शिक्षकों के वेतन को 14.46 अरब मंजूर नीतीश कैबिनेट के फैसले

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राज्य सरकार ने मंगलवार को प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में कार्यकरत शिक्षकों को चालू वित्त वर्ष में वेतन भुगतान के लिए 14 अरब 46 करोड़ आठ लाख रुपये विमुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि राज्य के प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में नगर प्रारंभिक शिक्षक, प्रखंड शिक्षक एवं पंचायत शिक्षक के स्वीकृत कुल 66104 पद को वित्त वर्ष 2018-19 में वेतन भुगतान के लिए नगर निकायों, पंचायत समितियों एवं ग्राम पंचायतों को सहायक अनुदान मद में कुल 14 अरब 36 करोड़ आठ लाख रुपये की स्वीकृति एवं विमुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। सरकार ने बिहार न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारियों के पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन पर 1 जनवरी 2016 के प्रभाव से अंतरिम राहत देने का निर्णय लिया है। इसी तरह बिहार न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों को 1 जनवरी 2016 के प्रभाव से मूल वेतन पर 30 प्रतिशत अंतरिम राहत देने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई है। वित्त वर्ष 2018-19 में मत्स्यिकी महाविद्यालय किशनगंज के लिए अकादमिक एवं प्रशासनिक पदों समेत सपोर्टिक पद का सृजन, आधारभूत संरचना का विकास तथा अन्य विविध कायरें के लिए 40 करोड़ 31 लाख 64 हजार 360 रुपये व्यय को मंजूरी दी गई है। श्री सिंह ने बताया कि सरकार ने चालू वित्त वर्ष से अनाजों की अधिप्राप्ति के प्रबंधन के लिए बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड को उपलब्ध कराई जाने वाली राशि पर ब्याज दर नौ प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दी है। इस निर्णय से जिला केंद्रीय सहकारी बैंक को 7.25 प्रतिशत एवं जिला केंद्रीय सहकारी बैंक से प्राथमिक कृषि साख समिति (पैक्स) और व्यापार मंडलों को आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर कैश क्रेडिट उपलब्ध हो सकेगा। सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1860 की धारा 24 में प्रदत्त शक्तियों के अधीन बिहार रजिस्ट्रीकरण नियमावली 1965 एवं 2015 को निरसित करते हुए बिहार सोसायटी निबंधन नियमावली 2018 को अधिनियमित किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। श्री सिंह ने बताया कि नालंदा जिले में सरमेरा प्रखंड के पण्रावा गांव में आयोजित होने वाले श्री श्री 108 श्री शरण निवास बाबा महतो साहब मेले को बिहार राज्य मेला प्राधिकार के प्रबंधन में लिये जाने एवं इसे राजकीय मेला का दर्जा देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। उन्होंने बताया कि बैठक में कुल 20 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

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राज्य सरकार ने सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के आधार पर राज्य कर्मियों का वेतन पुनरीक्षण किये जाने के कारण सरकारी सेवा में समूह ‘‘घ’ (ग्रुप ‘‘डी’) को समाप्त कर उसे समूह ‘‘ग’ (ग्रुप ‘‘सी’) में समायोजित करने का निर्णय लिया है।मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने बताया कि सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के आधार पर 1 जनवरी 2016 के प्रभाव से राज्य कर्मियों का वेतन पुनरीक्षित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप राज्य की सेवाओं एवं पदों का फिर से वर्गीकरण किया गया। इसके आलोक में ग्रुप ‘‘डी’ को समाप्त कर उसे ग्रुप-सी में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। श्री सिंह ने बताया कि सेवाओं एवं पदों के पुनर्वर्गीकरण के तहत समूह ‘‘क’, ‘‘ख’, ‘‘ग’ और अवर्गीकृत समूह को रखा गया है। समूह ‘‘क’ में पुनरीक्षित वेतन स्तर संरचना में स्तर 11 से 14, समूह ‘‘ख’ में स्तर छह से नौ तथा समूह ‘‘ग’ में स्तर एक से पांच तक को शामिल किया गया है। प्रधान सचिव ने बताया कि अवर्गीकृत समूह के तहत पुनरीक्षित वेतन स्तर संरचना में स्तर (-1) तथा अन्य स्तर (पे मैट्रिक्स के स्तर एक से 14 को छोड़कर) को रखा गया है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय सेवाओं के सभी पदों को समूह ‘‘क’ में रखा गया है। श्री सिंह ने बताया कि सेवाओं एवं पदों के पुनर्वर्गीकरण के तहत बिहार समूह ‘‘घ’ (भर्ती एवं सेवा शत्रे) नियमावली 2010 में जहां कहीं भी समूह-घ अथा अनुसेवक, आदेशपाल और चपरासी शब्द का प्रयोग किया गया है उसके स्थान पर अब कार्यालय परिचारी या परिचारी (विशिष्ट) शब्द का प्रयोग किया जाएगा।प्रधान सचिव ने बताया कि सरकार ने सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के आधार पर राज्य में वेतन पुनरीक्षण लागू होने के बाद विभिन्न सेवाओं एवं संवगरें में प्रोन्नति के लिए वेतन स्तर (पे लेवल) आधारित कालावधि का निर्धारण करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि राज्य की सरकारी सेवाओं में अब ग्रेड पे पण्राली को खत्म कर पे-लेवल पण्राली को अपनाया गया है।

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