शिव योग में है आज की सोमवारी कुंवारों के लिए खास

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PATNA - SADPURD SHIV MANDEER ME PRATHAM SOMBARI PUJA KARTA SARDALU

सावन शुक्ल पक्ष द्वितीया, 13 अगस्त को तीसरी और सबसे उत्तम सोमवारी होगी। यह सोमवारी पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र से युक्त शिव योग में मनाई जाएगी। सोमवारी को लेकर राजधानी के शिवालय सजधज कर तैयार हो गए हैं। तीसरी सोमवारी पुण्यदायिनी होने के कारण लोगों में इसको लेकर उत्साह है।पंडित राकेश झा ने बताया कि सावन का तीसरा सोमवार शिव योग में पड़ने से और भी पुण्य फलदायी हो गया है। सावन की सोमवारी पर विशेषकर शिव की कृपा बरसती है। मंदिरों में भोलेनाथ के भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और शिव की कृपा पाने के लिये जलाभिषेक और रूद्राभिषेक करेंगे। भगवान शिव पर गंगाजल, दूध, भांग-धतूर, आक, मधु, घी आदि अर्पित किये जाते हैं। सावन की तीसरी सोमवारी को सबसे उत्तम माना जाना है। इस बार सोमवार को ग्रह-गोचरों का खास संयोग बन रहा है। द्वितीया तिथि, पूर्वा फाल्गुन नक्षत्र के साथ शिव योग में श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। शिव योग में महादेव की पूजा अतिफलदायी होती है। महामृत्युंजय मंत्र और गायत्री मंत्र के साथ अभिषेक-पूजन से सभी कष्ट पलभर में दूर हो जाते हैं।पंडित राकेश के मुताबिक, सावन के सबसे उत्तम और तीसरी सोमवारी पर शिव पूजा का शुभ मुहूर्त शिव योग में प्रात: 7:36 बजे से संध्या 4:55 बजे तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:28 बजे से 12:20 तक, गुली मुहूर्त दोपहर 1:32 बजे से 3:10 बजे तक है।इस शिव कृपा के महासंयोग में श्रद्धालुओं को भोलेनाथ की पूजा से स्थिर संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होगी। इस सोमवारी पर रूद्राभिषेक, शिव सहस्रनाम, शिव पंचाक्षर, शिव महिम्न, रूद्राष्टक, शिव कवच और शिव तांडव स्तोत्र का 108 बार पाठ करने से दरिद्रता का ह्रास और शिव की विशेष कृपा प्राप्त होगी। इस सोमवारी कुंवारों के लिए खास संयोग है। शिव की सच्चे मन से पूजा करने से उनका विवाह शीघ्र हो जायेगा। जलाभिषेक, रूद्री पाठ और ‘‘ú नम: शिवाय’ का जाप करने से शिव जी मनचाहा वरदान भी देंगे। जो विवाहित हैं उन्हें सुखमय वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होगा।मनोकामना पूर्ति के लिए इनसे करें महादेव की पूजापुत्र प्राप्ति – दूध घी से अभिषेक व धतूरे का फूलदीर्घायु – अकवन का फूलशत्रु नाश – घी और सरसों तेल से अभिषेक, कुसुम का फूलसुयोग्य पत्नी – बेला का फूलसुख प्राप्ति – हरसिंगार का पुष्पमोक्ष प्राप्ति – आक, अलसी या समय पत्रलक्ष्मी प्राप्ति – दूध और ईख रस से अभिषेक तथा शंख पुष्प

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