साधना से प्राप्त होता है जीवन में सब कुछ

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मानव को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है सत्संग। सत्संग में साधना का अपना अलग महत्व है। साधना को हम जीवन में उतारकर अपने हृदय की गंदगी को दूर करते हैं। इससे आत्मा शुद्ध व मन निष्कपट होता है। यह कहना है गर्दनीबाग स्थित गेट पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित सत्संग में रामाश्रम सत्संग के आाचार्य परम समर्थ आलोक भैया जी का। वे रामाश्रम सत्संग, मथुरा, उपकेन्द्र गर्दनीबाग, पटना द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सत्संग सह भंडारा कार्यक्रम के दूसरे दिन बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु महाराज के कथनानुसार साधना हमारी वृत्ति को अंतरमुखी करती है। कर्म, उपासना, योग तीनों का मिलन है साधना। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि साधना से हमारी सभी समस्याओं का अपने आप समाधान हो जाता है। हम सत्संगी के अंदर सबके लिए प्रेम होना चाहिए। आचायरे ने कहा कि साधक के विचार से ही गुरु की महत्ता का पता चलता है। इसलिए हम ऐसा आचरण करें कि लोगों को पता चले कि इनका गुरु काफी पावरफुल है। हममें और परमात्मा में यही अंतर है कि हममें अहम है और परमात्मा में अहम नहीं है। जिस दिन अहम खत्म हुआ उस दिन परमात्मा से मिलन होता है। इस अवसर पर विधान पार्षद डॉ. रणबीर नंदन, संयोजक सुधीर रंजन सहाय, आचार्य डॉ. ज्योति प्रसाद, अमेरिका से आये संजीव भैया, जयपुर से आए डॉ. मोहित भैया, नोयडा से सुनील भाई साहब, आचार्य ओम नारायण शर्मा, आचार्य अमरेन्द्र कुमार सिन्हा, मुख्य आयुक्त (आयकर) कौशल किशोर श्रीवास्तव, संजीव भैया, आचार्य विश्व विनायक सिंह, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के पूर्व सचिव आशुतोष कुमार वर्मा सहित अनेक आचार्य शामिल हुये।

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