संस्कृति के क्षेत्र में विकसित राज्य बनेगा बिहार : ऋषि

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PATNA VIKAS BHVAN KALA SANSKIRTI VIBHAG MEIN CLANDER KA LOKARPAN KERTE VIBHAG KE MINISTER KIRISHN KUMAR RISHI

कला संस्कृति एवं युवा विभाग मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नये कैलेन्डर में राज्य सरकार रेणु महोत्सव भी मनाने जा रही है। साथ ही सांस्कृति कार्यक्रमों को सुदूर क्षेत्रों में कराकर कलाकारों के मान-सम्मान व उनकी प्रतिभा को उभारने के लिए भी यह सरकार काम करेगी। कला संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री श्री ऋृषि आज अपने कक्ष में सांस्कृतिक कार्य निदेशालय के द्वारा जारी सांस्कृतिक कैलेन्डर 2018-19 का लोकार्पण करते ये बातें कही। उन्होंने कहा कि विभाग ने राज्य भर में कला को बढ़ावा देने के मकसद से अपने सांस्कृतिक समारोहों को राजधानी पटना की सीमा से परे राज्य के सुदूर इलाकों में ले जाने की कोशिश तेज कर दी है। इसकी शुरुआत बीते वर्ष में राज्य भर कई जगहों पर सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन से कर दी। इस बार भी हमने राजधानी में चल रहे शुक्रगुलजार और शनिबहार जैसे कार्यक्रमों को जिला मुख्यालयों में आयोजित करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। साथ ही हर जिले को साल में चार सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना आवश्यक है, जो जिला मुख्यालय के अलावा अन्य स्थानों पर हो। इन आयोजनों के लिए विभाग द्वारा प्रति कार्यक्रम 50,000 यानी कुल दो लाख रुपये की राशि तय की है। इसमें जिला प्रशासन के द्वारा स्थानीय कलाकारों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जायेगी। उन्होंने कहा कि कलाकारों के हित को देखते सांस्कृति कैलेन्डर में 26 नये कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। कला संस्कृति मंत्री ने कहा कि हमारी सफलता एक विकसित सांस्कृतिक राजधानी से ज्यादा एक विकसित सांस्कृतिक राज्य बनाने में निहित है। राज्य भर में कहीं पेंटिंग के रूप में, कहीं शिल्प के रूप में, कहीं लोकगाथाओं के रूप में या लोकगीतों के रूप में हर पंचायत और गांव की अपनी -अपनी सांस्कृतिक विशेषता है, जिसका कला और सौंदर्य की दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व है। इस मौके पर उनके साथ कला समीक्षक विनोद अनुपम, संजय कुमार सिंह, अर्चना राय भट्ट, मीना भी मौजूद रहीं।

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इस साल ये 26 नए महोत्सव होंगे

20-20 लाख की लागत से : पूर्णिया में होलिका महोत्सव, दीनाभद्री महोत्सव, पुरैनिया महोत्सव, अररिया में रेणु महोत्सव, कटिहार महोत्सव, मधुबनी में वाचस्पति महोत्सव, पटना सिटी में कौमुदी महोत्सव, मधेपुरा में गोपाष्टमी महोत्सव, भागलपुर में मंजूषा महोत्सव।

15-15 लाख से : नवीनगर में गजना महोत्सव, मधुबनी के पंडौल में उग्रनाथ महोत्सव, जमुई में गिद्धौर महोत्सव।

10-10 लाख से : पंडारक में सूर्य महोत्सव, सिंहेश्वर मेला, सिमरिया कुंभ, पू्. चंपारण में सीताकुंड महोत्सव, भवानीपुर पूर्णिया में व बनमनखी में कालीपूजा समारोह, पालीगंज में उलार महोत्सव के अलावा प. चंपारण नर्मदेश्वर मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, इसी जिले के सहोदरा माई और पटजीरवा माई स्थान में कार्यक्रम, जसौली पट्टी में चंपारण सत्याग्रह समारोह, टीकापट्टी में कालिका नाट्य समारोह।

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