सिया नाम से मिलती मर्यादा, शालीनता और पवित्रता : मोरारी बापू

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सीतामढ़ी- जगत जननी मां जानकी की प्रकाट्य स्थली सीतामढ़ी के खड़का रोड में मिथिलाधाम में रामकथा को ले बने विशाल पंडाल में मानस मर्मज्ञ व अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक मोरारी बापू ने 9 दिवसीय रामकथा के दूसरे दिन भव्य मंच के व्यासपीठ से खचाखच भरे श्रद्धालुओं के जनसमूह को सम्बोधित करते ‘‘सीता’ शब्द का विश्लेषण करते हुए कहा कि सिया के कई रूप है। सिया का नाम लेने से ही मर्यादा के साथ सहनशक्ति, शालीनता, पवित्रता, शुद्धता प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि सीता शब्द में ही जयश्री, प्रिय और सीताराम का संकेत होता है। उन्होंने कहा कि ललाट पर तीन रेखा वाले तिलक में बीच की लाल रेखा किशोरी जी का प्रतीक है। प्रवचन के दौरान सिया राम, सिया राम, जय सियाराम के सामूहिक धुन से गुंजायमान होता रहा पूरा वातावरण। इस मौके पर बहुत से लोग खड़े होकर धुन में शामिल हुए। उन्होने कहा कि रामभक्ति का श्रीगणोश हनुमान जी से किया जाता है। हनुमान के के कई रूप है। हनुमान को शिव का अवतार और गौरी भी माना जाता है। वहीं सीता को जगत माता और लव-कुश की मां के रूप में जाना जाता है। सिय मुख छवि बिन्दु ज्ञान बखानी.., जानकी जी से लोगों को अपनी निर्मलता और शुद्धता की मांग करनी चाहिए। मनुष्य को जन्म से लेकर अंत तक राम पर भरोसा रहता। संगीतमय वातावरण में दूसरे दिन का प्रवचन मां सीता पर ही केन्द्रित रहा। भगवान श्रीराम गुरू के पास जाते थे और उन्हे गुरू मिलते गए। बापू ने गुरू शब्द को परिभाषित करते हुए कहा कि गुरू शब्द मृतक को मी जीवित कर देता है। गुरू को विवेक सागर भी कहते है। उन्होनें लोगों से रामायण का चिंतन-मनन करने का आह्वान किया। श्री बापू ने कहा कि रामायण में कपट मुनी की भी र्चचा है। कपट शब्द की ब्याख्या करते हुए उन्होने कहा कि कपटी व्यक्ति अपना दोष छिपाता है। अपनी दुर्बलता छिपाने का नाम ही कपट है। यह अहंकार से भी बड़ा है। अगर व्यक्ति अवगुण को परिमार्जित करेगा तो वह सफल मानव बन सकता है। बापू ने कहा कि रामकथा का प्रकाट्य 1631 में हुआ था। जहॉ राम कथा होती है वहां सारी शुद्धियां आती है। कार्यक्रम की शुरूआम हनुमान चालीसा के पाठ से हुआा जबकि सम्पन्न आरती के साथ किया गया। आयोजन समिति के अधिकांश सदस्य व्यवस्था में सहयोग कर रहे थे। इसमें रामकथा प्रेम यज्ञ समिति के संरक्षक रमेशचन्द्र टिकमानी की भूमिका प्रमुख दिख रही थी। इसके अतिरिक्त संरक्षक सज्जन हिसारिया, डा. शंकर खेतान, दीपक मस्करा, जानकी जनसेवा ट्रस्ट के राधेश्याम मिश्रा, नीरज गोयनका, राजेश कुमार सुन्दरका आदि शामिल थे।

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