सीट बंटवारे से भी ज्यादा अहम है ये फैक्टर, शाह-नीतीश कर सकते हैं मंत्रणा

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लोकसभा चुनाव नजदीक है और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह इस पर अपना काम शुरू कर दिया है. लोकसभा चुनाव के लिहाज से बिहार की 40 सीटें काफी अहम मानी जाती है. पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बिहार में अच्छा प्रदर्शन किया था. और 31 सीटों पर जीत दर्ज की की थी. वहीं, जेडीयू के साथ आने से यह बढ़कर 33 हो गई है.

अमित शाह के बिहार दौरे को लेकर सभी के मन में एक ही बात चल रही है कि एनडीए गठबंधन के सहयोगी पार्टियों की झोली में कितनी सीटें आएंगी. सीट बंटवारे पर क्या अमित शाह सहयोगी पार्टियों की बात को मानेंगे या फिर अपनी ही बात मनवाने की कोशिश करेंगे. वहीं, यह भी सवाल उठ रहा है की क्या नीतीश कुमार बीजेपी के साथ सीट को लेकर सामंजस्य बैठा पाएंगे.

हालांकि अमित शाह को चाणक्य माने जाते है इसलिए माना जा रहा है कि वह दिल्ली से सभी के लिए कोई न कोई फॉर्मूला जरूर लेकर आएंगे. लेकिन अमित शाह और नीतीश कुमार दोनों के लिए सीट बंटवारे से भी अधिक अहम मुद्दा है. जो दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. दरअसल दोनों पार्टियों को मोदी लहर से नुकसान पहुंचा है. और उसी मुद्दे पर अमित शाह और नीतीश कुमार दोनों अपनी मंत्रणा करेंगे.

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इतने सीट जीतने के बाद भी मोदी लहर में बिहार की 7 सीटें बीजेपी से अछूती रह गई. वहीं, नीतीश कुमार को मोदी लहर और आरजेडी का साथ देने से काफी नुकसान उठाना पड़ा है. नीतीश कुमार अपनी सीटों पर फिर से काबिज होना चाहती जिनपर बीजेपी ने मोदी लहर में अपने पाले में कर लिया था. इसलिए नीतीश कुमार अमित शाह से इसे लेकर मंत्रणा जरूर करेंगे.

वहीं, अमित शाह को बिहार के उन 7 सीटों पर नजर है जिसे जितने के लिए उन्हें नीतीश कुमार की जरूरत जरूर होगी. नीतीश कुमार के सेक्यूलर चेहरे के बदौलत बीजेपी सीमांचल में अपना पांव मजबूत करना चाहती है. क्योंकि देश में मोदी लहर के बावजूद सीमांचल में बीजेपी अपने जगह बनाने में सफल नहीं हो पाया था. हालांकि बीजेपी के इस रणनीति में नीतीश कुमार उनका साथ जरूर देंगे. लेकिन बीजेपी को भी नीतीश कुमार की बातों का ध्यान रखना होगा.

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