शरद व अनवर की सदस्यता खत्म करने का निर्णय असंवैधानिक : जावेद रजा

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पटना : देश में संवैधानिक लोकतंत्र विफल हो गया है। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू का राज्यसभा सदस्य शरद यादव एवं अली अनवर अंसारी की सदस्यता खत्म करने का निर्णय संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों एवं नियमों की गलत व्याख्या कर दिया गया असंवैधानिक निर्णय है। भारत में संवैधानिक लोकतंत्र है और संसदीय दलीय पण्राली को मजबूत करने एवं दल बदल को रोकने के लिए संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़कर राजनीतिक दलों की भूमिका का पहली बार 1985 प्रावधान किया गया। उसके पश्चात 1989 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 (ए) में राजनीतिक दलों के पंजीकरण का प्रावधान किया गया, जिसमें भारत निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों के संविधान को पंजीकृत करता है। साथ ही इसके पूर्व से निर्वाचन आयोग चुनाव चिन्ह आरक्षण, आवंटन नियम 1968 के अनुसार राजनीतिक दलों को चुनाव चिह्न का आरक्षण एवं आवंटन करता है। यह बातें जदयू के पूर्व महासचिव जावेद रजा ने कही। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने अपने विस्तृत निर्णय में जनप्रतिनिधित्व नियम की धारा 29 (ए) के अनुसार पंजीकृत जनता दल (यूनाइटेड) संविधान के अनुसार निर्वाचित पदाधिकारियों की वैद्यता पर अपने निर्णय में कहा कि यह हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है और इस पर निर्णय पार्टी या सक्षम न्यायालय करेगा। इसी प्रकार राज्यसभा के सभापति ने अपने 4 दिसम्बर के निर्णय में जनता दल (यूनाइटेड) के निर्वाचित पदाधिकारियों की वैद्यता के सवाल पर कहा की यह हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है । संवैधानिक प्रश्न यह है कि भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्यसभा के सभापति जब संसद के बनाये हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 (ए) के अनुसार पंजीकृत राजनीतिक दल के निर्वाचित पदाधिकारियों की वैद्यता का निर्धारण उनके क्षेत्राधिकार में नहीं है फिर वे किस क्षेत्राधिकार से तथाकथित असंवैधानिक एवं फर्जी तरीके से निर्वाचित स्वयंभू पार्टी पदाधिकारियों की सूचना या याचिका के आधार संविधान की दसवीं अनुसूची के प्रावधानों एवं नियमों की व्याख्या कर शरद यादव एवं अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म की। याचिकाकर्ता राम चन्द्र प्रसाद सिंह की सदस्यता खत्म करनी चाहिए। उस पर मौन रहकर उन्हें क्यों बचा रहे हैं । उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू द्वारा जदयू के निर्वाचित पदाधिकारियों की वैद्यता के निर्णय के पूर्व जदयू के तथाकथित स्वयंभू प्रधान महासचिव केसी त्यागी एवं महासचिव राम चन्द्र प्रसाद सिंह के पत्र एवं याचिका के अनुसार शरद यादव एवं अली अनवर की स्वेच्छा से जदयू छोड़ने की सूचना के आधार पर राज्यसभा की सदस्यता खत्म करना संविधान की 10वीं अनुसूची के प्रावधानों के खिलाफ असंवैधानिक निर्णय है। देश में संवैधानिक लोकतंत्र विफल होने का प्रमाण है ।,जो देश की जनता के सामने बड़ी चुनौती है। जदयू सभी देशवासियों से संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनप्रतिरोध शुरू करने की अपील करता है।

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