की तरह नहीं लड़ सकते हैं. शनिवार (25 फरवरी) को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने समूचे सीरिया में 30 दिन के संघर्ष विराम की मांग करने वाला प्रस्ताव पारित किया था, ताकि लाखों लोगों को मानवीय सहायता की आपूर्ति करायी जा सके और गंभीर रूप से घायलों तथा बीमारों को निकाला जा सके.

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