सातवे दिन माता की अर्चना और आराधना के साथ पंडालों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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Patna-Oct.15,2018-A view of idol of goddess Durga at Ramrkrishna Mission Ashram in Patna during Navratra festival.

नवरात्रि के सातवे दिन माता की अर्चना और आराधना के साथ पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। देर शाम सप्तमी प्रवेश के साथ माता के पट खुलने लगे और वातावरण या देवी सर्वभूतेषु … और मां भगवती के जयकारे से गुंजायमान होता रहा।

बांसघाट स्थित श्री सिद्धेश्वरी काली मंदिर में इस नवरात्र सप्तमी, अष्टमी व नवमी को माता का पट 24 घंटे खुला रहेगा। मंदिर के सचिव इंजीनियर शैलेंद्र प्रसाद ने बताया कि भक्तों की सुविधा के मद्देनजर यह व्यवस्था की गई है। श्री सिद्धेश्वरी काली मंदिर में नवरात्र की उक्त तिथियों को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। बाकी दिनों में पहले की तरह ही निर्धारित समय के अनुसार माता का पट खुलेगा और भक्त मंदिर में पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

आज देवी का पट खुलते ही पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। आज सुबह चार बजे देवी प्रतिमाओं में प्राण-प्रतिष्ठा एवं आरती के बाद पट खोल दिया गया। शहर के काली मंदिरों में भी आज चार बजे ही माता का पट महाआरती के बाद खोल दिया गया।

मछुआटोली में सुबह चार बजे मां दुर्गा का आह्वान किया गया। यहां पर वेदमंत्रों की ध्वनि के बीच देवी का पट खोला गया। पट खोलने से पहले देवी की महाआरती उतारी गयी। आरती में राजधानी के कोने-कोने से आये बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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मां दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं। इनके शरीर का रंग घने अन्धकार की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं। ये तीनों नेत्र ब्रrाण्ड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्युत के समान चमकीली किरणें नि:सृत होती रहती हैं। इनकी नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएं निकलती रहती हैं। इनका वाहन गर्दभ-गदहा है। ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वरमुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं। दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग (कटार) है। मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यन्त भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम ‘‘शुभंकरी’ भी है। दुर्गा पूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन ‘‘सहस्रर’ चक्र में स्थित रहता है। उसके लिए ब्रrाण्ड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है।

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सिद्ध शक्तिपीठ माता श्री छोटी पटनदेवी जी मंदिर का शीर्ष कलश एवं ध्वज अब 108 फीट ऊंचा होगा। श्रद्धालुओं की आस्था और निष्ठा से जुड़े इस शक्तिपीठ में देश-विदेश के सभी 51 शक्तिपीठों के दर्शन भी होंगे। इसके लिए सभी शक्तिपीठों से मिट्टी लाकर ‘‘शक्ति पिंड’ स्थापित कर प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। इसमें पाकिस्तान में पड़ने वाले शक्तिपीठ भी शामिल हैं। तीन मंजिला होगा मंदिर का स्वरूपनगर रक्षिका माता श्रीछोटी पटनदेवी जी मंदिर में नवरात्र के पूर्व से विकास योजनाएं शुरू हैं। मंदिर के पीठाधीश आचार्य अभिषेक अनंत द्विवेदी ने बताया कि माता का दक्षिण जंधा इस स्थल पर गिरा था। अब मंदिर का स्वरूप तीन मंजिला होगा। प्रथम मंजिल पर 51 शक्तिपीठों के दर्शन होंगे। इसके लिए सभी शक्तिपीठों की मिट्टी से पिंड स्थापित कर शुभ मुहूर्त में प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। द्वितीय मंजिल पर होगी दस महाविद्या व तंत्र साधना पीठमंदिर के द्वितीय मंजिल पर दस महाविद्या एवं तंत्र पीठ की स्थापना होगी। यह व्यवस्था धार्मिक अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए किया जा रहा है। गर्भगृह के निर्माण के साथ देवी के वर्तमान सिंहासन के स्वरूप में आंशिक परिवर्तन किए जाएंगे। निर्धन कन्याओं के लिए विवाह मंडपम गरीब और निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए मंदिर प्रांगण में ही ‘‘विवाह मंडपम’ की स्थापना का कार्य चल रहा है। सुविधाओं से सुसज्जित विवाह मंडपम का निर्माण भी अगले वर्ष तक पूरा होने की संभावना है। मुख्य सड़क पर हाजीगंज मोड़ के पास विशाल प्रवेश द्वार बनेगा। निर्माण सेवा में लगी है श्रद्धालु सदस्यों की टीमश्री छोटी पटनदेवी जी गौ मानस सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य विवेक द्विवेदी के नेतृत्व में श्रद्धालु सदस्यों की टीम निर्माण में तत्परता से लगी है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में जागरण अभियान भी चलाया जा रहा है। विवेक द्विवेदी ने बताया कि दशहरा के बाद निर्माण में गति आयेगी।

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