साहित्य में समकालीन महिला’ विषय पर हुआ सेमिनार

0
123

पटना : स्थानीय बीआईए सभागार में कोरस टीम द्वारा ‘‘अजदिया भावेले’ के तहत रविवार को दूसरे दिन ‘‘साहित्य में समकालीन महिला’ विषय पर सेमिनार के साथ ही सविता सिंह के कविता पाठ का आयोजन किया गया। दिल्ली विविद्यालय में अंग्रेजी की प्राध्यापक सविता सिंह ने सेमिनार की अध्यक्षता एवं कोरस की सचिव समता राय ने सेमिनार का संचालन किया।उपस्थिति मंच पर विशिष्ट तौर पर इलाहाबाद विविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक व आलोचक प्रणय कृष्ण सहित कवयित्री सविता सिंह, जनमत के प्रधान संपादक रामजी राय, कहानीकार व नाटय़कर्मी नूर जहीर और कवयित्री निवेदिता शकील मौजूद थीं। इनके अलावा वरिष्ठ कवि अरुण कमल, वरिष्ठ कवि आलोक धन्वा, पटना वीमेंस कॉलेज की अंग्रेजी अध्यापक डा. ऋचा और दक्षिण बिहार केन्द्रीय विविद्यालय, गया के हिन्दी अध्यापक डा. योगेश प्रताप शेखर, नवल किशोर चौधरी, शायर संजय कुमार कुंदन, कवि प्रतिभा, कवि अनिल विभाकर, लेखक अरुण शाद्वल, राकेश प्रियदर्शी, कौशलेन्द्र, अंचित, शशांक मुकुट, राहुल, राजेश कमल भी मौजूद थे। सविता सिंह ने कहा कि स्त्रीवाद का झगड़ा मार्क्‍सवाद से नहीं है। स्त्री का घरेलू श्रम भी उत्पादक श्रम होता है। साहित्य में समकालीन महिला-दृष्टि दुनिया भर में चल रहे महिला-आन्दोलनों का हिस्सा है। रामजी राय ने कहा कि समकालीनता अस्मिता विमशरे को लेकर आई है। वैसे तो प्रेमचंद के ‘‘गोदान’ की मालती का प्रश्न भी महिला प्रश्न है। महिला-दृष्टि, दलित-दृष्टि की जरूरत समाज को सबसे ज्यादा है और सापेक्षिक तौर पर यह स्वायत्त दृष्टि है। अगर कोई सामाजिक परिवर्तन या सांस्कृतिक परिवर्तन चाहता है तो महिला- दृष्टि व दलित-दृष्टि के बगैर परिवर्तन संभव नहीं। इसलिए सामाजिक स्ट्रक्चर को बदलने या साहित्य की समकालीन महिला-दृष्टि की बहुत जरूरत है। नूर जहीर ने कहा कि उर्दू साहित्य में समकालीन महिला-दृष्टि प्रखर है, लेकिन उनकी आवाज दबा कर रखी है। बुजुर्ग पुरु ष तो साहित्य में इश्क की बात कर सकते हैं, लेकिन महिला बुजुर्ग साहित्यकार का इश्क पर बात करना साहित्य में अच्छा नहीं मानते लोग। डा. विनय ने कहा कि स्त्री-पुरु ष में जैविक अंतर है। वरिष्ठ कवि अरुण कमल ने कहा कि बिना आर्थिक आजादी के आज भी स्त्री का लेखन असंभव जैसा है। सविता सिंह ने एक दर्जन कविताओं का पाठ किया। मैं किसकी औरत हूँ, शाम में एक कामना, गति और डर आदि कविताएं पढ़ीं।

यह भी पढ़े  आईएएस वाइव्स एसोसिएशन पढ़ायेगा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here