सीतामढ़ी के वातावरण में आज भी सीता विराजमान : मोरारी बापू

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जगत जननी मां जानकी की उद्भव स्थली सीतामढ़ी के खड़का रोड स्थित मिथिलाधाम में आयोजित 9 दिवसीय रामकथा के सातवें दिन मानस मर्मज्ञ मोरारी बापू ने इस भूमि की महिमा का भान कराते हुये कहा कि सीतामढ़ी में सिया और अयोध्या में राम के दर्शन से ही यात्रा की पूर्णता होगी। शुक्रवार को अपने प्रवचन में फिर से सीता की प्राकट्य भूमि सीतामढ़ी की दिव्यता दर्शाते हुए सीतामढ़ी को धाम के रूप में विकसित किए जाने की आवश्यकता बतायी। उन्होंने कहा कि जहां धारक, धारणा और धान्य होता है वहीं धाम होता हैं। जिस जगह से मां सीता प्रकट हुई वह तो धाम हैं ही परन्तु उसका उत्थान, सम्मान और उसका विशाल स्वरूप भी होना चाहिए। यह दिव्य भूमि और पवित्र भूमि तो है ही इसकी पहचान भी इसी रूप में होनी चाहिए। यहां के लोगों के मन में इसके धाम के रूप विश्व में प्रतिविम्बित करने का भाव रहना चाहिए। राजा जनक द्वारा स्वर्ण हल चलाने और सीता के प्रकट होने के यह भूमि धन धान्य से सम्पन्न हो गया। इसके वातावरण में आज भी सीता विराजमान है। यह भूमि इतनी जागृत है कि यहां सोये हुए व्यक्ति को भी ज्ञान प्राप्त होता है। हलेष्टी यज्ञ हुआ और जनक जी ने हल चलाया और धरती से सिया स्वर्ण सिंहासन पर अष्टकमल से प्रकट हुई। आठ सखियों के साथ जब सिया प्रकट हुई 16 वर्ष की उम्र की दिखी पर बाद में उन्होंने बाल रूप धारण कर लिया। हल के सिरा नोक से प्रकट होने से मां जानकी का नाम सीता पड़ा। मां जानकी के इस भूमि से प्रकट होने के बाद यह भूमि और उर्जावान हो गई। राम की जन्म स्थली अयोध्या और सिया की प्राकट्य स्थली सीतामढ़ी का एक ही स्वरूप है। मिथिला भूमि का सोधन किया जाना चाहिए। जिससे मिथिला पति जनक और मिथिलेश्वरी का यह क्षेत्र शस्य श्यामला बने। प्रवचन के दौरान एक प्रसंग में कहा कि लोग कहते हैं कि साधु-संत भिक्षाटन करते हैं परन्तु साधु-संत भिक्षा के लिए नहीं बल्कि लोगों का हाल जानने के लिए ही घुमा करते रहते हैं। साधु-संत किसी से मांगता नहीं क्योंकि उसे देना पड़ता है। सभी को प्रजा का हाल जानना चाहिए। उन्होने कहा कि हल से ही समस्याओं का हल होता है। लोभी की सेवा से किसी को लाभ नही मिलता वहीं मुखरें के बीच हंसना मना है। मोरारी बापू ने कहा कि सभी को आहार, आरोग्य और शिक्षा नि:शुल्क मिलना चाहिए। यह सामाजिक दायित्व है। मिथिला धाम का नाम विश्व में उजागर होना चाहिए। अयोध्या में राम की भूमि और सीतामढ़ी में सीता की भूमि का दर्शन करें। आरम्भ में ही बालकांड चौपाईयों में ‘‘हृदयँ सराहत सीय लोनाई। गुर समीप गवने दोउ भाई।। सिय मुख छबि बिधु ब्याज बखानी। गुरु पहिं चले निसा बड़ि जानी’ को लय में गाकर पूरे प्रशाल में भक्ति भाव की गंगा बहा दी। प्रवचन के बीच उन्होने जय जय सिया, जय जय राम, जय जय मिथिला धाम, जय जय सीते, जय जय राम, जय जय अयोध्या धाम की संगीत पूर्ण गायन में समां बांध दी। उन्होने कहा जहां पुरानी शक्ति है वहीं धाम है। जानकी सिया है वह सुन्दर है। जहॉ सिया हो वहीं राम आते है। सिया हैं तो राम को लीला के रूप में आना पड़ेगा। मोरारी बापू ने सातवें दिन मुख्य रूप से जनकपुरी, पुष्प वाटिका, राम-लक्ष्मण और सीता के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए सुन्दर मनोहारी भाव दृश्य का वर्णन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। शुक्रवार की रामकथा के दौरान काशी नरेश अनंत नारायण सिंह सपत्नीक, जिला परिषद अध्यक्ष उमा देवी, जिला परिषद पूर्व अध्यक्ष इंद्राणी देवी, डीडीसी प्रभात कुमार, आयकर अधिकारी संजीव कुमार, पूर्व मंत्री सुनील कुमार पिन्टू, उमेशचन्द्र झा, अरुण गोप, विराटनगर से महेश जाजू, रमेश लाखोटिया आदि भी उपस्थित थे।

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