शासन में दी जानी चाहिए प्रोफेशनल को लेटरल इंट्री : प्रशांत किशोर

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चंद्रगुप्त इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट, पटना (सीआईएमपी) ने सोमवार को एक टॉक शो का आयोजन किया जिसमें देश के प्रसिद्ध राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ ‘‘यूथ इन पॉलिटिक्स’ थीम पर ऑनलाइन पोर्टल द लल्लन टॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने बातचीत की। 75 मिनट के इस टॉक शो में प्रशांत किशोर ने सवालों के एक विस्तृत स्पेक्ट्रम का जवाब दिया और राजनीति तथा चुनावी प्रबंधन में युवाओं की भागीदारी की आवश्यकता से संबंधित मुद्दे पर संबोधित किया। उन्होंने समकालीन राजनीतिक मुद्दों और दृष्टिकोणों पर भी र्चचा की। आजादी के बाद की पहली लोकसभा के डेटा का हवाला देते हुए उन्होंने लोकसभा में युवाओं की संख्या में गिरावट और बुजुगरे की संख्या में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की और राजनीति में युवाओं की भागीदारी की तत्काल आवश्यकता की वकालत की। प्लेटो का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर राजनीति में गुणवत्ता की गिरावट के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि व्यक्तित्व, मुद्दों, कथाओं के आधार पर लोगों को जातिगत पंक्तियों से ऊ पर उठकर भी वोट डालते देखा गया है। उन्होंने 1984, 1989 और 2014 के लोकसभा चुनाव में राजीव गांधी, वीपी सिंह और नरेंद्र मोदी द्वारा क्लीन स्वीप के उदाहरणों का हवाला दिया और अपनी बात को पुख्ता किया। एक प्रश्न के उत्तर में प्रशांत किशोर ने गवन्रेस को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए शासन में पेशेवरों की लेटरल इंट्री की पुरजोर वकालत की। प्रशांत किशोर ने डॉ. वर्गीस कुरियन (ेत क्रांति), डॉ. एमएस स्वामीनाथन (हरित क्रांति), डॉ. सैम पित्रोदा (आईटी क्रांति), डॉ. अब्दुल कलाम (मिसाइल मैन), विक्रम साराभाई (अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी), नंदन नीलेकणी (आधार) जैसे पेशेवरों के उदाहरणों का हवाला दिया जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में क्रांति ला दी। एक स्पष्टवादी की तरह प्रशांत किशोर ने विभिन्न नेताओं के साथ अपने समान रूप से अच्छे संबंधों के बारे में भी बताया जिनमें अमित शाह से लेकर नीतीश कुमार, लालू यादव से लेकर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे से लेकर चंद्र बाबू नायडू, जगन रेड्डी और राहुल गांधी तक सभी शामिल हैं। उन्होंने राजनीति में भागीदारी के लिए युवाओं को जोड़ने के लिए उनकी 10 वर्षीय योजना के बारे में भी बात की। साक्षात्कार के बाद, उन्होंने श्रोताओं से सवाल-जवाब भी किये जिसमें मुख्य रूप से शहर के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों जैसे कि चंद्रगुप्त इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट पटना (सीआईएमपी), चाणक्य यूनिवर्सिटी और नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी से स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट के छात्र और छात्राएं शामिल थे।

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