सवर्ण आरक्षण का अधिकतर पार्टियों ने किया स्वागत

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केन्द्र सरकार के आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के फैैसले का बिहार में अधिकतर पार्टियों ने स्वागत किया है. बीजेपी, एलजेपी, जेडीयू और हम ने कहा कि केन्द्र सरकार का यह निर्णय सराहनीय है. वहीं जेडीयू ने आर्थिक पाबंदी की सीमा 8 लाख से बढ़ाकर 12 लाख करने की मांग की है.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद डॉ सीपी ठाकुर ने कहा कि जमींदारी उन्मूलन और लैंड सीलिंग के बाद ज्यादातर सवर्णों की हालत काफी खराब है. गरीब सवर्णों को आरक्षण मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि गरीब, गरीब ही होता है, चाहे वह सवर्ण हो अथवा पिछड़े वर्ग का. जरूरमंद लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना ही चाहिए.

इस फैसले के लिए सीपी ठाकुर ने पीएम नरेन्द्र मोदी और उनके कैबिनेट को धन्यवाद दिया और सभी दलों से अपील की कि सियासत छोड़ कर संसद में इसे पास कराना चाहिए. उन्होंने मोदी सरकार को सलाह दी कि अगर संसद के दोनों सदन में संशोधन विधेयक पास नहीं होता है तो सरकार joint session बुलाकर इसे पास कराए.

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आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का कोई संविधान में प्रावधान नहीं है. लोकसभा में तय करेंगे कि गरीब सवर्णों पर आए संविधान संशोधन पर क्या करना है. तेजस्वी ने कहा कि जब 15 फीसदी आबादी वालों को 10 फीसदी आरक्षण देने की बात हो रही है तो 85 फीसदी वालों को 90 फीसदी आरक्षण दें.

पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि चुनाव सामने है इसलिए ऐसी बात सामने आ रही है, ये पूरी तरह जुमलेबाजी है. इनकी जुमलेबाजी में लोग कतई भरोसा नहीं करने वाले हैं. आरएलएसपी अध्यक्ष ने कहा कि सवर्ण जमात के लोग इनसे अलग हो रहे हैं इसलिए ये ऐसा कह रहे हैं. ये बस आंख में धूल झोंक रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने ट्वीट किया, ”आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण मिले, मैं पक्षधर हूँ. पर जातीय जनगणना रिपोर्ट को प्रकाशित कर अन्य समूह के लोगों को भी संख्या अनुपात में आरक्षण मिले. सरकार द्वारा आज की यह घोषणा  2019 चुनाव के परिपेक्ष्य में जुमला न सिद्ध हो. सवर्ण समाज भी जुमलेबाजों से दूर जा चुके है.”

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वहीं एलजेपी सांसद चिराग पासवान ने कहा कि हमारी पार्टी के गठन के समय से ही गरीब सवर्णों के लिए 15 फीसदी आरक्षण की मांग की थी. काफी खुशी की बात है कि सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. गरीबी जाति देख कर नहीं आती है बल्कि हर वर्ग में गरीब लोग हैं जिन्हें मदद मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अब संशोधन बिल को संसद में पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी. लंबे समय से गरीब सवर्णों के आरक्षण की मांग होती रही है, विपक्षी पार्टियों को विरोध नहीं,दो तिहाई बहुमत से इसे पास कराना चाहिए.

जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम पार्टी ने भी केन्द्र के इस फैसले का स्वागत किया है. प्राटी के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा कि कौन क्या बोलता है इससे मतलब नहीं हमारी पार्टी का स्टैंड बिलकुल क्लीयर है. हम पार्टी गरीब सवर्ण आरक्षण का हम पार्टी स्वागत करती है .

जेडीयू के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह और अफजल अब्बास ने भी ने ग़रीब सवर्ण को दस प्रतिशत आरक्षण देने की केंद्र की घोषणा का स्वागत किया है. नरेन्द्र सिंह ने कहा कि जेडीयू की शुरू से ही मांग थी गरीब सवर्णों को आरक्षण मिले. उन्होंने कहा सवर्ण समुदाय की जो आरक्षण का तय सीमा है उसे आठ लाख सालाना से बढ़ाकर 12 लाख किया जाए.

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वहीं अफजल अब्बास ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार का सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण का फैसला सराहनीय है. हिन्दू की सवर्ण जातियों के साथ-साथ मुसलमानों को भी मिलेगा फायदा. मुसलमानों में सैयद,शेख,पठान जैसी जातियां आर्थिक रूप से पिछड़े हैं. उन्होंने कहा कि सभी दलों को इससे संबंधित संशोधन विधेयक को संसद में पास कराने में सहयोग करना चाहिए.

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