शर्मसार हुई चिकित्सा व्यवस्था : इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचे मरीज को सुरक्षाकर्मियों ने पीटा

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मधेपुरा : सदर अस्पताल की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे सुपौल जिला स्थित छातापुर प्रखंड निवासी रविंद्र राज की सरेआम डंडों से पिटाई कर दी. इस घटना के दौरान बनाये गये वीडियो के वायरल होने से समाजवाद को मजबूती देने वाली मधेपुरा की किरकिरी हो रही है.

जानकारी के मुताबिक, छातापुर निवासी पीड़ित मरीज 24 वर्षीय रविंद्र राज ज्यादा बीमार होने के कारण डॉक्टर से दिखाने के बाद एक बार जरूरी सलाह के लिए मिलवाने का आग्रह तैनात गार्ड से कर रहा था. मरीज ने गार्ड को अपनी परेशानी बताते हुए विनम्रता से कई बार गुहार भी लगायी. मौजूद अन्य मरीज भी गार्ड से मददगार बनने की बात कही. इसके बावजूद गार्ड मरीज को डॉक्टर से मिलवाने के बजाय गाली-गलौज करते अभद्र व्यवहार करने लगा. पीड़ित मरीज द्वारा विरोध करने पर उक्त गार्ड ने अपने अन्य साथियों को बुला कर मरीज के साथ मारपीट करने लगा. इस घटना का वीडियो मौजूद कई लोगों ने बना लिया है. सुरक्षाकर्मियों की हैवानियत से पीड़ित बार-बार बचाने की गुहार लगा रहा था. लेकिन, मौजूद स्वास्थ्य कर्मी भी मुकदर्शक बने हुए थे. मरीज ने ओपीडी में तैनात चिकित्सक विपिन कुमार गुप्ता से दिखाया था.

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घटना के समय अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा. मारपीट के दौरान मरीज एवं परिजन इधर-उधर भागने लगे. ओपीडी परिसर में गार्ड द्वारा मरीज की पिटाई के दौरान इलाज के लिए पहुंची महिलाएं और बच्चे मदद की गुहार लगाने लगे. पल भर में ओपीडी सुरक्षाकर्मियों के कोपभाजन का केंद्र बन गया. ओपीडी परिसर के अंदर हुई इस घटना से परिजनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. छोटे-छोटे बच्चों के मन में दहशत का माहौल बन गया. वहां मौजूद अन्य मरीज एवं परिजनों ने गार्डों पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा की गार्ड के मनमाने रवैया के कारण युवक की जानवरों की तरह पिटाई की गयी है. उन लोगों ने कहा कि आये दिन अस्पताल में परिजनों एवं मरीजों से गार्ड की बहस हो जाती है. कुछ भी पूछने पर या किसी भी तरह की जानकारी लेने पर सीधे बदतमीजी पर उतर जाते हैं. कभी-कभी तो अभद्र शब्दों का भी प्रयोग करने लगते हैं. सदर अस्पताल में सुरक्षाकर्मियों के इस रवैये की वजह से कई बार हंगामा का माहौल बनते रहा है. अस्पताल में मौजूद लोगों ने बताया कि मरीजों का इलाज कराने के लिए आनेवाले लोगों से बदसलूकी ठीक नहीं है.

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अस्पताल में भर्ती के दौरान 27 फरवरी को उनके सहयोगियों ने अपने आठ से दस बाइक को अस्पताल के सड़क पर ही लगा दी. इलाज से वापसी के दौरान जब वे लोग बाहर जाने लगे. वहां उपस्थित सिपाही एवं कर्मियों ने उन्हें सड़क पर गाड़ी ना लगाने की सलाह दी. इसके बाद संतोष के सहयोगियों ने अस्पताल के कर्मियों सही बहस करने लगे. अस्पताल के कर्मियों के लाख समझाने के बावजूद वे लोग झड़प पर उतर गये. अस्पताल में मौजूद डॉक्टर को भी यह समझ नहीं आया कि आख़िर मामला क्या है. लेकिन, उन लोगों ने घटना की स्थिति को देखते हुए अपनी सूझबूझ से अस्पताल कर्मियों को शांत कर उन लड़कों को अस्पताल से बाहर जाने को कहा जिसके बाद वहां हो रही झड़प शांत हुई थी.

इस संबंध में मधेपुरा के सिविल सर्जन डॉ गजाधर पांडेय ने कहा कि ‘मैं जिलाधिकारी साहब के साथ बैठक में था. मुझे घटना की जानकारी नहीं है. संज्ञान में मामला आते ही जांच की जायेगी.’

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वहीं, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ अखिलेश ने बताया कि ‘ओपीडी के समय कुछ हंगामा होने की सूचना मिली थी. लेकिन, सुरक्षाकर्मियों द्वारा मारपीट किये जाने की बात मालूम नहीं है.’

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