शराबबंदी :न्यायालय दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाने पर विचार कर सकता है :उच्च न्यायालय

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मनमाने ढंग से शराबबंदी कानून लागू करने की वजह से तंग आ चुका उच्च न्यायालय अब जुर्माना लगाने पर विचार कर सकता है। इस तरह के मामले में सुनवाई कर रहा पटना उच्च न्यायालय ने कहा कि इस वजह से हजारों मुकदमे अदालत आ चुके हैं। सभी अदालतें इस तरह के मुकदमों को निपटाने में लगी हैं। ऐसा ही होता रहा तो न्यायालय दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाने पर विचार कर सकता है। यह सभी मुकदमों के साथ किया जायेगा।मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन और न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की पीठ ने यह कहते हुए मुख्य सचिव व जमुई के जिलाधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। पीठ ने दोनों से यह जवाब 30 जुलाई को देने को कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी है। उन्होंने यह दिशा-निर्देश राजेश कुमार पंडित की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। नशे की हालत में तीन लोगों को एक ही मोटरसाइकिल से कहीं जाने के दौरान जमुई में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और उसकी मोटरसाइकिल जब्त कर ली गयी। जमानत मिलने के बाद बाइक मालिक ने अपनी मोटरसाइकिल छुड़ाने के लिए उच्च न्यायालय में अपने अधिवक्ता सत्य प्रकाश पराशर के माध्यम से याचिका दाखिल की। न्यायालय ने 22 मार्च को उसकी जब्त मोटरसाइकिल दो मुचलकों पर छोड़ने का आदेश दिया। जब वह मोटरसाइकिल लेने जिलाधिकारी के पास पहुंचा तो जिलाधिकारी ने मुचलके के साथ 43 हजार रुपये की बैंक गारंटी की भी शर्त रख दी और मोटरसाइकिल छोड़ने का आदेश दिया। उसके अधिवक्ता ने फिर बैंक गारंटी वाली शर्त को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। न्यायालय ने उस याचिका पर सुनवाई के दिन कड़ा रुख अपनाया और कड़ी टिप्पणी करते हुए मुख्य सचिव व जिलाधिकारी से जवाब तलब किया। इसी तरह से एक अन्य मामले में एक व्यक्ति को 1.15 लीटर शराब के साथ पकड़े जाने पर उसके पास से मिली पांच लाख रुपये से ज्यादा की राशि को भी जब्त कर लेने पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया था। उसने सीबीआई जांच की बात कही थी और सीबीआई के वकील को बुलवाया था। मंगलवार को महाधिवक्ता ललित किशोर ने न्यायालय से कहा कि इस मामले की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जांच करवा रहे हैं। सीबीआई को जांच नहीं सौंपी जाय। न्यायालय ने कहा फिलहाल सीबीआई को जांच करने के लिए नहीं कह रहे, लेकिन अगले मंगलवार को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपनी जांच रिपोर्ट पेश करें।

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