संसद में बना काम नहीं करने का रिकॉर्ड

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मोदी सरकार का आखिरी बजट सत्र हंगाम की भेंट चढ़ गया है। अगले साल लेखानुदान पेश होगा। यह बजट सत्र पिछले 20 सालों में सबसे खराब सत्र रहा है। संसद के बजट सत्र का शुक्रवार को समापन हो गया है। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के साथ ही संसदीय मामलों की कैबिनेट कमेटी ने सत्र के सत्रावसान की सिफारिश कर दी। इसके साथ ही इस बजट के नाम पिछले सालों में सबसे कम र्चचा करने का तमगा मिल गया। लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के अविास प्रस्ताव को भी हंगामे के कारण नहीं लाया जा सका। इस दौरान दोनों सदनों में किसी भी मंत्रालय या विभाग की अनुदान मांगों पर र्चचा नहीं हो पाई। लोकसभा में अनुदान मांगों तथा वित्त विधेयक को बिना र्चचा के हंगामे के बीच ही पारित किया गया जबकि राज्यसभा में इन्हें केवल संदन के पटल पर रखा गया। लोकसभा में दूसरे चरण में 127 घंटे 45 मिनट तथा राज्यसभा 124 घंटे का समय बर्बाद हुआ। दोनों सदनों की कार्यवाही शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई और इसके साथ ही बजट सत्र समाप्त हो गया। बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी से 9 फरवरी तक चला था। इस दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर र्चचा हुई थी और उसे पारित किया गया था तथा 2018-19 के आम बजट पर र्चचा की गई थी, जिसका वित्त मंत्री जेटली ने जवाब भी दिया था। दूसरा चरण अवकाश के बाद पांच मार्च से शुरू हुआ था। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने दूसरे चरण में एक दिन भी कामकाज न होने तथा हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार- बार स्थगित किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने संसदीय व्यवस्था में लोगों को विास बनाये रखने के लिए सदस्यों को आत्मावलोकन करने और सदन को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने की अपील की। 22 दिन के दूसरे चरण में विपक्षी सदस्यों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में घोटाले, आन्ध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने , कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन तथा दलितों के मुद्दे पर जमकर हंगामा किया। मोदी सरकार के खिलाफ अविास प्रस्ताव का नोटिस सबसे पहले 15 मार्च को वाईएसआर कांग्रेस फिर तेलुगू देशम, उसके बाद कांग्रेस तथा अन्य पार्टियों के सांसदों ने दिए, लेकिन अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कुछ सदस्यों के हंगामे पर सदन में व्यवस्था न होने का हवाला देते हुए इन नोटिसों को सदन के समक्ष लाने में असमर्थता जताई। इस दौरान मुख्य रूप से अन्नाद्रमुक के सदस्य कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर हंगामा करते रहे। उत्पादकता में आई भारी कमी : संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार और संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल तक स्थगित किये जाने के बाद आज यहां संवाददाताओं से कहा कि 29 जनवरी से शुरू हुये इस बजट सत्र के दोनों चरणों में लोकसभा की 29 और राज्यसभा की 30 बैंठकें हुयी है। पहले चरण में लोकसभा की सात और राज्यसभा की आठ बैठकें हुयी थी। उन्होंने कहा कि पहले चरण में लोकसभा की उत्पादकता 134 प्रतिशत और राज्यसभा की 96 प्रतिशत रही थी। लेकिन दूसरे चरण में कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय दलों के हंगामे के कारण लोकसभा की उत्पादकता मात्र 4 प्रतिशत और राज्यसभा की उत्पादकता आठ प्रतिशत रह गयी। इस तरह कुल मिलाकर बजट सत्र में लोकसभा की उत्पादकता 23 प्रतिशत और राज्यसभा की उत्पादकता 28 प्रतिशत रही।

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