सड़क के बाद अब सदन में विरोध: मुजफ्फरपुर के मुद्दे को विधानसभा में उठाएगा राजद

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PATNA CHATRA R J D DURA MUZAFFARPUR MEIN CHAMKI BUKHAR SE BACHCHON KI MAUT KO LEKER RAJ BHVAN MARCH

बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार यानि एईएस से हो रही बच्चों की मौत के बाद अब नरकंकाल का मिलना सरकार के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है. शहर के एसकेएमसीएच के पीछे नरकंकाल मिलने के खुलासे के बाद बिहार में विपक्षी दल यानि आरजेडी इस पूरे मामले को सदन में उठाने की तैयारी में है. राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने न्यूज 18 को बधाई देने के साथ ही कहा कि इस खबर ने सिस्टम की लापरवाही को उजागर किया है.

राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्व ने कहा कि अस्पताल के बगल में नरकंकाल मिलना काफी दुखद है. पूर्वे ने पूछा कि लावारिस शवों का अंतिम संस्कार क्यों नहीं होता था. हम इस मामले की घोर निंदा करते हैं और हमारी पार्टी आगामी विधानसभा सत्र में इस पूरे मामले को सदन में उठाएगी और सरकार को घेरेगी.

28 जून से है मॉनसून सत्र
मालूम हो कि बिहार में विधानमंडल का मॉनसून सत्र 28 जून से शुरू होने वाला है. बिहार के मुजफ्फरपुर में उस वक्त हड़ंकप मच गया था जब अस्पताल परिसर के ठीक पीछे के जंगलों में नर कंकाल, हड्डियां मिली थीं. मीडिया में खबर आने के बाद प्रशासन ने मामले की जांचे के आदेश दिए हैं.

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जांच के आदेश
SKMCH के अधीक्षक डॉ एसके शाही ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की है. प्राचार्य और अधीक्षक की टीम संयुक्त रूप से इस मामले की जांच करेगी. उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल अमानवीय है. इसके साथ ही यह पुलिस और अस्पताल कर्मियों की लापरवाही भी है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शव की अंत्येष्टि के लिए 2000 रुपए देती है. उसके बाद भी इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं. अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है.

सीएम के दौरे से पहले जलाई गई थीं लावारिस लाशें
मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में शनिवार को जो नरमुंड मिले थे, उनके बारे में खुलासा हो गया है। असल में चार महीने से पड़ीं लावारिस डेढ़ दर्जन लाशें मुख्यमंत्री के आने के पहले एसकेएमसीएच में आनन-फानन में जलाईं गईं थीं। अब भी पोस्टमार्टम हाउस में 13 लाशें दो माह से अंत्येष्टि के इंतजार में हैं।

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कंकाल पर कोहराम मचने के दूसरे दिन रविवार को भी इस प्रकरण को लेकर एसकेएमसीएच व प्रशासनिक महकमे हलचल तेज रही। विभागीय सूत्रों का मानना है कि जांच में एसकेएमएसीएच व अहियापुर थाने के कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि जांच के क्रम में स्थानीय पुलिस के स्तर पर हुई चूक को भी रेखांकित किया जाएगा। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दाह स्थल की निगरानी के लिए एसएसपी के निर्देश पर अहियापुर थानेदार ने दो पदाधिकारी व होमगार्ड व चौकीदार को प्रतिनियुक्त किया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस परिस्थिति में पोस्टमार्टम हाउस में पड़ीं लावारिस लाशों को अमानवीय तरीके से एसकेएमसीएच परिसर में ही जला दिया जाता है।

इधर, एसकेएमसीएच के एफएमटी के प्रभारी डॉ विपिन कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद अज्ञात लाशों की जानकारी पुलिस को सौंप दी जाती है। दाह संस्कार करवाने का जिम्मा पुलिस का है। पुलिस अक्सर सामूहिक रूप से लाशों का संस्कार करवाती है। इसलिए कितनी लाशें जलाई गईं, यह जांच का विषय है।

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आठ जून को लिखा था पत्र
अहियापुर पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आठ जून को एसकेएमसीएच के अधीक्षक ने पोस्टमार्टम हाउस में पड़ीं लावारिस लाशों को जलाने का प्रस्ताव अहियापुर थाने को भेजा था। इसके बाद अहियापुर पुलिस ने लाश जलाने के लिए अनुमानित राशि के आवंटन के लिए एसएसपी के माध्यम से डीएम को पत्र लिखा था। राशि 15 जून को अहियापुर पुलिस ने बैंक से प्राप्त की। इसके बाद 17 तारीख को लाशों का दाह संस्कार किया।

श्मशान घाट पर ही होगा दाह संस्कार : एसएसपी
एसएसपी मनोज कुमार ने बताया कि एसकेएमसीएच परिसर में लावारिस लाशों के दाह संस्कार करने की चली आ रही परंपरा पर रोक लगा दी गई है। पूर्व से चिह्नित श्मशान घाट पर ही लाशों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।

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