संजीता चानू ने 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के भारत को दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया

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भारत की महिला वेटलिफ्टर खिलाड़ी संजीता चानू ने 21वें राष्ट्रमंडल खेलों के भारत को इन खेलों में दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया. अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर एक तरफा प्रदर्शन किया और महिलाओं की 53 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में भारत की झोली में स्वर्ण डाला. चानू ने स्नैच में 84 किलोग्राम का भार उठाया जो गेम रिकार्ड रहा. वहीं, क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 108 किलोग्राम का भार उठाया और कुल 192 के कुल स्कोर के साथ सोने का तमगा अपने नाम करने में सफल रहीं.

केवल 24 साल की संजीता मणिपुर की रहने वाली हैं. संजीता चानू ने वेटलिफ्टिंग में भारत की स्टार खिलाड़ी एन कुंजारानी देवी से प्रेरित होकर ली थी और 12 साल की उम्र से ही वेटलिफ्टिंगमें रुचि लेना शुरू कर दिया था. संजीता भारतीय रेलवे की कर्मचारी है. संजीता मैदान के बाहर स्वभाव से शर्मीली हैं लेकिन मैदान पर उतनी ही आक्रमक.

संजीता ने ग्लास्गो में 2014 में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत को स्वर्ण दिलाया था, लेकिन तब वह 48 किलोग्राम भारवर्ग में पीला पदक जीतने में सफल रही थीं. उस समय केवल  केवल बीस साल की उम्र में ही संजीता ने मीराबाई चानू को हराते हुए, गेम्स के रिकॉर्ड्स से केवल दो किलो कम  कुल 173 किलोग्राम का वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था.

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संजीता ने ग्लास्गो में 2014 में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत को स्वर्ण दिलाया था, लेकिन तब वह 48 किलोग्राम भारवर्ग में पीला पदक जीतने में सफल रही थीं. उस समय केवल  केवल बीस साल की उम्र में ही संजीता ने मीराबाई चानू को हराते हुए, गेम्स के रिकॉर्ड्स से केवल दो किलो कम  कुल 173 किलोग्राम का वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था.

2017 में उनका नाम अर्जुन अवॉर्ड की लिस्ट में शामिल नहीं था, जिसके बाद वो कोर्ट भी पहुंच गई थीं.  हालांकि उन्हें उसके बावजूद अर्जुन अवॉर्ड नहीं मिला था. एक बार फिर स्वर्ण पदक दिलाकर संजीता ने अपने अवार्ड को सही साबित किया. उनका बढ़ता उत्साह और आत्मविश्वास देखने लायक है.

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