सरकार ने 1,14,707 आंगनबाड़ी सेविकाओं के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए

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प्रदेश में फर्जी प्रमाण पत्रों पर शिक्षक नियुक्ति की निगरानी से जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है। इसी बीच आंगनबाड़ी सेविकाओं की नियुक्ति भी फर्जी प्रमाण पत्र पर किये जाने का मामला प्रकाश में आया है। लोकायुक्त बिहार के आदेश पर कराये गये आंगनबाड़ी सेविकाओं के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच में 10 फीसद प्रमाण पत्र जाली पाये गये हैं। जो सरकार के रोंगटे खड़े कर दिये हैं। सरकार ने स्वीकार किया है कि पूरे प्रदेश में काफी संख्या में ऐसे आंगनबाड़ी सेविकाओं की नियुक्ति की गयी है, जिनकी अर्हता और योग्यता संबंधी प्रमाण पत्र जाली हैं।

इसी के मद्देनजर सरकार ने सभी 1,14,707 सेविकाओं के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए हैं। समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार लोकायुक्त बिहार ने 22 मई 2019 को भोजपुर जिले आंगनबाड़ी सेविकाओं की शैक्षणिक योग्यता की जांच कराने का आदेश दिया था। इसी के मद्देनजर 2014 प्रमाण पत्रों को तीन बोडरे को भेजा गया था, जिसमें अभी तक मात्र 58 प्रमाण पत्रों की जांच प्रतिवेदन समाज कल्याण विभाग को मिला है। इन 58 प्रमाण पत्रों में छह प्रमाण पत्र जाली पाये गये हैं। इस आधार पर करीब दस फीसद प्रमाण फर्जी होने की आशंका जतायी जा रही है। दस फीसद आंगनबाड़ी सेविकाओं के शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी पाये जाने के मद्देनजर राज्य सरकार ने सभी 1,14,707 आंगनबाड़ी सेविकाओं की शैक्षणिक योग्यता की जांच कराने का फैसला लिया है।
आईसीडीएस निदेशक ने सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने-अपने जिले की सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं की शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच कराने की हिदातय दी है। समीक्षा में पाया गया कि सिर्फ भोजपुर जिले में ही सैंपल के आधार पर 58 आंगनबाड़ी सेविकाओं की शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र में दस फीसद लोगों का प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। सरकार ने युद्ध स्तर पर सभी 1,14,707 नियोजित आंगनबाड़ी सेविकाओं की शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन संबंधित बोर्ड से कराकर निदेशालय को पांच सितम्बर तक उपलब्ध कराने की हिदायत सभी जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ) को दी है।

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राज्य में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका के पर संविदा के आधार पर हो रही नियुक्ति में बड़े पैमाने पर धांधली एवं रिश्वतखोरी की आम शिकायत रही है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने रिश्वतखोरी की मिल रही शिकायत के मद्देनजर समेकित वाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय से सेंट्रलाइज नियुक्ति करने का सुझाव दिया, जिसे आईसीडीएस निदेशालय ने ठुकरा दिया। पिछले साल समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अतुल प्रसाद द्वारा जिलाधिकारियों को भेजे गये पत्र में स्वीकार किया गया था कि राज्य में सेविका एवं सहायिका के चयन में अनियमितताएं संबंधी शिकायत/परिवाद पत्र बड़ी संख्या में सभी स्तरों पर मिल रहे हैं। कई मामलों में चयन के संदर्भ में रिश्वतखोरी की भी शिकायतें परिवाद में रहती हैं।

वहीं आईसीडीएस निदेशक ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक के पत्रकांक 757 दिनांक नौ अप्रैल 2018 का जवाब देते हुए कहा था कि चयन मार्गदशिका 2016 में सेविका/सहायिका का चयन आमसभा के माध्यम से वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में करने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में केंद्रीयकृत रूप से पटना में चयन करना युक्ति संगत नहीं है। ऐसे हालात में अगर फर्जी प्रमाण पत्र पर नियुक्ति के मामले सामने आये हैं तो कोई बड़ी बात नही है। गौरतलब है कि राज्य में पूर्व से 91,666 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है और नये 23,041 आंगबाड़ी केंद्र संचालित हैं।

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लोकायुक्त बिहार के आदेश पर चार महीने में भोजपुर जिले के 2014 आंगनबाड़ी सेविकाओं में से मात्र 58 प्रमाण पत्रों की जांच ही तीन बोर्ड से हो पायी है। जबकि सरकार ने दो सितम्बर को आदेश जारी कर सभी 1,14,707 आंगनबाड़ी सेविकाओं की शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की जांच विभिन्न बोर्ड से कराने का निर्देश सभी जिला प्रोग्रम पदाधिकारियों को दिया है। क्या दो दिनों में 1,14,707 आंगनबाड़ी सेविकाओं के प्रमाण पत्रों की जांच संभव है?

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