शिक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता : शिक्षा मंत्री

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शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा ने कहा कि शिक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता में शामिल है। सभी पंचायतों में उच्च माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा पहुंचाना बड़ी बात है। हमारी सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों में उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालय की स्थापना की है। गांव में सड़क-बिजली पहुंच जाने के कारण बहुत विकास हुआ है। जिस कारण गांव की जमीन भी महंगी हो गयी है और कोई भी व्यक्ति मुफ्त में जमीन नहीं देना चाहते हैं। जिस कारण कुछ पंचायतों में कठिनाई है। परंतु सभी उत्क्रमित विद्यालय में इस चाल से नौवीं की परीक्षा शुरू करा दी जायेगी।मंत्री बिहार विधान परिषद में सोमवार को शिक्षा विभाग के अनुदान पर मांग पर आयोजित वाद विवाद का जवाब दे रहे थे। मुख्य विपक्षी राजद सदस्यों ने सरकार पर नाकामी का आरोप लगाते हुए सरकार के जवाब का बहिष्कार किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने चार लाख शिक्षकों की नियुक्ति की है। फिर से शिक्षकों की नियुक्ति शुरू की गयी है। उन्होंने कहा कि राज्य में 391 बुनियादी विद्यालय है। इन विद्यालयों में 3325 शिक्षक कार्यरत है। उन्होंने कहा कि बुनियादी विद्यालयों के पास काफी भूमि है। इन विद्यालय की भूमि के बेहतर इस्तेमाल के लिए सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं चलाये जाने के कारण लड़कियों की शिक्षा में सुधार हुआ है। राज्य के 99 फीसद बच्चों का नामांकन विद्यालय में हुआ है। मात्र एक फीसद बच्चे ही विद्यालय से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि पूर्णिया में मदरसा शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय खोला गया है। वाद विवाद में जदयू के डा.रामवचन राय, जदयू के वीरेंद्र नारायण यादव, रजाद के दिलीप राय, भाजपा के संजय पासवान, राजद के सुवोध राय, भजपा के सीपी सिन्हा और राजद के डा.रामचंद्र पूव्रे ने भाग लिया। जदयू के वीरेंद्र नारायण यादव ने सरकार से हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाने की मांग करने और बिहार में तमिल-कन्नड़ की पढ़ाई शुरू कराने की मांग की।

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